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धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष : अभियान के तहत प्रदेश के 160 गांवों का होगा चयन

Jagbhan Yadav

Tue, Aug 4, 2026

00 प्रत्येक ग्रामसभा को मिलेगी 15 लाख की स्वीकृति
00 आदिम जाति विभाग द्वारा सम्बन्धित जिलों के कलेक्टरों को पत्र जारी
रायपुर। अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 160 ग्रामों का चयन निर्धारित मापंदडों के आधार पर किया जाएगा। इन ग्रामों में सामुदायिक वन संसाधन (सीएफआर) के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन के लिए सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना (सीएफआरएमपी ) तैयार कर लागू की जाएगी। अभियान के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामसभा को सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए 15 लाख रूपए की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।

आदिम जाति विभाग द्वारा कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा गया है कि योजना के तहत प्रत्येक चयनित ग्रामसभा में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगा, जो ग्रामसभा के माध्यम से योजना के क्रियान्वयन और संचालन की जिम्मेदारी निभाएगी। इसके लिए ग्रामसभा के नाम पर राष्ट्रीयकृत बैंक में सिंगल करंट अकाउंट भी खोला गया है। पत्र के माध्यम से कहा गया है कि राज्य सरकार ने जिलों से ऐसे 160 गांवों का चयन क्लस्टर आधारित और परस्पर जुड़े क्षेत्र के आधार पर प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए हैं, ताकि योजनाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

पत्र में कहा गया है कि योजना के प्रभावी संचालन के लिए राज्य सरकार तकनीकी सहयोगी, सिविल सोसायटी संगठनों तथा स्थानीय संस्थाओं की सेवाएं भी ले सकेगी। इन संस्थाओं की सेवाएं ग्रामसभा के प्रस्ताव एवं विधिवत अनुमोदन के बाद लिया जा सकेगा। ये संस्थाएं ग्रामसभा को सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजना तैयार करने, उसके क्रियान्वयन तथा निगरानी में सहयोग देंगी। आदिम जाति विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में बताया कि इस पहल से वन अधिकार अधिनियम-2006 का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन होगा, ग्रामसभाओं की भूमिका मजबूत होगी तथा सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण और आजीविका संवर्धन को नई गति मिलेगी।

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