Sunday 1st of November 2026

ब्रेकिंग

लोकतंत्र खत्म करने प्रयास कभी सफल नहीं होगा : उप मुख्यमंत्री अरुण साव

26 साल का सफर और साय सरकार के दो साल – विश्वास से विकास तक

ग्राम स्तरीय सतर्कता व्यवस्था विकसित करने की पहल: डॉ. वर्णिका शर्मा

रिजर्व में 30 साल बाद शुरू होगी जंगल सफारी

नाली में मिला 7 माह का भ्रूण, निजी अस्पताल के पास फेंके जाने से सनसनी, जांच में जुटी पुलिस…..

सुचना

Welcome to the The News India Live, for Advertisement call +91-9406217841, 9407998418

बस्तर का मांझीपाल बना छत्तीसगढ़ का नया इको : -टूरिज्म हब, देश-विदेश के पर्यटकों को कर रहा आकर्षित

Jagbhan Yadav

Tue, May 26, 2026

00 बैम्बू राफ्टिंग, आमचो लाड़ी होमस्टे और जनजातीय संस्कृति का अनूठा संगम दे रहा प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत अनुभव
रायपुर। प्रकृति की अनुपम छटा, जनजातीय संस्कृति की आत्मीयता और रोमांच से सराबोर बस्तर अंचल का खूबसूरत ग्राम मांझीपाल आज छत्तीसगढ़ के सबसे तेजी से उभरते इको-टूरिज्म केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित यह मनोरम स्थल अपने घने जंगलों, स्वच्छ कांगेर नदी और ग्रामीण परिवेश की सादगी के कारण देश-विदेश के सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन गया है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा बस्तर में इको-टूरिज्म, ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए की गई विशेष पहल का ही परिणाम है कि आज मांझीपाल वैश्विक मानचित्र पर चमक रहा है। इस मॉडल से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों को रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।

 

बस्तर का मांझीपाल बना छत्तीसगढ़ का नया इको-टूरिज्म हब, देश-विदेश के पर्यटकों को कर रहा आकर्षित
मांझीपाल की सबसे बड़ी यूएसपी यहाँ बहने वाली निर्मल कांगेर नदी है। नदी की शांत जलधारा में स्थानीय आदिवासियों द्वारा तैयार पारंपरिक बांस की नावों पर होने वाली बैम्बू राफ्टिंग पर्यटकों को बेहद रोमांचित कर रही है। राफ्टिंग के दौरान सैलानी घने जंगलों की हरियाली, नदी के किनारों की प्राकृतिक सुंदरता और दुर्लभ पक्षियों की चहचहाहट के बीच प्रकृति को बेहद करीब से महसूस करते हैं। यह गतिविधि केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बस्तर के जनजातीय समुदायों की पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को भी जीवंत करती है।मांझीपाल में स्थित आमचो लाड़ी होमस्टे आज बस्तर की पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से समझने का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन गया है। अपनी अनूठी और आत्मीय मेजबानी, बस्तरिया व्यंजनों के स्वाद और पारंपरिक परिवेश के कारण यह होमस्टे विदेशी पर्यटकों के बीच भी तेजी से अपनी पैठ बना रहा है। आधुनिक शहरों की भागदौड़ से दूर यहाँ आने वाले पर्यटक स्थानीय रीति-रिवाजों को जीते हैं, जंगल का आनंद लेते हैं, बर्ड वॉचिंग (पक्षी अवलोकन) करते हैं और बस्तर के पारंपरिक जीवन के साथ आत्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं।

राज्य सरकार की कम्युनिटी-बेस्ड टूरिज्म (सामुदायिक सहभागिता आधारित पर्यटन) नीति का सीधा और सकारात्मक असर अब बस्तर के ग्रामीण अंचलों में देखने को मिल रहा है। मांझीपाल के पर्यटन हब बनने से स्थानीय आदिवासी युवाओं को प्रोफेशनल टूरिस्ट गाइड, राफ्टिंग संचालक, होमस्टे प्रबंधन और बस्तरिया हस्तशिल्प (हैंडीक्राफ्ट) की बिक्री के जरिए सीधे तौर पर स्थायी रोजगार मिल रहा है। इससे न केवल पलायन पर रोक लगी है, बल्कि जनजातीय परंपराओं और स्थानीय विरासत के संरक्षण को भी एक नई दिशा मिली है।

बस्तर का मांझीपाल बना छत्तीसगढ़ का नया इको-टूरिज्म हब, देश-विदेश के पर्यटकों को कर रहा आकर्षित

कैसे पहुँचें मांझीपाल
पर्यटकों के लिए मांझीपाल पहुँचना बेहद सुगम और आसान है। यह खूबसूरत पर्यटन स्थल जिला मुख्यालय जगदलपुर से मात्र 35 से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जगदलपुर से दरभा मार्ग होते हुए बेहतरीन पक्की सड़क द्वारा निजी वाहन या स्थानीय टैक्सी से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा भी जगदलपुर में ही स्थित है, जिससे देश के किसी भी कोने से यहाँ का आगमन सुलभ हो जाता है। प्रकृति संरक्षण, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर पर्यटन मॉडल का बेहतरीन उदाहरण पेश करता मांझीपाल आज सिर्फ एक घूमने की जगह नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की एक नई और गौरवशाली पहचान बन चुका है।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें