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धान खरीद केंद्रों में प्रशासन–कर्मचारी टकराव तेज़: : हड़ताल के 13वें दिन हालात बिगड़े, 7 कर्मचारी सेवा से हटाए गए

Jagbhan Yadav

Sun, Nov 16, 2025

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी शुरू होने से पहले ही सहकारी समितियों के कर्मचारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। 3 नवंबर से प्रारंभ हुआ यह आंदोलन 15 नवंबर को 13वें दिन में प्रवेश कर गया, और इसकी तीव्रता अब ज़िले-दर-ज़िले बढ़ती जा रही है। हजारों कर्मचारी लगातार धरना स्थलों पर डटे हुए हैं।

दुर्ग–भिलाई में लगभग 2500 कर्मचारी मानस भवन के पास एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। हड़ताल की अवधि बढ़ने के साथ समितियों ने अनुभवहीन कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी, और इसी क्रम में 7 कर्मचारियों की सेवाएँ समाप्त कर दी गईं। इस कदम से आंदोलन और अधिक उग्र हो गया है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की संपूर्ण प्रक्रिया—रजिस्ट्रेशन, तौल, पोर्टल संचालन, भुगतान अदायगी तथा रिकॉर्ड एंट्री—पूरी तरह समितियों के तकनीकी कर्मचारियों पर निर्भर है। उचित मानदेय, सुरक्षा और स्थायी सेवा शर्तों के अभाव में वे लगातार कठिन परिस्थितियों में काम करते रहे हैं। उनका आरोप है कि वर्षों से लंबित माँगों पर सरकार ने अब तक कोई पहल नहीं की।

कर्मचारियों की प्रमुख माँगें

मध्यप्रदेश की तर्ज पर वेतनमान लागू करना

लंबित भत्तों का भुगतान

सेवा शर्तों में सुधार

सुरक्षा प्रावधान सुनिश्चित करना

कर्मचारी महांसंघ का आरोप है कि सरकार ने वार्ता आगे बढ़ाने की बजाय बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे आंदोलन और मजबूत हुआ है। उनका कहना है कि 13 दिनों की हड़ताल के बावजूद उत्साह कम नहीं हुआ है, बल्कि अनुशासनात्मक कार्रवाई ने कर्मचारियों को और संगठित कर दिया है।

उधर, शासन ने धान खरीदी प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर दी है। प्रशिक्षित नए कर्मचारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को खरीद केंद्रों में तैनात किया जा रहा है। प्रशासनिक टीमें खरीद प्रक्रिया को सुचारू रखने के निर्देशों के साथ सक्रिय हो चुकी हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्थिति में किसानों की धान खरीदी बाधित नहीं होने दी जाएगी।

हड़ताल और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच खिंची इस रस्साकशी ने धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। एक ओर कर्मचारी अपने अधिकारों और सुरक्षा की मांग पर अडिग हैं, तो दूसरी ओर सरकार प्रक्रियाओं को निर्बाध रखने के लिए हर संभव विकल्प अपनाने में जुटी है। आने वाले दिनों में आंदोलन का स्वरूप और प्रशासन का रुख यह तय करेगा कि समाधान संवाद से निकलेगा या संघर्ष और लंबा होगा।

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