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जब मुख्यमंत्री साय ने थामा हाथ, : तो दिव्यांग हितग्राही की जिंदगी में लौटी उम्मीद की रौशनी

Jagbhan Yadav

Mon, Jun 1, 2026

सुशासन तिहार के समाधान शिविर में मिली बैटरी चलित ट्रायसायकल, संघर्ष भरी जिंदगी को मिला नया सहारा

रायपुर । जिंदगी कभी-कभी इंसान की परीक्षा इतनी कठिन लेती है कि हर दिन एक संघर्ष बन जाता है। दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत करंजा-भिलाई, वार्ड क्रमांक 16 निवासी  तोपसिंग साहू की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। 80 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने परिवार का सहारा बनने के लिए एक छोटे से पान ठेले का संचालन करते रहे। लेकिन उनकी सबसे बड़ी परेशानी थी रोज दुकान तक पहुंचना।

चलने-फिरने में असमर्थ  साहू को हर दिन दूसरों की मदद का इंतजार करना पड़ता था। कई बार समय पर दुकान नहीं पहुंच पाने से आमदनी प्रभावित होती थी। शरीर की तकलीफ से ज्यादा उन्हें इस बात का दर्द था कि वे अपनी मेहनत के बावजूद आत्मनिर्भर नहीं बन पा रहे थे।इसी बीच उन्हें समाज कल्याण विभाग की उस योजना की जानकारी मिली, जिसके तहत दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। उम्मीद की एक नई किरण लेकर उन्होंने समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया।

31 मई 2026 को सुशासन तिहार के अंतर्गत झाड़ूराम देवांगन स्कूल मैदान, दुर्ग में आयोजित जिला स्तरीय समाधान शिविर में उनके जीवन का सबसे भावुक और यादगार पल आया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव ने अपने हाथों से उन्हें बैटरी चलित ट्रायसायकल प्रदान की।
मुख्यमंत्री साय के हाथों से ट्रायसायकल मिलते ही  तोपसिंग साहू की आंखें खुशी से नम हो उठीं। वर्षों से जिस परेशानी को वे अपनी किस्मत मान चुके थे, उसका समाधान अब उनके सामने था। उनके चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि यह सिर्फ एक ट्रायसायकल नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीने की नई ताकत है।

अब श्री साहू बिना किसी सहारे के अपनी दुकान तक पहुंचते हैं। उनके काम में नियमितता आई है और आत्मविश्वास भी बढ़ा है। जो रास्ते कभी मुश्किल लगते थे, अब वही रास्ते उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे हैं।
भावुक स्वर में  तोपसिंग साहू ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी परेशानी का समाधान इतनी संवेदनशीलता से होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताते हुए कहा कि शासन की इस पहल ने उनके जीवन को नई उम्मीद और नई पहचान दी है।

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