Saturday 24th of October 2026

ब्रेकिंग

स्वदेशी रक्षा तकनीक से बढ़ेगी भारतीय सेना की ताकत

ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति, 6.60 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य स्वीकृत

50 से ज्यादा ट्रेन इस दिन रहेंगी रद्द, सफर करने से पहले जरूर देख

एसएसपी ने जारी किया आदेश, जानिए किसे कहां की मिली जिम्मेदारी, देखें लिस्ट…

उप संचालक पर गिरी निलंबन की गाज, गंभीर शिकायतों पर हुआ एक्शन, आदेश जारी…

सुचना

Welcome to the The News India Live, for Advertisement call +91-9406217841, 9407998418

सफलता की नई उड़ान : पारंपरिक मजबूरी से लखपति दीदी बनने तक का सफर

Jagbhan Yadav

Sun, Jul 5, 2026

00 नारायणपुर की अनिता वड्डे ने बिहान और उन्नत मुर्गीपालन से बदली अपने परिवार की तकदीर, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं मिसाल
रायपुर। मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो और सही मार्गदर्शन यदि मिल जाए, तो परिस्थितियां बदलते देर नहीं लगती। इसे सच कर दिखाया है नारायणपुर जिले के विकासखंड नारायणपुर अंतर्गत ग्राम भाटपाल की रहने वाली अनिता वड्डे ने। कभी आर्थिक तंगहाली और अनिश्चित भविष्य से जूझने वाली अनिता आज समाज में लखपति दीदी के रूप में अपनी एक नई और सम्मानजनक पहचान बना चुकी हैं।
चुनौतियों भरा था शुरुआती सफर
कुछ समय पहले तक अनिता वड्डे के परिवार की आजीविका का मुख्य साधन बेहद सीमित खेती और अस्थायी मजदूरी थी। आमदनी इतनी कम थी कि घर की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती थी। भविष्य को लेकर हमेशा एक चिंता बनी रहती थी, लेकिन अनिता ने अपनी इस नियति को स्वीकार करने के बजाय आत्मनिर्भर बनने की ठानी।
बिहान ने जगाया आत्मनिर्भरता का विश्वास
अनिता के जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया, जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत जीवन स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह में होने वाली नियमित बैठकों, बचत की आदतों और वित्तीय प्रबंधन के तौर-तरीकों ने उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास फूंका। इसी दौरान उन्हें बिहान के तहत संचालित एकीकृत कृषि क्लस्टर (आईएफसी) परियोजना के बारे में पता चला। पारंपरिक ढर्रे से हटकर कुछ नया करने की चाह में उन्होंने आधुनिक और वैज्ञानिक आजीविका पद्धतियों को अपनाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि बिहान योजना और एकीकृत कृषि क्लस्टर ने मुझे केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर ही नहीं बनाया, बल्कि समाज में सम्मान के साथ जीने का गौरव भी दिया है।
वैज्ञानिक पद्धतियों से पाई सफलता
आईएफसी क्लस्टर के माध्यम से मिले तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग ने अनिता के प्रयासों को पंख लगा दिए। उन्होंने 1500 चूजों की ब्रूडिंग की कमान संभाली और स्थानीय किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले चूजों की आपूर्ति शुरू की। इससे न केवल उनकी बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हुई। संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण और बेहतर प्रबंधन जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उन्होंने मुर्गीपालन व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वैज्ञानिक प्रबंधन का ही नतीजा था कि शुरुआती चरण में ही उन्हें 16 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई।
अब लक्ष्य: 30 हजार रुपये प्रतिमाह की नियमित आय
इस शुरुआती सफलता ने अनिता के हौसलों को एक नई उड़ान दी है। आज वे अपने इस व्यवसाय का लगातार विस्तार कर रही हैं। अब उनका अगला लक्ष्य इस आजीविका के माध्यम से हर महीने 30 हजार रुपये तक की नियमित और स्थिर आय अर्जित करना है। आज उनका परिवार एक सुरक्षित और समृद्ध जीवन जी रहा है। अनिता अब सिर्फ अपने परिवार का सहारा नहीं हैं, बल्कि वे अपने पूरे गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणापुंज बन चुकी हैं। वे चाहती हैं कि गांव की हर महिला आर्थिक रूप से सक्षम होकर अपने पैरों पर खड़ी हो। अनिता वड्डे की यह कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही अवसर और दृढ़ संकल्प के बल पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक सशक्तिकरण की नई इबारत लिख सकती हैं।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें