Sunday 1st of November 2026

ब्रेकिंग

लोकतंत्र खत्म करने प्रयास कभी सफल नहीं होगा : उप मुख्यमंत्री अरुण साव

26 साल का सफर और साय सरकार के दो साल – विश्वास से विकास तक

ग्राम स्तरीय सतर्कता व्यवस्था विकसित करने की पहल: डॉ. वर्णिका शर्मा

रिजर्व में 30 साल बाद शुरू होगी जंगल सफारी

नाली में मिला 7 माह का भ्रूण, निजी अस्पताल के पास फेंके जाने से सनसनी, जांच में जुटी पुलिस…..

सुचना

Welcome to the The News India Live, for Advertisement call +91-9406217841, 9407998418

अबूझमाड़ का धोबे गांव : जहां कभी बंदूकें गूंजती थीं, वहां अब नलों से बह रही विकास की धारा

Jagbhan Yadav

Tue, May 26, 2026

नारायणपुर। अबूझमाड़ का धोबे गांव- जहां कभी बंदूकें गूंजती थीं, वहां अब नलों से बह रही विकास की धाराÓविकास की असली परीक्षा तब होती है जब वह समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचे। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 94 किलोमीटर दूर, घने जंगलों और दुर्गम पहाडिय़ों के बीच बसा अबूझमाड़ का धोबे गांव आज इसी बदलते भारत और बदलते छत्तीसगढ़ की एक जीती-जाती मिसाल बन चुका है। जो इलाका कभी सिर्फ नक्सली हलचलों और विकास से दूरी के लिए जाना जाता था, आज वहां जल जीवन मिशन ने उम्मीदों का एक नया सवेरा ला दिया है। अबूझमाड़ के इस सुदूर अंचल में पहली बार घर-घर शुद्ध पेयजल की सुविधा पहुंची है, जिसने ग्रामीणों की जिंदगी की पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी है।

’अबूझमाड़ का धोबे गांव- जहां कभी बंदूकें गूंजती थीं, वहां अब नलों से बह रही विकास की धारा’

पूर्व में संघर्षों का दौर नदी-नालों के दूषित पानी से जंग
वर्षों तक धोबे गांव के ग्रामीणों के लिए सुबह की शुरुआत पानी के बड़े संघर्ष के साथ होती थी। अत्यंत दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा तो दूर, पीने का साफ पानी मिलना भी एक बड़ी चुनौती थी। गांव के लोग पीने के पानी के लिए पूरी तरह से स्थानीय नदी, नालों और झरनों पर निर्भर थे। पहाड़ों से बहकर आने वाला यह पानी न सिर्फ दूषित होता था, बल्कि इसके उपयोग से ग्रामीण लगातार जलजनित बीमारियों की चपेट में रहते थे। विशेषकर महिलाओं और बच्चों का एक बड़ा समय सिर्फ पीने का पानी ढोने में ही बीत जाता था।
जल जीवन मिशन- ऐसे बदली धोबे गांव की तस्वीर
ग्रामीणों की इस दशकों पुरानी और बेहद संवेदनशील समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन और जल जीवन मिशन की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में कदम रखा। विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा की चुनौतियों को पार करते हुए गांव में योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू किया गया। बिजली की अनिश्चितता से निपटने के लिए गांव में 10-10 हजार लीटर क्षमता वाले दो सोलर आधारित जल टैंक स्थापित किए गए। ऊबड़-खाबड़ रास्तों और घने जंगलों के बीच लगभग 1375 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई। गांव के सभी 40 परिवारों को श्हर घर जलश् योजना के तहत नल कनेक्शन से जोड़ा गया।
अंतिम छोर तक विकास की दस्तक
नारायणपुर की कलेक्टर ने इस सफलता पर कहा कि शासन की प्राथमिकता दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक हर हाल में मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना है। जल जीवन मिशन के माध्यम से अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम है। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता से पहुँचे।
खुशहाली की नई दस्तक- आसान हुई जिंदगी
आज धोबे गांव के हर घर के आंगन में लगे नल से जब स्वच्छ और शीतल जल बहता है, तो ग्रामीणों के चेहरे की खुशी देखते ही बनती है। अब न तो पानी के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता है और न ही दूषित पानी के कारण बीमार होने का डर सताता है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे इस दूरदराज के गांव में भी कभी नल से साफ पानी आएगा। सरकार के इस प्रयास ने हमारी दैनिक जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है। यह हमारे लिए सिर्फ पानी नहीं, बल्कि एक नया जीवन है। जल जीवन मिशन ने यहाँ सिर्फ पानी नहीं पहुँचाया है, बल्कि ग्रामीणों के मन में शासन और व्यवस्था के प्रति एक अटूट विश्वास भी पैदा किया है।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें