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कुत्तों की निगरानी से पहले शिक्षकों को ट्रेनिंग देने की मांग तेज : पूर्व विधायक ने कहा— शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ डालने से पहले उन्हें सुरक्षा और पहचान से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग दी जाए

Jagbhan Yadav

Mon, Nov 24, 2025

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी उस आदेश ने नए विवाद को जन्म दे दिया है जिसमें शिक्षकों को स्कूल परिसर के आसपास मौजूद आवारा कुत्तों की पहचान और रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इस निर्देश में शिक्षकों से कहा गया है कि वे कुत्तों की संख्या, रंग, पहचान, नस्ल और व्यवहार से जुड़ी जानकारी स्थानीय निकाय तक पहुंचाएँ। विभाग का मानना है कि यह कदम बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है, लेकिन शिक्षकों पर इसका बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

इस आदेश का सबसे विरोधी स्वर पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने उठाया है। उनका कहना है कि शिक्षकों का काम शिक्षा देना है, न कि आवारा कुत्तों की निगरानी करना। उन्होंने साफ कहा कि यदि सरकार शिक्षकों से इस तरह की विस्तृत जानकारी चाहती है, तो पहले उन्हें उचित ट्रेनिंग दी जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार एक “डॉग बिहेवियर व सेफ्टी ट्रेनिंग वर्कशॉप” आयोजित करे, जिसमें शिक्षकों को पहचान, खतरे की स्थिति और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जा सके।

विकास उपाध्याय ने यह भी कहा कि यदि सरकार ऐसी ट्रेनिंग देने में असमर्थ रहती है, तो उनकी पार्टी स्वयं शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेगी। उनके अनुसार ऐसे काम शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी से अलग हैं और स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना असल में प्रशासनिक और पशु-नियंत्रण विभाग की भूमिका है।

यह पूरा मामला अब शिक्षकों की जिम्मेदारियों, शैक्षणिक माहौल और स्कूल सुरक्षा के बीच नए सवाल खड़ा करता है। क्या शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाना सही है? क्या सुरक्षा व्यवस्था का बोझ केवल शिक्षकों पर डालना न्यायसंगत है? इन सवालों के साथ यह विवाद अब शिक्षा प्रणाली की प्राथमिकताओं पर भी गहरी चर्चा को प्रेरित कर रहा है।

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Teacher Training Dog Monitoring Issue School Safety Education Department Chhattisgarh News Vikas Upadhyay Education Controversy School Administration Public Safety

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