कृषि शिक्षा में भी हैं करियर, : नवाचार और उद्यमिता के असीमित अवसर
Tue, Aug 25, 2026
रायपुर।
कृषि अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित क्षेत्र नहीं रह गई है, बल्कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, उद्यमिता, टिकाऊ कृषि और बाजारोन्मुख अवसरों से जुड़ा व्यापक एवं रोजगारोन्मुख क्षेत्र बन चुकी है। ऐसे बदलते परिदृश्य में बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि विद्यार्थियों को सरकारी सेवाओं से लेकर अनुसंधान, कृषि व्यवसाय, एग्री-टेक, खाद्य प्रसंस्करण और उद्यमिता तक अनेक करियर विकल्प उपलब्ध कराती है। छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए कृषि क्षेत्र में संभावनाएं विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। राज्य की धान आधारित कृषि प्रणालियां, दलहन एवं तिलहन, उद्यानिकी, पशुपालन, वनोपज आधारित आजीविका, पारंपरिक एवं जनजातीय कृषि तथा कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्र कृषि शिक्षा और व्यावसायिक विकास के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं। प्रशिक्षित कृषि स्नातक उत्पादकता बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने, प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन तथा कृषि मूल्य श्रृंखला के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। चार वर्षीय बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान, मृदाविज्ञान, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन, जैव प्रौद्योगिकी, कीट विज्ञान, पादप रोग विज्ञान, उद्यानिकी, कृषि अर्थशास्त्र, कृषि प्रसार, कृषि मौसम विज्ञान, कृषि सूक्ष्म जीव विज्ञान और कृषि व्यवसाय प्रबंधन जैसे विविध विषयों का बहुविषयक ज्ञान प्रदान करता है। इससे विद्यार्थी उच्च शिक्षा, रोजगार, अनुसंधान और उद्यमिता के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं।
कृषि स्नातकों के लिए सरकारी विभागों, कृषि प्रसार, ग्रामीण विकास, कृषि विपणन, बीज संगठनों तथा विभिन्न कृषि विकास कार्यक्रमों में अवसर उपलब्ध हैं। बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र में कृषि ऋण, ग्रामीण बैंकिंग, कृषि वित्त, फसल बीमा, विकास बैंकिंग और किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े अवसर भी विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। निजी क्षेत्र में बीज, उर्वरक, फसल संरक्षण, जैव-इनपुट, कृषि यंत्र, खाद्य प्रसंस्करण, एग्री-टेक, कृषि विपणन और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। भविष्य की कृषि में ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग, रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस सटीक कृषि, डिजिटल कृषि, जलवायु-स्मार्ट कृषि, कृषि डेटा विश्लेषण, स्मार्ट सिंचाई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी तकनीकों की भूमिका बढ़ रही है। कृषि विशेषज्ञता के साथ डिजिटल एवं तकनीकी कौशल रखने वाले युवा इन उभरते क्षेत्रों में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकते हैं। बी.एससी. कृषि युवाओं को नौकरी तलाशने वाले से नौकरी देने वाले बनने का अवसर भी प्रदान करती है। नर्सरी, बीज उत्पादन, मशरूम उत्पादन, संरक्षित खेती, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जैव उर्वरक एवं जैव कीटनाशी, कस्टम हायरिंग सेंटर, ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं, मृदा एवं जल परीक्षण, मधुमक्खी पालन, खाद्य प्रसंस्करण तथा डिजिटल कृषि परामर्श जैसे क्षेत्रों में युवा अपना उद्यम स्थापित कर सकते हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विश्वविद्यालय में प्रायोगिक कक्षाओं, खेत प्रयोगों, शैक्षणिक भ्रमण, अनुभवात्मक अधिगम और कृषक समुदाय के साथ संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाता है।
विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं, विश्वस्तरीय चावल अनुसंधान सुविधाओं तथा छ।ठस् मान्यता प्राप्त कीटनाशी अवशेष विश्लेषण प्रयोगशाला जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्ळज्ञट के पास 22,000 से अधिक पारंपरिक धान जर्मप्लाज्म का समृद्ध संग्रह भी है, जो फसल सुधार, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु अनुकूलन तथा भविष्य की खाद्य सुरक्षा से संबंधित अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संसाधन है। विद्यार्थियों के व्यावसायिक विकास के लिए विश्वविद्यालय ने करियर मार्गदर्शन एवं प्लेसमेंट तंत्र विकसित किया है, जिसके अंतर्गत कैंपस प्लेसमेंट, करियर परामर्श, उद्योग संवाद, कौशल विकास, व्यक्तित्व विकास, व्यावसायिक अभिमुखीकरण और पूर्वछात्र सहभागिता के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। प्रवेश परामर्श 2026-27 के अंतर्गत कक्षा 12वीं उत्तीर्ण ऐसे विद्यार्थी, जिनकी रुचि विज्ञान, प्रकृति, प्रौद्योगिकी, ग्रामीण विकास, व्यवसाय या उद्यमिता में है, बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि के माध्यम से सरकारी सेवा, बैंकिंग, अनुसंधान, उच्च शिक्षा, कृषि व्यवसाय, एग्री-टेक, खाद्य प्रसंस्करण, परामर्श, उद्यमिता एवं ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं। अभ्यर्थियों को पात्रता, काउंसलिंग, सीट उपलब्धता, शुल्क एवं आवेदन प्रक्रिया के लिए प्ळज्ञट की नवीनतम आधिकारिक प्रवेश अधिसूचना का अवलोकन करने की सलाह दी गई है। कृषि चुनें, ज्ञान चुनें, नवाचार चुनें, उद्यमिता चुनें। बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि ज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अवसरों को जोड़ते हुए युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला बन सकती है।
छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक उड़ान, : संस्कृति और विरासत को भी नई पहचान
Tue, Aug 25, 2026
0 मंत्री अग्रवाल ने गिनाईं उपलब्धियां, 2028 तक नई पर्यटन पहचान का लक्ष्य
00 छत्तीसगढ़ को पर्यटन के वैश्विक नक्शे पर लाने की तैयारी
00 चित्रकोट, सिरपुर से लेकर धार्मिक पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग तक व्यापक कार्ययोजना
रायपुर।
पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज अपने विभागों की उपलब्धियों, योजनाओं और आगामी प्राथमिकताओं की जानकारी मीडिया के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाई। अग्रवाल आज नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में मीडिया से रूबरू हुए। प्रेस वार्ता में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की डीजीएम श्रीमती पूनम शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं।
छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक उड़ान, संस्कृति और विरासत को भी नई पहचान
प्रेस वार्ता की शुरुआत पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन द्वारा छत्तीसगढ़ पर्यटन से संबंधित महत्वपूर्ण उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति के साथ हुई। मंत्री राजेश अग्रवाल ने विभागीय उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को प्रकृति ने चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे जलप्रपात, बस्तर और सरगुजा की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, सिरपुर जैसी ऐतिहासिक विरासत तथा मां दंतेश्वरी और मां महामाया जैसे प्रमुख आस्था केंद्रों की समृद्ध विरासत प्रदान की है। सरकार का लक्ष्य इन प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपदाओं को देश और दुनिया के सामने नई पहचान दिलाना है।
पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहन
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पिछले लगभग ढाई वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। फिल्म सिटी निर्माण के लिए 203 करोड़ 53 लाख के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। फिल्म पर्यटन और बड़े आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी एवं कन्वेंशन सेंटर के विकास की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 350 करोड़ है।
61 ट्रेनों से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए अयोध्या-काशी के दर्शन
अग्रवाल ने बताया कि सरकार की महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी पहल श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के अंतर्गत आईआरसीटीसी के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का सफल संचालन किया जा चुका है। इनके माध्यम से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या और काशी के दर्शन कराए जा चुके हैं। सरकार का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को अधिक सुगम, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है।
होमस्टे और स्थानीय रोजगार पर विशेष जोर
पर्यटन मंत्री ने बताया कि पर्यटन का वास्तविक लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचाने के उद्देश्य से होमस्टे और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और युवाओं को पर्यटन से जोडऩे के अवसर बढ़ेंगे। पर्यटन व्यवसाय के औपचारिक पंजीकरण में भी वृद्धि हुई है। वर्तमान में लगभग 390 से अधिक टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट तथा 26 होटल पंजीकृत हैं। पर्यटक गाइड, आतिथ्य, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर कम से कम 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोडऩे का लक्ष्य रखा गया है।
चित्रकोट को विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य बनाने की तैयारी
मंत्री ने बताया कि बस्तर को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में से एक बताते हुए चित्रकोट को केवल जलप्रपात के रूप में नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वहीं सिरपुर के विस्तृत पर्यटन विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। मैनपाट और जशपुर जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्रों में भी पर्यटक सुविधाओं एवं अनुभव को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं।
भोरमदेव कॉरिडोर के लिए 145.99 करोड़ स्वीकृत
धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा 145 करोड़ 99 लाख की स्वीकृति प्रदान की गई है। रतनपुर महामाया मंदिर क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों के विकास के लिए भी प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे गए हैं।
डिजिटल पर्यटन को मिल रहा विस्तार
मंत्री ने बताया कि आज का पर्यटक अपनी यात्रा की शुरुआत मोबाइल फोन से करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विभाग की नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल सूचना और पर्यटन सुविधाओं को एकीकृत किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से लगभग 6 करोड़ 48 लाख तथा पर्यटन इकाइयों से लगभग ?31 करोड़ 75 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ है।
2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान बनाने का लक्ष्य
मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान देश और दुनिया के सामने स्थापित करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 100 करोड़ के वित्तीय प्रावधान की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में सतत विकास, निजी निवेश, समुदाय आधारित पर्यटन और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।
18 पर्यटन संपत्तियों के विकास में निजी भागीदारी
मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने की योजना है। इससे लगभग 500 करोड़ का निवेश आकर्षित होने तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग
पर्यटन मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे ले जाने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। इको-एथनिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर भागीदारी, फिल्म एवं ओटीटी आधारित प्रचार, अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटरीच तथा अंतरराष्ट्रीय इन्फ्लुएंसर फैम टूर जैसे प्रयास प्रस्तावित हैं।
कलाकारों के कल्याण और संस्कृति संरक्षण पर विशेष जोर
पर्यटन, संस्कृति मंत्री ने बताया कि संस्कृति विभाग की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि कलाकारों और साहित्यकारों के कल्याण को प्रमुखता देते हुए कलाकार कल्याण कोष चिकित्सा अनुदान योजना के अंतर्गत पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को लगभग 30 लाख 3 हजार की सहायता प्रदान की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 20 कलाकारों को 15 लाख 30 हजार की सहायता दी जा चुकी है। इसी तरह मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के माध्यम से नृत्य, संगीत, लोकनाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी भाषा में लेखन तथा अन्य शिल्प एवं लोककलाओं से जुड़े कलाकारों और लेखकों को संरक्षण एवं आर्थिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 87 कलाकारों को लगभग 19 लाख 8 हजार की राशि प्रदान की गई है।
407 आर्थिक रूप से अभावग्रस्त वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को पेंशन
संस्कृति मंत्री ने बताया कि वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों की आर्थिक सुरक्षा के लिए संचालित मासिक वित्तीय सहायता योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 407 आर्थिक रूप से अभावग्रस्त वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों को ?82 लाख 12 हजार की राशि पेंशन के रूप में प्रदान की गई है। वर्तमान वर्ष में अब तक 121 वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों को योजना का लाभ दिया जा चुका है।
संस्कृति को नई पीढ़ी से जोडऩे की पहल
संस्कृति श्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में सूचीबद्ध 89 विशिष्ट मेला-मड़ई, उत्सव-महोत्सव एवं समारोहों का आयोजन जिला प्रशासन के सहयोग से पूरे वर्ष किया जा रहा है। एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए स्थानीय परंपराओं, तीज-त्योहार, यात्रा, मेला-मड़ई तथा ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धार्मिक स्थलों पर सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन के लिए आदि पर्व पंचांग तैयार किया जा रहा है। संस्कृति अग्रवाल ने बताया कि बस्तर की लोकपरंपरा और जनजातीय संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने के लिए पिछले दो वर्षों से ग्रामीण, ब्लॉक एवं जिला स्तर पर बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार दलों, मांझी-चालकी प्रतिनिधियों तथा पद्मश्री विभूतियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से आत्मीय भेंट एवं सम्मान का अवसर मिला।
लोककलाओं और लोकवाद्यों के संरक्षण के लिए नए आयोजन
संस्कृति श्री अग्रवाल ने कहा कि पावस प्रसंग, रंगतरंग, रंगपरब और लोकरंग पर्व जैसे आयोजनों के माध्यम से शास्त्रीय नृत्य-संगीत, लोकवाद्य, लोकनाट्य तथा पंडवानी, भरथरी, ददरिया, जसगीत, करमा, पंथी, बांसगीत और देवारगीत जैसी पारंपरिक लोकविधाओं को मंच प्रदान किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कलाकारों को प्रोत्साहन देने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोडऩा है।
संस्कृति का डिजिटल आर्काइव तैयार
संस्कृति अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विस्तृत डिजिटल आर्काइव तैयार किया जा रहा है। यह प्रदेश की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोक परंपराओं और विरासत को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करने की महत्वपूर्ण पहल है।
सांस्कृतिक संस्थाओं को 7.85 करोड़ से अधिक की सहायता
संस्कृति अग्रवाल ने कहा कि कला और संस्कृति के क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रही अशासकीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 363 निजी संस्थाओं को 854 सांस्कृतिक आयोजनों के लिए 7 करोड़ 85 लाख 3 हजार की आर्थिक अनुदान राशि स्वीकृत की गई है।
नई फिल्म नीति की तैयारी
पर्यटन, संस्कृति मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ फिल्म नीति-2021 में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया चल रही है। संशोधनों के साथ नवीन फिल्म नीति तैयार की जाएगी, जिससे प्रदेश के प्राकृतिक एवं खूबसूरत स्थलों पर फिल्म निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा और पात्र फिल्मों को सब्सिडी का लाभ मिल सकेगा।
सिरपुर को विश्व धरोहर की दिशा में आगे बढ़ाने की पहल
पर्यटन, संस्कृति मंत्री ने बताया कि पुरातत्व विभाग की उपलब्धियों में सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने की पहल प्रमुख है। सिरपुर में बौद्ध, जैन और हिंदू स्थापत्य परंपराओं का अद्भुत सह-अस्तित्व है। सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा यूनेस्को के मानकों के अनुरूप नॉमिनेशन डोजियर तैयार कर भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया है।
63 संरक्षित स्मारकों के संरक्षण पर कार्य
पर्यटन, संस्कृति मंत्री ने कहा कि प्रदेश के 63 राज्य संरक्षित स्मारकों का संरक्षण किया जा रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 12 राज्य संरक्षित स्मारकों में संरक्षण, उन्नयन और पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के लिए फेसलिफ्टिंग की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। सरकार का दृष्टिकोण है कि धरोहर संरक्षण और संवर्धन के साथ पर्यटन तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिले।
रायपुर संग्रहालय में नई गैलरी, पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो
संस्कृति मंत्री ने बताया कि महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर के उन्नयन के लिए नई रियासत गैलरी की स्थापना तथा वर्तमान गैलरियों के उन्नयन एवं विकास का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो तथा संध्याकालीन कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके लिए शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे जनजातीय नायकों के साथ छत्तीसगढ़ की मूर्त एवं अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं को केंद्र में रखकर स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है।
12 लाख पृष्ठों का डिजिटल अभिलेखीकरण
संस्कृति मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ से संबंधित लगभग 12 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण कर रायपुर लाया गया है। इन डिजिटल अभिलेखों को वेब अभिलेखागार पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए कैटलॉग एवं मेटाडेटा तैयार किया जा रहा है।
2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण
संस्कृति मंत्री ने बताया कि पुरातत्व विभाग द्वारा अब तक 11 पुरास्थलों का उत्खनन कराया जा चुका है। रायपुर जिले के आरंग तहसील में लखौली के पास रीवां के मृत्तिकागढ़ में हुए पुरातात्विक उत्खनन से लगभग 2750 साल पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण सामने आए हैं। उत्खनन में प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से लेकर कलचुरी काल तक के अवशेष तथा विभिन्न राजवंशों के सोने, चांदी और तांबे के सिक्के मिले हैं।
मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन और संस्कृति का विकास केवल नए पर्यटन स्थलों और आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार, आर्थिक गतिविधियों, कलाकारों के कल्याण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है। उन्होने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक, सांस्कृतिक, इको-एथनिक और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में हमारी सरकार दीर्घकालिक योजना के साथ आगे बढ़ रही है।
छत्तीसगढ़ में होगी देश : की पहली राज्य स्तरीय हॉकी लीग
Tue, Aug 25, 2026
प्रदेश के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर के अनुभव और प्रतिस्पर्धी वातावरण से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी लीग – अरुण साव
उप मुख्यमंत्री ने लोगो, टैगलाइन और शुभंकर का किया अनावरण
रायपुर-
छत्तीसगढ़ में हॉकी की नई तस्वीर गढ़ने की तैयारी है। राज्य के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा हॉकी इंडिया से मान्यता प्राप्त छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले सीजन का आयोजन किया जा रहा है। राजधानी रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में होने वाली यह लीग देश के किसी भी राज्य में आयोजित होने वाली पहली राज्य-स्तरीय हॉकी लीग होगी, जिसे हॉकी इंडिया लीग की तर्ज पर पूरी तरह प्रोफेशनल और व्यावसायिक स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। आयोजन की संभावित तिथियों 21 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक लीग के मुकाबले खेले जाएंगे।
उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने आज राजधानी रायपुर के नवीन विश्राम भवन में लीग के लोगो, टैगलाइन और शुभंकर का अनावरण किया। उन्होंने लॉन्चिंग कार्यक्रम में लीग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लीग का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की युवा हॉकी प्रतिभाओं को बड़ा मंच उपलब्ध कराना और उन्हें देश के श्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ खेलने तथा उनसे सीखने का अवसर देना है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, संचालक सुश्री आकांक्षा शिक्षा खलखो, संयुक्त संचालक श्री प्रभाकर पाण्डेय और छत्तीसगढ़ हॉकी संघ के अध्यक्ष श्री फिरोज अंसारी सहित अनेक विभागीय अधिकारी भी लीग के लॉन्चिंग कार्यक्रम में मौजूद थे।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हॉकी की समृद्ध परंपरा रही है और राज्य में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग इन प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर देगी और प्रदेश के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर के अनुभव तथा प्रतिस्पर्धी वातावरण से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
श्री साव ने बताया कि छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले सीजन में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली छह टीमें मैदान में उतरेंगी। इनमें राजधानी रॉयल्स, चित्रकूट चैलेंजर्स, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स, चक्रधर चैंपियंस, न्यायधानी नाइट्स और मैनपाट टाइटन्स शामिल हैं। ये टीमें प्रदेश की अलग-अलग क्षेत्रीय पहचान और खेल प्रतिभा को एक मंच पर लेकर आएंगी।
लीग का लोगो छत्तीसगढ़ के मानचित्र पर आधारित है। इसमें केसरिया और हरे रंग के माध्यम से भारतीयता की भावना को दर्शाया गया है, जबकि आगे बढ़ती नारंगी रेखा प्रदेशवासियों की निरंतर प्रगति और आगे बढ़ने की भावना का प्रतीक है। लीग की टैगलाइन "चलव रे संगी, हॉकी खेलबो" रखी गई है। छत्तीसगढ़ी बोली में यह टैगलाइन अपनत्व और आमंत्रण का भाव लिए हुए है, जिसका अर्थ है—"चलो दोस्त, हॉकी खेलते हैं।"
लीग का आधिकारिक शुभंकर "बघवा" नामक बाघ है। यह छत्तीसगढ़ के घने जंगलों और समृद्ध वन्यजीव विरासत का प्रतीक है। बघवा साहस, शक्ति और निडरता का संदेश देता है तथा खिलाड़ियों की जुझारू भावना और मैदान पर अपना दबदबा कायम करने की आकांक्षा को प्रदर्शित करता है।
प्रतियोगिता में सभी छह टीमें लीग मुकाबले खेलेंगी। इन मुकाबलों के आधार पर अंक तालिका में शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। सेमीफाइनल के बाद विजेता टीम का फैसला फाइनल मुकाबले में होगा। मैचों के दौरान सभी अंपायर और तकनीकी अधिकारी हॉकी इंडिया द्वारा नियुक्त किए जाएंगे, जिससे प्रतियोगिता में तकनीकी गुणवत्ता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।
छत्तीसगढ़ हॉकी लीग केवल खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहेगी। टूर्नामेंट के दौरान प्रतिदिन विशेष मनोरंजन कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इससे दर्शकों को रोमांचक हॉकी मुकाबलों के साथ मनोरंजन का भी अनुभव मिलेगा। खास बात यह है कि लीग के सभी मुकाबलों में दर्शकों के लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। इससे बड़ी संख्या में खेलप्रेमियों और युवाओं के स्टेडियम पहुंचने की उम्मीद है।