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CG : फर्जी इंश्योरेंस क्लेम का खुलासा: 44.80 लाख की दावा याचिका कोर्ट ने की खारिज

Jagbhan Yadav

Mon, May 25, 2026

बिलासपुर। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने फर्जी तरीके से बीमा क्लेम हासिल करने की कोशिश का बड़ा खुलासा करते हुए 44 लाख 80 हजार रुपये की मुआवजा याचिका खारिज कर दी है। षष्टम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी मनीषा ठाकुर ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि दुर्घटना एक कार से हुई थी, लेकिन बाद में बीमा राशि पाने के लिए साठगांठ कर मोटरसाइकिल को हादसे में शामिल दिखाया गया।

बेटे की मौत के बाद लगाया था मुआवजे का दावा

मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। आवेदिका मालती बंजारे और अविनल बंजारे ने दावा पेश करते हुए कहा था कि उनका 21 वर्षीय बेटा अंकित बंजारे 9 फरवरी 2023 को पल्सर बाइक से जा रहा था। इसी दौरान 36 मॉल के पास राहुल पात्रे ने लापरवाही से बाइक चलाते हुए उसे टक्कर मार दी, जिससे गंभीर रूप से घायल अंकित की इलाज के दौरान मौत हो गई।

अस्पताल रिकॉर्ड से खुली सच्चाई

सुनवाई के दौरान मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब वंदना अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विजय कुमार ने अदालत में बयान दिया कि भर्ती के समय मृतक की मां ने खुद बताया था कि हादसा कार की टक्कर से हुआ है। अस्पताल द्वारा तैयार पुलिस मेमो में भी दुर्घटना का कारण ‘कार से टक्कर’ दर्ज था।कोर्ट ने यह भी पाया कि बाद में पेश किए गए दस्तावेजों में ‘कार’ शब्द हटाकर उसकी जगह ‘मोटरसाइकिल’ लिखा गया था। अदालत ने इसे रिकॉर्ड में स्पष्ट हेरफेर माना।

गवाहों के बयान भी नहीं टिके

मामले में पेश किए गए कथित चश्मदीद गवाह के बयान भी अदालत को भरोसेमंद नहीं लगे। कोर्ट ने पाया कि गवाह घटना स्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर रहता था और उसके बयान में कई विरोधाभास थे। वहीं, मृतक के पिता द्वारा दुर्घटना के तीन दिन बाद अज्ञात वाहन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पर भी अदालत ने सवाल उठाए।

वाहन जांच रिपोर्ट भी पेश नहीं हुई

सुनवाई के दौरान संबंधित बाइक का कोई मैकेनिकल निरीक्षण रिपोर्ट या ऐसा तकनीकी साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि दुर्घटना उसी वाहन से हुई थी। इस आधार पर अधिकरण ने माना कि आवेदक दुर्घटना में मोटरसाइकिल की संलिप्तता साबित करने में असफल रहे।

कोर्ट ने खारिज की पूरी याचिका

सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद अधिकरण ने मोटर यान अधिनियम की धारा 166 के तहत दायर 44.80 लाख रुपये की मुआवजा याचिका को पूरी तरह निरस्त कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि तथ्यों से छेड़छाड़ कर बीमा क्लेम लेने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।

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