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बिजली बिल में फिर बढ़ेगा बोझ : सितंबर में 13% एफपीपीएएस की वसूली, 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं को झटका

Jagbhan Yadav

Thu, Sep 3, 2026

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के करीब 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में बिजली बिल में राहत मिलने की उम्मीद कम है। सितंबर में जारी होने वाले अगस्त के बिजली बिल में 13 फीसदी एफपीपीएएस (फ्यूल पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज) लगने की जानकारी सामने आई है। इसमें पिछले महीने का शेष 8 फीसदी शुल्क और अगस्त के लिए निर्धारित 5 फीसदी नया शुल्क शामिल है।

अगस्त के लिए एफपीपीएएस शुल्क 16 फीसदी तय किया गया था, लेकिन जुलाई में बिजली टैरिफ बढ़ने के कारण फिलहाल केवल 10 फीसदी की वसूली की गई। शेष 8 फीसदी राशि को आगे के बिल में लेने का निर्णय लिया गया था। अब यह राशि अगस्त के नए 5 फीसदी शुल्क के साथ सितंबर के बिजली बिल में जुड़ सकती है।

एफपीपीएएस शुल्क हर महीने बिजली खरीद की लागत के आधार पर तय होता है। इसी वजह से उपभोक्ताओं के बिल में इसका असर भी लगातार बदल रहा है। इस साल जनवरी में दिसंबर के बिल में 13.64 फीसदी एफपीपीएएस लगाया गया था। इसमें 5.43 फीसदी पिछला शुल्क और दिसंबर का 8.21 फीसदी नया शुल्क शामिल था।

फरवरी में जनवरी के बिल पर भी उपभोक्ताओं से पुराने 8.21 फीसदी शुल्क के साथ जनवरी का नया 4.14 फीसदी शुल्क लिया गया। इस तरह लगातार दोहरे शुल्क का असर बिजली बिल पर दिखाई दिया।

मार्च में फरवरी के बिजली बिल पर एफपीपीएएस शुल्क 5.91 फीसदी रहा। इसके बाद अप्रैल में मार्च के बिल पर यह घटकर 4.24 फीसदी हो गया। मई में अप्रैल के बिल में 3.98 फीसदी शुल्क लगाया गया।

हालांकि, इसके बाद एफपीपीएएस में फिर बढ़ोतरी हुई। जून में मई के बिल पर करीब 9.13 फीसदी, जबकि जुलाई में जून के बिल पर 11.33 फीसदी शुल्क वसूला गया।

अगस्त में जारी जुलाई के बिजली बिल में 10 फीसदी एफपीपीएएस लगाया गया। बताया गया कि उस समय शुल्क 18 फीसदी निर्धारित था, लेकिन जुलाई में बिजली टैरिफ बढ़ाए जाने के कारण पूरी राशि की जगह केवल 10 फीसदी की वसूली की गई। बाकी 8 फीसदी राशि को अगले बिलों में समायोजित किया जाना था।

अब अगस्त के लिए निर्धारित 5 फीसदी नए शुल्क के साथ यह 8 फीसदी बकाया राशि भी सितंबर के बिल में जोड़े जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं पर कुल 13 फीसदी एफपीपीएएस शुल्क का भार पड़ सकता है।

पावर कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में एफपीपीएएस बढ़ने की बड़ी वजह गर्मी के दौरान प्रदेश में बिजली की बढ़ी मांग और बाहर से अधिक बिजली खरीदना है। मांग बढ़ने पर अतिरिक्त बिजली की जरूरत पड़ी, जिसकी पूर्ति बाहरी स्रोतों से की गई।

इसके अलावा कोरबा स्थित 210-210 मेगावाट क्षमता वाले दो बिजली संयंत्र करीब दो महीने तक बंद रहे। इनमें से एक 210 मेगावाट क्षमता का संयंत्र अभी भी बंद बताया जा रहा है। ऐसे में प्रदेश की बिजली जरूरत पूरी करने के लिए बाहर से बिजली खरीदने का दबाव बढ़ा है। अतिरिक्त बिजली खरीद की लागत का असर अब एफपीपीएएस के जरिए सीधे उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर पड़ रहा है।

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