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छत्तीसगढ़ : हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के बलरामपुर SP को झूठे हलफनामे पर लगाई फटकार, नाबालिग केस में महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने का आरोप

Jagbhan Yadav

Thu, Dec 4, 2025

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में नाबालिग के साथ हुए रेप के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने बलरामपुर एसपी द्वारा दाखिल हलफनामे को प्रथम दृष्टया झूठा करार देते हुए कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि एसपी ने जानबूझकर कई महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

यह मामला 22 अक्टूबर 2024 को सामने आया था, जब नाबालिग ने रेप की शिकायत दर्ज कराई। 28 अक्टूबर को उसके बयान को BNS की धारा 183 के तहत दर्ज किया गया था। बाद में पीड़िता ने कोर्ट में बताया कि पुलिस और आरोपी के दबाव के कारण वह सही बयान नहीं दे सकी थी। इस पर POCSO कोर्ट ने 8 जनवरी को दोबारा बयान लेने की अनुमति दी।

19 मार्च को दिए नए बयान में पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपी ने उसका यौन शोषण किया। इसके बाद राज्य सरकार ने इस नए बयान को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसी पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को बलरामपुर एसपी को एफआईआर और विवेचना का पूरा ब्यौरा शपथपत्र के रूप में देने का आदेश दिया।

एसपी ने अपने हलफनामे में बताया कि पीड़िता और उसके पिता के पॉलीग्राफ टेस्ट की अर्जी मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित है। लेकिन जब पीड़िता पक्ष के वकील ने अदालत को यह बताया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट पहले ही 1 दिसंबर को यह अर्जी खारिज कर चुका है, तो कोर्ट ने इसे गंभीर तथ्य छुपाने जैसा माना।

लखनऊ बेंच ने टिप्पणी की कि एसपी का हलफनामा भ्रामक और गलत जानकारी से भरा हुआ है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को एक सप्ताह में नया हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है तथा कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में पुलिस का रवैया पारदर्शी होना चाहिए।

अदालत ने यह भी हैरानी जताई कि जब आरोपी को नाबालिग के दोबारा बयान पर कोई आपत्ति नहीं है, तो राज्य सरकार किस आधार पर इसका विरोध कर रही है।

मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग पीड़िता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या गलत बयानबाजी सहन नहीं की जाएगी।

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