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धर्म : जगन्नाथ रथ यात्रा : जीवन में एक बार रथ की रस्सी खींचना क्यों माना जाता है शुभ …

Jagbhan Yadav

Wed, Jul 15, 2026

Dharm Desk – भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा अत्यंत पवित्र और दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर है.यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि वह क्षण होता है, जब भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते है. स्कंदपुराण, ब्रह्मपुराण और पद्म पुराण में रथ यात्रा की महिमा का उल्लेख मिलता है, जिसमें भगवान के दर्शन, सेवा और रथ के साथ जुड़ने को विशेष पुण्य दायी बताया है.

स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और पद्म पुराण में रथ यात्रा की महिमा

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा तीन अलग-अलग भव्य रथों में सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते है. इस यात्रा को भगनवा के नगर भ्रमण के रूप में देखा जाता है, जिसका उद्देश्य हर वर्ग के भक्तों को बिना किसी भेदभाव के दर्शन देना है.

रथ की रस्सी को क्यों खींचना चाहिए

रथ की सेवा और सहभागिता को अत्यंत पुण्य कारी बताया गया है. स्कंद पुराण में वर्णित है कि रथ के दर्शन, स्पर्श और सेवा से मनुष्य के पापों का नाश होता है और उसे यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है. इसी आधार पर रथ की रस्सी खींचना भगवान की प्रत्यक्ष सेवा है. इसे भक्ति और समर्पण की सर्वोच्च अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है, जहां भक्त स्वयं भगवान के रथ को आगे बढ़ाने में सहभागी बनता है. यही कारण है कि लोक परंपरा में यह मान्यता प्रचतलि हो गई कि जीवन में एक बार रथ की रस्सी खींचना अत्यंत शुभ होता है.

भगवान जगन्नाथ के दर्शन और स्पर्श का महत्व

रथ यात्रा के दौरान भगवान के दर्शन का फल कई यज्ञों के बराबर कहा जाता है. रथ के पहिए, रस्सी या रथ के समीप पहुंचकर दर्शन करना भी मोक्ष प्राप्ति का रास्ता है. श्रद्धालु मानते हैं कि इस समय भगवान की कृपा सहज रूप से प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

रथ यात्रा में सभी होते हैं सामान्य

रथ यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता. राजा से लेकर सामान्य व्यक्ति तक, सभी एक ही रस्सी को पकड़कर रथ खींचते है. यह परंपरा सजमा में समानता, एकता और सामूहिक भक्ति का संदेश देती है.

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