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अनिल अंबानी पर ED का बड़ा शिकंजा? : मुंबई में 12 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी-Yes Bank से जुड़ा है कनेक्शन

Jagbhan Yadav

Sat, Mar 7, 2026

Anil Ambani ED Raid: भारत के बड़े उद्योगपतियों में गिने जाने वाले Anil Ambani एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय यानी Enforcement Directorate (ED) ने शुक्रवार को मुंबई में उनकी कंपनियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई कथित बैंकिंग फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की गई है। अधिकारियों के अनुसार ED की लगभग 15 टीमों ने सुबह-सुबह मुंबई के अलग-अलग इलाकों में 10 से 12 जगहों पर तलाशी ली। जांच का दायरा उन कंपनियों और लोगों तक भी फैलाया गया है जो अनिल अंबानी के कारोबारी नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर में हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि यह जांच हजारों करोड़ रुपये के लोन और निवेश से जुड़ी बताई जा रही है।

क्या है अनिल अंबानी के खिलाफ चल रही जांच?

सूत्रों के मुताबिक जांच की शुरुआत उन मामलों से हुई, जिनमें अंबानी ग्रुप की कुछ कंपनियों पर बैंक लोन के गलत इस्तेमाल और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। इससे पहले Central Bureau of Investigation (CBI) ने भी Reliance Communications के खिलाफ 2200 करोड़ रुपये से ज्यादा के बैंकिंग फ्रॉड का केस दर्ज किया था। अब ED इसी मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं लोन के पैसे को दूसरी कंपनियों या निजी निवेश में तो डायवर्ट नहीं किया गया।

अनिल अंबानी की कंपनियों पर कुल कितना लोन बकाया है?

जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार अनिल अंबानी की कंपनियों, खासकर रिलायंस कम्युनिकेशंस पर करीब 40,185 करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन बकाया बताया जा रहा है। इन लोन में भारत के कई बड़े बैंकों के साथ-साथ विदेशी लेंडर्स भी शामिल हैं। कुछ बैंकों ने इन लोन खातों को फ्रॉड कैटेगरी में भी डाल दिया है। इसी वजह से पिछले कुछ वर्षों से ED और CBI दोनों एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं।

Yes Bank लोन कनेक्शन में क्या है नया खुलासा?

जांच में एक और बड़ा नाम सामने आया है-Yes Bank। सूत्रों के अनुसार 2017 में यस बैंक का अनिल अंबानी ग्रुप में लगभग 6000 करोड़ रुपये का एक्सपोजर था, जो 2018 तक बढ़कर करीब 13,000 करोड़ रुपये हो गया। जांच एजेंसियों को शक है कि यह बढ़ोतरी सामान्य कारोबारी लेन-देन नहीं थी। इसमें फंड के गलत इस्तेमाल और संदिग्ध निवेश की संभावना जताई जा रही है।

क्या राणा कपूर और अंबानी के बीच कोई ‘क्विड प्रो क्वो’ डील हुई थी?

जांच में यस बैंक के पूर्व प्रमुख Rana Kapoor का नाम भी सामने आया है। सूत्रों का दावा है कि बैंक के निवेश के बदले कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का कथित “क्विड प्रो क्वो” यानी लेन-देन वाला समझौता हुआ था। बताया जा रहा है कि यस बैंक ने रिलायंस समूह की कुछ कंपनियों में भारी निवेश किया, जबकि बदले में अंबानी ग्रुप की कंपनियों ने कपूर परिवार से जुड़ी फर्मों को लोन दिए। इनमें से कई निवेश बाद में नॉन-परफॉर्मिंग इन्वेस्टमेंट (NPI) में बदल गए, जिससे बैंक को करीब 3300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

ED ने अनिल अंबानी की संपत्तियों पर क्या कार्रवाई की?

जांच के दौरान ED ने अनिल अंबानी से जुड़ी कई संपत्तियों को प्रोविजनल तौर पर अटैच किया है। अधिकारियों के मुताबिक अब तक करीब 15,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां जांच के दायरे में आ चुकी हैं। इनमें रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रॉपर्टी दोनों शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन संपत्तियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन बैंकों को लौटाया जा सकता है, जिनका पैसा फंसा हुआ है।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल ED की जांच जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी थी या फिर बड़े स्तर का बैंकिंग फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला। इस बीच अनिल अंबानी ग्रुप या उनकी कंपनियों की तरफ से ताजा छापेमारी पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जांच में ठोस सबूत मिलते हैं, तो यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय विवादों में से एक बन सकता है।

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