: सोमवती अमावस्या पर इन 5 जगहों पर जलाएं दीपक, पितर और माता लक्ष्मी होंगी प्रसन्न, जानें मुहूर्त…
Wed, Dec 18, 2024
नई दिल्ली:-
इस साल सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर को है. यह पौष आमवस्या है. साल 2024 की यह अंतिम अमावस्या भी है. सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान करने की विधान है, इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि भी करते हैं. लेकिन सोमवती अमावस्या के दिन दीपक जलाने का बड़ा महत्व है. इस दीपक को जलाने से जहां देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, वहीं पितर भी खुश होते हैं, जिससे परिवार के सुख और समृद्धि में बढ़ोत्तरी होती है. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं कि सोमवती अमावस्या पर किन 5 जगहों पर दीपक जलाना चाहिए? दीया जलाने का शुभ मुहूर्त क्या है?
इन स्थानों पर जलाएं दीया
मुख्य द्वार के बाहर
सोमवती अमावस्या के दिन आप अपने घर के मुख्य द्वार के बाहर माता लक्ष्मी के लिए घी का दीपक जलाएं. घी नहीं है तो सरसों या फिर तिल के तेल का दीपक जलाएं. दीपक वाले स्थान पर एक लोटा पानी भी रख दें और मुख्य द्वार खोलकर रखें. ऐसा करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होंगी और आपके घर में उनका आगमन होगा. दीपक और जल से नकारात्मकता दूर होगी. यह दीपक आपको सूर्यास्त होने के बाद तब जलाना है, जब अंधेरा होने लगे.
घर बाहर दक्षिण दिशा में
सोमवती अमावस्या के अवसर पर घर में बाहर दक्षिण दिशा में अपने पितरों के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाएं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या की शाम पितर जब अपने लोक लौटते हैं तो उनकी राह में उजाला होता है, इससे वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं.
पूर्वजों की फोटो के पास
अमावस्या के दिन पितर धरती पर आते हैं और अपने वंश से तर्पण, पिंडदान आदि की अपेक्षा करते हैं. यह सब करते हैं तो बहुत अच्छा है. उसके अलावा घर में दक्षिण दिशा में जहां पर अपने पितरों की तस्वीर लगा रखी है तो वहां पर भी एक दीपक जला दें. यह दीपक भी आप सरसों या तिल के तेल का जला सकते हैं.
पीपल के पेड़ के पास
पीपल के पेड़ में देवी-देवताओं और पितर देवों का वास होता है. ऐसे में आप सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ के नीच सरसों के तेल का एक दीप जरूर जला दें. आप चाहें तो देवों के लिए तिल के तेल का दीपक जला सकते हैं और पितरों के लिए सरसों के तेल का दीपक. ऐसा करने से आपके दुख दूर होंगे और देवों का आशीर्वाद प्राप्त होगा.
घर के उत्तर-पूर्व कोण पर
सोमवती अमावस्या के दिन आप अपने घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व कोण में घी का दीपक जलाएं. मान्यताओं के अनुसार, इस दिशा में देवों का वास होता है. आपका घर धन और धान्य से भरेगा. माता लक्ष्मी की कृपा होगी.
सोमवती अमावस्या पर दीपक जलाने का मुहूर्त
सोमवती अमावस्या के दिन आप सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में ये दीपक जलाएं. दीपक अंधकार को दूर करके सकारात्मकता फैलाता है. सोमवती अमावस्या के दिन सूर्यास्त 05:34 पी एम पर होगा. सूर्यास्त के बाद से प्रदोष काल प्रारंभ होता है. इस समय से आप सोमवती अमावस्या का दीपक जला सकते हैं.
: शुरू हुआ खरमास का महीना, इस दौरान भूलकर भी न करें ये काम
Mon, Dec 16, 2024
Kharmas 2024:
15 दिसंबर से खरमास शुरू हो चुका है, इसे मलमास भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में खरमास या मलमास को अच्छा नहीं माना जाता। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव का गोचर बृहस्पति की राशि धनु और मीन में होता है, तब खरमास शुरू होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार सूर्य 15 दिसंबर 2024 की रात 9 बजकर 56 मिनट पर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। इस तरह सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास शुरू हो जाएगा। आपको बता दें कि खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं। तो आइए जानते हैं कि खरमास के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
खरमास के दौरान करें ये काम
खरमास में विशेष रूप से भगवान सूर्य देव की पूजा करें। तांब के लोटे से भगवान सूर्य देव को पूर्व दिशा की ओर मुख कर के जल अर्पित करना चाहिए। जल में कुमकुम, गुलहड़ का फूल, रोली इत्यादि इन सामग्रियों को डाल कर सूर्य नारायण की पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा खरमास के दौरान नियमित रूप से तुलसी माता को जल अर्पित करें और शाम के समय घर के मंदिर में रोजाना दीया जलाएं। खरमास में पूजा पाठ, व्रत, भजन-कीर्तन करें। वहीं खरमास के दौरान गरीब और जरूरतमंदों को अन्न, धन और वस्त्र का दान करें से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। खरमास के दौरान सूर्य देव के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा जरूर करें।
खरमास 2024 कब खत्म होगा
15 दिसंबर को रात 10 बजकर 19 मिनट पर सूर्य धनु राशि में गोचर करेंगे, जिसे धनु संक्रांति कहा जाता है। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास शुरू हो जाएगा। खरमास का समापन 14 जनवरी 2025 को होगा। इसके बाद ही शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्य फिर से प्रारंभ होंगे।
खरमास के दौरान क्या न करें?
खरमास के दौरान विवाह और अन्य शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
खरमास में नए व्यवसाय या नए काम की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।
खरमास के दौरान घर का निर्माण भी नहीं किया जाता है।
खरमास के दौरान गृह प्रवेश का आयोजन नहीं करना चाहिए।
खरमास के दौरान यात्रा भी नहीं करनी चाहिए जब तक कि यह ज्यादा आवश्यक न हो।
खरमास के दौरान नई खरीदारी करने की भी मनाही होती है।
: चार धाम की तर्ज पर विकसित होंगे छत्तीसगढ़ के पांच शक्तिपीठ…
Sat, Dec 14, 2024
Shakti Peeths
Raipur :
राज्य सरकार ने प्रदेश के पांच शक्तिपीठों को चार धाम की तर्ज पर विकसित करने का निर्णय लिया है। इनमें सूरजपुर जिला स्थित कुदरगढ़, सक्ती जिला स्थित चंद्रहासिनी चंद्रपुर, बिलासपुर जिला का महामाया रतनपुर, दंतेवाड़ा जिला स्थित दंतेश्वरी मंदिर और राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित मां बमलेश्वरी मंदिर शामिल हैं।
प्रदेश में पर्यटन की रफ्तार बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है। उद्योग का दर्जा मिलने के बाद अब पर्यटन के क्षेत्र में स्थायी पूंजी निवेश करने पर उद्यमियों को सामान्य उद्योगों की तरह छूट और रियायतें मिलेंगी। प्रदेश में पिछले एक वर्ष में 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की निश्शुल्क यात्रा कराई जा चुकी है।
साथ ही श्रीराम लला अयोध्या धाम दर्शन योजना में श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम और काशी विश्वनाथ धाम के लिए निश्शुल्क यात्रा की सुविधा दी जा रही है। वहीं, प्रसादी योजना के तहत मां बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़ का विकास किया जा रहा है।
सेंध लेक के पास विकसित होगा वेलनेस टूरिज्म
नवा रायपुर स्थित सेंध लेक के पास वेलनेस टूरिज्म विकसित करने की तैयारी है। दुनियाभर के पर्यटक यहां सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए आते हैं। इसके साथ ही माना तूता में 95.79 करोड़ की लागत से चित्रोत्पला फिल्म सिटी का निर्माण होगा।
मयाली का हुआ चयन
स्वदेश दर्शन योजना 2.0 चैलेंज बेस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर जशपुर जिले के मयाली का चयन किया गया है। पर्यटन विभाग ने प्रदेश के लगभग 140 पर्यटन स्थलों का चयन किया है।
विश्व धरोहर की सूची में शामिल होंगे ये स्थल
डोंगरगढ़ का बम्लेश्वरी मंदिर, राजिम का त्रिवेणी संगम और सिरपुर के बौद्ध स्थल ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व भी रखते हैं। सिरपुर, मल्हार और बारसुर के प्राचीन मंदिर प्रदेश की समृद्धि का प्रतीक हैं। इन स्थलों को राज्य सरकार विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने के लिए प्रयासरत है।
महाकाल की तर्ज पर विकसित होगा भोरमदेव मंदिर
उज्जैन के महाकाल की तर्ज पर कवर्धा जिला स्थित भोरमदेव मंदिर में ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां आवागमन की सुविधाओं के साथ ही ठहरने की भी सुविधा होगी। यहां केमिकल ट्रीटमेंट रूफिंग का काम किया जा रहा है। भक्तों के लिए शेड निर्माण, मंदिर के पीछे वीआइपी गेस्ट रूम, मंदिर परिसर में सोलर लाइट्स व सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।