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रक्षाबंधन से पहले चीनी की कीमतों में लगी आग : कीमत पहुंची ₹65 के पार; क्यों बढ़ रहे दाम और क्या है सरकार का प्लान?

Jagbhan Yadav

Sat, Aug 22, 2026

नई दिल्ली| चीनी हर घर में हर रोज की जरूरत है। हर बार राशन के जरूरी सामानों की लिस्ट बनाने हुए शक्कर जरूर लिखा जाता है। हालांकि मिठास बढ़ाने वाली चीनी की कीमतें त्योहारी सीजन में जेब पर असर डाल रही हैं। पिछले 15 दिनों में चीनी की कीमत रॉकेट की तरह सिर्फ बढ़ती ही जा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 19 जुलाई, 2026 को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत ₹47.82 प्रति किलो थी, जो एक महीने बाद 19 अगस्त, 2026 को बढ़कर ₹54.06 किलो हो गयी है।

₹65 प्रति किलो तक पहुंचे दाम

मई के बाद से ही चीनी की कीमतों में धीरे-धीरे उछाल आने लगा था, लेकिन बीते 15 दिनों में इसके भाव आसमान छूने लगे हैं। देश के कई बाजारों में शक्कर की खुदरा कीमतें ₹15 प्रति किलो तक बढ़ गई हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में चीनी के खुदरा दाम ₹58 - ₹65 प्रति किलो तक चढ़ गए हैं। वहीं थोक भाव ₹5,400 - ₹5,800 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं।

क्यों बढ़ गई कीमतें?

सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर चीनी के दाम में अचानक इतनी तेजी क्यों आ गई? इसका कारण चीनी का मौजूदा स्टॉक बताया जा रहा है। इंडस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि 30 सितंबर यानि शुगर सीजन के अंत तक चीनी का स्टॉक 30 लाख टन से 35 लाख टन रह जाएगा जो नए सीजन के आने वाले 2 महीनों तक भी नहीं चल सकेगा। इन अटकलों के बीच सरकार ने शुगर स्टॉक लिमिट भी तय की लेकिन कीमतों में नियंत्रण नहीं दिखा।

सरकार उठा रही ठोस कदम

चीनी की कीमतों को कंट्रोल करने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। 1 अगस्त से सरकार ने डीलर्स और व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल (400 मीट्रिक टन) तय किया था। किसी भी वक्त में 30 दिन से अधिक का स्टॉक नहीं होना चाहिए।

अब बुधवार को सरकार ने नई अधिसूचना जारी कि जिसके मुताबिक 15 दिन से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। सरकार का ये प्रयास जमाखोरी रोकना है, जिससे कीमतें नियंत्रण में रहेंगी।

10 साल बाद ड्यूटी फ्री इंपोर्ट

त्योहारी सीजन के दौरान और नया स्टॉक आने से पहले घरेलू बाजारों में चीनी की सप्लाई बनाए रखने के लिए सरकार एक दशक के बाद चीनी का आयात करने की तैयारी में है। मीडिया के सूत्रों के मुताबिक आयात शुल्क में 100 फीसदी तक छूट दी जा सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को रियायती दामों में शक्कर उपलब्ध हो सके।

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