Thursday 29th of October 2026

ब्रेकिंग

इस विभाग में बड़े पैमाने पर तबादले, राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, देखें पूरी लिस्ट…!!

आत्मसमर्पित नक्सलियों की सूचना पर भारी मात्रा में विस्फोटक और IED बरामद

आज मुख्यमंत्री निवास से दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में होंगे शामिल

, हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने का लिया फैसला

सोशल मीडिया पर दोस्ती कर 13 साल की नाबालिग को प्रेमजाल में फंसाया, शादी का झांसा देकर किया दुष्कर्म, फिर जो हुआ…..

सुचना

Welcome to the The News India Live, for Advertisement call +91-9406217841, 9407998418

जहाँ कभी पानी की थी चिंता : आज हर मौसम में जीवन का आधार बना जल स्रोत

Jagbhan Yadav

Wed, Aug 5, 2026

00 विकसित भारत जी-राम-जी योजना से बदली वनांचल गाँवों की तस्वीर
00 जल संरक्षण के साथ रोजगार और आजीविका का मजबूत संबल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनभागीदारी और ग्रामीण विकास से जोड़कर लागू की जा रही विकसित भारत जी-राम-जी योजना दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रही है। सूरजपुर जिले के ओडग़ी विकासखंड के ग्राम पंचायत कालामांजल की सफलता इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि योजनाबद्ध जल संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता से किसी गाँव की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली जा सकती हैं। कालामांजल कभी ऐसा गाँव था जहाँ बारिश का अधिकांश पानी बह जाता था और गर्मी आते-आते जल स्रोत सूखने लगते थे। पेयजल, मवेशियों के लिए पानी और खेती-किसानी जैसी आवश्यकताओं के लिए ग्रामीणों को लंबे समय तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पानी की कमी यहाँ के लोगों की सबसे बड़ी चिंता बन गई थी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जल संरक्षण को ग्रामीण समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। इसी सोच के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम का निर्माण कराया गया। इन संरचनाओं ने वर्षा जल को रोककर जमीन में समाहित करने का प्रभावी कार्य किया। साथ ही मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण हुआ और जंगल से आने वाला कचरा डैम तक पहुँचने से पहले ही रुकने लगा। इससे जल स्रोत न केवल संरक्षित हुए, बल्कि अधिक स्वच्छ और सुरक्षित भी बने। ग्राम के निवासी  मनोहर सिंह बताते हैं कि पहले गर्मी के दिनों में पानी की तलाश ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी समस्या होती थी। मवेशियों को पानी पिलाना और खेती करना दोनों ही कठिन हो जाता था। अब वही जल स्रोत पूरे वर्ष उपयोग में आ रहा है। ग्रामीण इस जल का उपयोग पेयजल, स्नान, कपड़े धोने, मवेशियों को पानी पिलाने और मत्स्य पालन जैसे कार्यों में कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत के सरपंच अर्जुन सिंह के अनुसार, इस योजना ने केवल जल संरक्षण ही नहीं किया, बल्कि 250 से अधिक श्रमिकों को रोजगार भी उपलब्ध कराया। निर्माण कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। आज कालामांजल के जल स्रोत पहले की तुलना में अधिक समृद्ध हैं और ग्रामीण भविष्य को लेकर आश्वस्त दिखाई देते हैं। खेती की संभावनाएँ बढ़ी हैं, मवेशियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है और मत्स्य पालन जैसी अतिरिक्त आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। ग्रामीणों ने इस सकारात्मक परिवर्तन के लिए राज्य शासन और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनका गाँव हर मौसम में पानी के भरोसे के साथ विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें