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बघेल के आरोप से सियासत गरम: : “BJP शासन में नक्सल वसूली होती थी सरकारी दरवाज़ों पर”

Jagbhan Yadav

Tue, Nov 25, 2025

छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों नक्सल फंडिंग के आरोपों को लेकर उथल–पुथल से गुजर रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाला आरोप लगाया है। उनका दावा है कि भाजपा शासनकाल में नक्सलियों की पहुँच सरकार के उच्च स्तर तक बन चुकी थी और उग्रवादी सीधे सरकारी परिसरों से “हफ्ता वसूली” किया करते थे।

बघेल ने आरोप लगाया कि नक्सल संगठनों के सदस्य सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों के कैंप कार्यालयों तक जाते थे और खुले तौर पर धन उगाही करते थे। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य या सुनी–सुनाई बात नहीं, बल्कि वास्तविक घटना है जिसका प्रमाण एक पूर्व गृहमंत्री के पास मौजूद एक लाख रुपये की वसूली की रसीद से मिलता है।

उनके अनुसार, यह रसीद इस बात की गवाही देती है कि नक्सलियों का फंडिंग नेटवर्क राज्य मशीनरी के भीतर तक फैला हुआ था, और भाजपा शासनकाल में इस पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हो रही थी। बघेल का यह दावा राजनीतिक हलकों में भारी चर्चा का विषय बन गया है।

भाजपा का पलटवार — “कांग्रेस नक्सल समर्थक विचारधारा से प्रेरित”

भाजपा ने बघेल के सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस नक्सल समस्या पर हमेशा दोहरी नीति अपनाती रही है। भाजपा सांसद संतोष पांडे ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि “कांग्रेस नक्सलियों की फूफा बनती है” और अब जनता को भ्रम में डालने के लिए झूठे आरोप गढ़ रही है।

भाजपा का दावा है कि उनके शासनकाल में नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़े ऑपरेशन चलाए गए, सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई और उग्रवादियों पर लगातार दबाव बनाया गया। पार्टी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस द्वारा लगाये जा रहे आरोप सिर्फ आने वाले चुनावों को देखते हुए राजनीतिक नाटक का हिस्सा हैं।

हिडमा की मौत से जुड़ा विवाद भी बढ़ा तनाव

बघेल के आरोपों के बीच हाल ही में सुरक्षा बलों द्वारा मार गिराए गए कुख्यात नक्सली कमांडर हिडमा का मामला भी लगातार चर्चा में है। हिडमा की मौत को कांग्रेस ने सुरक्षा एजेंसियों की सफलता कहा, वहीं भाजपा आरोप लगा रही है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी की, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई।

हिडमा देशभर में कई बड़े और खतरनाक नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है। उसकी मौत के बाद दोनों दल उसे लेकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इससे नक्सल मुद्दे की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।

राजनीतिक तापमान बढ़ा — आरोप–प्रत्यारोप का दौर जारी

बघेल के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच शब्दयुद्ध ने तूल पकड़ लिया है। दोनों पार्टियाँ एक–दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रही हैं—

कांग्रेस कह रही है कि भाजपा शासन में नक्सलियों ने सरकारी तंत्र को अंदर तक प्रभावित कर दिया था।

भाजपा कह रही है कि कांग्रेस का रवैया ही नक्सलवाद को मजबूत करता रहा है।

इस विवाद ने आने वाले चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में नई दरार पैदा कर दी है। सुरक्षा विशेषज्ञ भी इस मामले पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं, क्योंकि नक्सल फंडिंग जैसी संवेदनशील बात पर कोई भी आरोप राज्य की सुरक्षा संरचना को सीधे प्रभावित कर सकता है।

Tags :

#ChhattisgarhPolitics #BaghelVsBJP #NaxalFundingRow #PoliticalClash #BigNews

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