सीजीबीएसई सेलेबस से नही होगी प्राइवेट स्कूल में पांचवीं आठवीं की पढ़ाई : सीजीबीएसई सेलेबस से नही होगी प्राइवेट स्कूल में पांचवीं आठवीं की पढ़ाई, दबाव डालने पर फिर से कोर्ट जाने की बात - CGBSE S
छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल सीजीबीएसई सेलेबस से पांचवीं आठवीं की परीक्षा नहीं लेंगे.
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रायपुर : प्राइवेट स्कूलों में किताबों को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है. पिछले साल स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किया था कि पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा सरकारी किताबों के आधार पर ली जाएगी. इस पर आपत्ति जताते हुए निजी स्कूलों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद कोर्ट ने निजी पब्लिशर्स की किताबों से पढ़ाने की अनुमति दी थी.
नहीं पहुंची कई स्कूलों में किताबें : इस साल नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन सरकारी किताबें समय पर नहीं पहुंचीं.छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि राज्य शिक्षा विभाग की बोर्ड परीक्षाओं के लिए हमें उनकी किताबों से पढ़ाना होगा, लेकिन 2 महीने बीत जाने के बाद भी न तो प्राइवेट और न ही सरकारी स्कूलों में सभी किताबें पहुंची हैं. कई जगह फोटो कॉपी से पढ़ाई हो रही है.
किताबें नहीं छपी, इसलिए पुरानी किताबों से पढ़ाई : राजीव गुप्ता ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग और पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा किताबें पहुंचाने के दावे झूठे हैं. उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत ये है कि सरकारी स्कूलों में भी पूरी किताबें उपलब्ध नहीं हैं. किताब वितरण का आधार पिछले साल का यू-डाइस (UDISE) डाटा रखा गया है, जबकि इस साल 10–15% छात्रों की संख्या बढ़ी है और नए स्कूल भी खुले हैं.ऐसे में नए बच्चों को किताबें नहीं मिल पाईं.पुराने डिपो में पड़ी 5-6 साल पुरानी किताबें भेजी जा रही हैं, जबकि कई किताबें छपी ही नहीं हैं क्योंकि टेंडर नहीं हुआ.

दो महीने बाद भी किताबें नहीं पहुंची : इसमें दो तरह की बाते हैं जिसमें अलग-अलग जिलों के जिला शिक्षाधिकारियों ये आदेश निकाला था कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई पाठ्य पुस्तक निगम की किताबों से होगी,जबकि प्राइवेट स्कूलों में एनसीआरटी की किताबों से पढ़ाना है.इस पर हाईकोर्ट ने निर्णय लिया है कि स्कूल स्वतंत्र है कि वो जिससे पढ़ाना चाहता है वो स्वतंत्र है फिर चाहे वो प्राइवेट पब्लिशर्स से पढ़ाए या किसी और से.दूसरा मामला ये है कि पांचवीं आठवीं बोर्ड है इसलिए हमें सरकारी किताबों से ही पढ़ाना होगा.लेकिन आज दो महीने हो गए हैं, किताबें नहीं पहुंची हैं.
पाठ्यपुस्तक निगम के दावों को बताया झूठा : राजीव गुप्ता ने पाठ्यपुस्तक निगम के आंकड़ों को झूठा बताया है. राजीव गुप्ता ने कहा कि किसी भी स्कूल में किताबें नहीं पहुंची हैं.सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर इसकी शिकायत कर रहे हैं कि किताबें नहीं मिली हैं.तो फिर ये किसका आंकड़ा दे रहे हैं.आप ग्राउंड में जाकर चेक कर लिजिए कि सरकारी स्कूल में किताबें मिली हैं कि नहीं. इन्होंने पिछले साल के यूडाइस डाटा के हिसाब से किताबें दी हैं.इस साल सरकारी और प्राइवेट स्कूल में बच्चे बढ़े हैं.तो इस बार आप किताब नहीं दोगे.
फिर डालेंगे दबाव तो जाएंगे कोर्ट : पाठ्यपुस्तक निगम शासन को झूठा आंकड़ा दे रहा है.पाठ्यपुस्तक निगम अकेला शासन की जितनी किरकिरी करा रहा है और किसी ने नहीं कराई है.ये छह साल पुराने डंप की हुई किताबों को स्कूलों में बंटवा रहा है.ये खुद ऑफ द रिकॉर्ड इस बात को मानते हैं कि नई किताबें अब तक नहीं छपी है.और अब नई किताबें नहीं छप सकती क्योंकि इन्होंने इसका टेंडर भी नहीं किया है. इस बार भी पांचवीं और आठवीं की परीक्षा सरकारी किताबों से लेने की बात होगी, तो हम हाईकोर्ट जाएंगे.राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अब बोर्ड परीक्षाओं की जगह दक्षता परीक्षाएं लागू हो चुकी हैं. बिना किताबों के परीक्षा कराना नीतिगत और शैक्षिक रूप से गलत है.

क्या है शिक्षा विभाग का दावा :वहीं दूसरी ओर जिला शिक्षा विभाग का दावा है कि सरकारी स्कूल में किताबें पहुंच चुकी हैं.हमारी कोशिश ये हैं कि सभी बच्चों को किताबें मिले ये सुनिश्चित हो. सरकारी स्कूल के साथ निजी स्कूलों को भी समय पर पुस्तकें उपलब्ध करा दी गईं हैं. वहीं पहली से पांचवीं तक की कुछ किताबों में बदलाव हुआ है.जो पाठ्यपुस्तक निगम से मिलते ही स्कूलों में फिर से बांट दी जाएंगी.
अधिकांश सरकारी स्कूलों में किताबें पहुंच चुकी हैं.पहली से तीसरी और छठवीं कक्षा की कुछ विषयों की किताबों में बदलाव हुआ है, जिससे देरी हुई है. पुरानी किताबों के उपयोग के निर्देश दिए गए हैं .नई किताबें मिलते ही पुरानी वापस ली जाएंगी - हिमांशु भारतीय ,जिला शिक्षा अधिकारी,रायपुर
क्या है पूरा मामला ?: जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर (डीईओ) ने शासन की गाइड लाइन के अनुसार एक आदेश जारी कर कहा था कि स्कूलों में छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीजीबीएसई) की ही पुस्तकें पढ़ाई जाएंगी. इसे पहली से आठवीं कक्षा तक के लिए अनिवार्य कर दिया गया था. बिलासपुर के ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल और निजी स्कूल एसोसिएशन ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की. इसमें कहा गया कि अगर माध्यमिक शिक्षा मंडल ही पुस्तकें उपलब्ध कराए तो हमें पढ़ाने में कोई हर्ज नहीं है मगर उपलब्ध ना हो तो मार्केट की पुस्तकें ही पढ़ानी होंगी.इस मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने अन्य स्थानों के ऐसे उदाहरण बताये जहां निजी स्कूलों को मजबूरी में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें ही चलानी पढ़ रही हैं. दोनों पक्षों की सुनवाई और तर्क पूरे होने के बाद हाईकोर्ट ने इस याचिका को निराकृत कर दिया.

सीजीबीएसई सेलेबस से पांचवीं आठवीं की परीक्षा
जानिए हाईकोर्ट का आदेश : आपको बता दें कि राजीव गुप्ता ने भी गत दिनों एक रिट याचिका दायर कर शिक्षा अधिकारियों द्वारा जारी उस आदेश को अवैध, अनुचित और कानून की दृष्टि से अप्रभावी बताया था. जिसमें उन्हें सिर्फ एनसीईआरटी कि पुस्तकें ही चलाने को कहा गया था. सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का स्कूल सीबीएसई से संबद्ध है और छत्तीसगढ़ शिक्षा बोर्ड से संबद्ध नहीं है. याचिकाकर्ता-एसोसिएशन सीबीएसई 12 अगस्त 2024 की अधिसूचना के अनुसार जारी दिशा-निर्देशों का पालन करेगा. कोर्ट ने रिट याचिका को स्वीकार करते हुए कहा था कि केवल एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकें खरीदने की शर्त सही नहीं है और निजी स्कूल बाजार से निजी प्रकाशन की पाठ्य पुस्तकें अन्य अध्ययन सामग्री शर्तों के साथ उपयोग कर सकते हैं.
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