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पत्नी का व्यवहार और छिपाई गई मेडिकल समस्या बनी तलाक का आधार : हाईकोर्ट ने कहा– अब संबंध सुधारना संभव नहीं

Jagbhan Yadav

Wed, Dec 10, 2025

पर खड़ा होता है, लेकिन जब इन स्तंभों में दरारें पड़ने लगती हैं, तब संबंध टूटने की स्थिति तक पहुंच जाते हैं। छत्तीसगढ़ के कवर्धा में रहने वाले दंपती का मामला भी इसी प्रकार का है, जिसमें कई वर्षों से चली आ रही गलतफहमियों, आरोपों और व्यवहारिक मतभेदों ने अंततः अदालत को तलाक का निर्णय बरकरार रखने पर मजबूर कर दिया।

शादी वर्ष 2015 में हिंदू रीति–रिवाज से हुई थी। शुरुआती दो महीनों तक संबंध सामान्य रहे, परन्तु इसके बाद विवाद बढ़ने लगे। पति का आरोप था कि पत्नी उसके माता–पिता और अन्य परिजनों की जिम्मेदारी उठाने से कतराती थी। वह अक्सर घर के बुजुर्गों की सेवा और रिश्तेदारों के लिए बनाए जाने वाले भोजन पर आपत्ति जताती थी। कई बार वह तानों के रूप में कहती थी कि घर को “अनाथालय” बनाकर रखा है। इससे परिवार में लगातार तनाव का माहौल बना रहता था।

पत्नी के भाई द्वारा 40 हजार रुपए मांगने पर पति के इनकार करने से स्थिति और बिगड़ गई। पति का कहना था कि रकम न देने पर पत्नी ने उससे बातचीत और भोजन देना तक बंद कर दिया। बाद में उसने मजबूरी में 40 हजार रुपए पत्नी के भाई के खाते में ट्रांसफ़र किए। दूसरी ओर, पत्नी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसके पिता ने दहेज में घर के लिए पर्याप्त सामान दिया था और विवाह के बाद उसे ही सभी घरेलू कार्यों का भार दे दिया गया, यहाँ तक कि नौकरानी भी हटा दी गई।

पति का एक और गंभीर आरोप यह था कि पत्नी ने अपनी मेडिकल समस्या—पिछले कई वर्षों से पीरियड्स न आने की स्थिति—शादी से पहले छुपाई। पति ने इसे मानसिक क्रूरता की श्रेणी में बताया। मेडिकल जांच में यह बात सामने आई कि समस्या लंबे समय से थी। पत्नी का कहना था कि यह अस्थायी थी और दवाइयों व योग से ठीक होने की संभावना थी, इसलिए उसने इसे बताने में संकोच किया।

फैमिली कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद पति के पक्ष में तलाक का निर्णय सुना दिया। पत्नी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दंपती के बीच अब संबंध सुधारना संभव नहीं है। अदालत ने पति के आरोपों और परिस्थितियों को देखते हुए तलाक को सही ठहराया और पत्नी की अपील को खारिज कर दिया। साथ ही, पति को आदेश दिया गया कि वह पत्नी को चार महीने के भीतर पाँच लाख रुपए स्थायी भरण-पोषण के रूप में प्रदान करे।

यह मामला दर्शाता है कि विवाह में पारदर्शिता, भावनात्मक संतुलन और एक-दूसरे के परिवार के प्रति सम्मान कितना आवश्यक है। जब व्यक्तिगत अपेक्षाएँ, आर्थिक तनाव और छिपाई गई जानकारी एक साथ टकराती हैं, तो उसका परिणाम अक्सर संबंधों के टूटने के रूप में सामने आता है।

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