रायपुर में अष्टविनायक रियल्टीज़ ला रहा है : अपने प्रोजेक्ट अभिनव सिटी में भव्य आवास मेला
Wed, Jul 1, 2026
00 प्रकृति और आधुनिकता का अद्भुत संगम
रायपुर।
रायपुर के प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी और डेवलपर 'अष्टविनायक रियल्टीज़' और , 'अभिनव बिल्डर्स' शहरवासियों के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आए हैं। 3, 4 और 5 जुलाई 2026 को, रायपुर के मोवा, दलदल सिवनी में स्थित उनके बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट 'अभिनव सिटी' में एक भव्य 'आवास मेला' आयोजित किया जा रहा है। प्रकृति के बीच एक नए युग की कम्युनिटी की परिकल्पना पर आधारित यह प्रोजेक्ट लग्ज़री, सुविधा और शांति का बेहतरीन मेल है।
विस्तृत आवासीय विकल्प
इस तीन -दिवसीय आवास मेले में ग्राहकों को उनकी आवश्यकता और बजट के अनुसार विविध विकल्प मिलेंगे:
प्रीमियम प्लॉट्स: ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार गार्डन प्लॉट्स, गार्डन फेसिंग प्लॉट्स, कॉर्नर प्लॉट्स या गार्डन फेसिंग और कॉर्नर प्लॉट्स का चयन कर सकते हैं। 2 और 3 बीएचके लग्ज़री अपार्टमेंट्स: आधुनिक जीवनशैली को ध्यान में रखकर बनाए गए इन अपार्टमेंट्स में 2 बीएचके (1066 वर्ग फुट और 1125 वर्ग फुट सुपर बिल्ट-अप एरिया) रेरा कारपेट एरिया 672 वर्ग फुट और 714 वर्ग फुट और 3 बीएचके (1317 वर्ग फुट सुपर बिल्ट-अप एरिया) रेरा कारपेट एरिया 959 वर्ग फुट के शानदार विकल्प मौजूद हैं।
अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधाएं
'अभिनव सिटी' अपने निवासियों को एक कम्पलीट वर्ल्डक्लास लाइफस्टाइल देने के लिए प्रतिबद्ध है। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं इस प्रकार हैं:
आध्यात्मिक और प्राकृतिक :
मन की शांति के लिए परिसर में एक सुंदर मंदिर और हरियाली के लिए 10 विशाल गार्डन मौजूद हैं।
स्वास्थ्य और खेलकूद :
फिटनेस के लिए अत्याधुनिक जिम, स्विमिंग पूल, स्टीम बाथ, मल्टीपर्पस कोर्ट, और नेट क्रिकेट की सुविधा उपलब्ध है।
मनोरंजन और सामजिक आयोजन :
निवासियों के मनोरंजन के लिए मिनी थिएटर, इंडोर प्ले एरिया, म्यूजिक रूम, और पारिवारिक या सामाजिक आयोजनों के लिए कम्युनिटी हॉल की व्यवस्था है। बच्चों के लिए सुरक्षित किड्स प्ले एरिया भी बनाया गया है।
अतिरिक्त सुविधाएं :
मेहमानों के रुकने के लिए विशेष गेस्ट रूम्स हैं। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे सिक्योरिटी के साथ पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।
प्राइम लोकेशन
यह प्रोजेक्ट रायपुर के सबसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में से एक में स्थित है, जहाँ से 30 और 40 फीट चौड़ी आंतरिक सड़कों के साथ 60 फीट चौड़ी मुख्य सड़क की कनेक्टिविटी है।
प्रकृति :
इंदिरा स्मृति वन (0.5 किमी)
शिक्षा और विज्ञान :
छत्तीसगढ़ साइंस सेंटर (2.2 किमी), भवन्स स्कूल, नारायण टेक्नो स्कूल, और चैतन्य टेक्नो स्कूल (4 किमी)
स्वास्थ्य :
बालाजी हॉस्पिटल (2.5 किमी), इट्सा हॉस्पिटल (2.5 किमी)
शॉपिंग और एंटरटेनमेंट :
अंबुजा मॉल (2.9 किमी), रिलायंस स्मार्ट बाज़ार (3 किमी), डीकैथलॉन (3.8 किमी)
मुख्य केंद्र :
अवंती बाई चौक (5 किमी), पंडरी मार्केट (5.5 किमी), और रेलवे स्टेशन (8.5 किमी)
डेवलपर्स का विज़न और सन्देश
इस भव्य आयोजन और प्रोजेक्ट के विजन को लेकर अष्टविनायक रियल्टीज़ के सीएमडी , श्री संतोष लोहाना ने कहा: "हमारा उद्देश्य हमेशा से ही ग्राहकों को सिर्फ ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि एक संपूर्ण और सुरक्षित जीवनशैली प्रदान करना रहा है। 'अभिनव सिटी' को प्रकृति और आधुनिकता के अनूठे संगम के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जहाँ हर उम्र के लोगों की सुविधाओं का बारीकी से ध्यान रखा गया है।"
वहीं, अष्टविनायक रियल्टीज़ के एमडी , श्री प्रकाश लोहाना ने आवास मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा: "आगामी 3, 4 और 5 जुलाई को आयोजित होने वाला 'आवास मेला' बायर्स और इन्वेस्टर्स के लिए एक बेहतरीन अवसर है। हमारे प्रोजेक्ट की पारदर्शिता, इसकी प्राइम लोकेशन और विश्वस्तरीय सुविधाएं इसे रायपुर का सबसे बेहतरीन इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनाती हैं। हम सभी शहरवासियों को इस मेले में आकर अपने सपनों का घर चुनने के लिए सादर आमंत्रित करते हैं।"
आयोजन का विवरण
दिनांक:
3, 4 और 5 जुलाई 2026
स्थान: अभिनव सिटी, अंबुजा मॉल के पीछे, साइंस सेंटर के पास, दलदल सिवनी, मोवा, रायपुर (छ.ग.)
संपर्क:
8516003000
'अभिनव सिटी' का यह आवास मेला निवेश करने और अपने सपनों का घर खरीदने का एक बेहतरीन अवसर है। अधिक जानकारी के लिए आप दिए गए नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
भोरमदेव जंगल सफारी : बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान
Wed, Jul 1, 2026
00 पर्यटन, प्रकृति और रोजगार का नया आयाम
00 एक माह में ही पहुंचे 480 से ज्यादा पर्यटक, युवाओं, महिला समूह, वन प्रबंधन समिति को पौने 3 लाख रुपए से अधिक की हुई आय
रायपुर।
ईको-टूरिज्म के तहत स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुंचाए बिना लोगों को प्रकृति से जोडऩे की नई पहल शुरू की गई है, जिसमें पर्यटकों को आकर्षित करने वाले शानदार मॉडल शामिल हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की इको-टूरिज्म पहल के तहत विकसित भोरमदेव जंगल सफारी संचालन के पहले ही महीने में छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान बनकर उभरी है। जंगल सफारी प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है, सिर्फ एक माह में ही 489 से अधिक पर्यटक यहां पहुंचे हैं, वहीं स्थानीय युवाओं, वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों को रोजगार एवं आमदनी के नए अवसर मिले हैं। भोरमदेव जंगल सफारी प्रकृति, रोमांच और स्थानीय विकास का सफल संगम बनी यह पहल भोरमदेव को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में स्थापित करने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है।
एक माह में पहुंचे सैंकड़ों पर्यटक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा तथा वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह जंगल सफारी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है। वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि भोरमदेव जंगल सफारी का उद्घाटन 3 मई को कर पर्यटकों के लिए इसका संचालन शुरू किया गया था। मानसून को देखते हुए 4 जून से सफारी को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। मात्र एक माह के संचालन के दौरान 480 से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया, जिससे पौने 3 लाख रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई है। बारिश के बाद नवंबर माह से इसका संचालन फिर से शुरू होगा।
पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों को मिला रोजगार
भोरमदेव जंगल सफारी की शुरुआत से स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिले हैं। केवल एक महीने के संचालन में वाहन चालक, गाइड और गेट कीपर के रूप में कार्यरत 17 स्थानीय युवाओं ने 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की। वहीं वन प्रबंधन समिति को 92 हजार और वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। सफारी परिसर में स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैंटीन भी पर्यटकों की पसंद बनी रही। एक माह में कैंटीन से 20 हजार रुपये से अधिक का मुनाफा हुआ, जिससे समूह की महिलाओं की आय बढ़ी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूती मिली।
सिर्फ सफारी ही नहीं, उद्यान भी बना आकर्षण का केंद्र
जंगल सफारी के साथ-साथ भोरमदेव का प्राकृतिक उद्यान भी पर्यटकों की पसंद बन रहा है। सफारी का आनंद लेने वाले पर्यटकों के अलावा 1500 से अधिक लोगों ने उद्यान का भी भ्रमण किया। इससे साफ है कि भोरमदेव क्षेत्र धीरे-धीरे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना रहा है।
वन्यजीवों की रोमांचक साइटिंग ने बढ़ाया आकर्षण
करीब 36 किलोमीटर लंबी जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को कई वन्यजीवों और पक्षियों को करीब से देखने का अवसर मिला। सफारी में भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, कोटरी (बार्किंग डियर), बाघ के पदचिह्न (टाइगर पगमार्क), जंगली मुर्गा, विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और रंग-बिरंगी तितलियां पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहीं। घने जंगल, ऊंची पहाडिय़ां और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर वातावरण ने सफारी को रोमांचक और यादगार अनुभव बना दिया।
इको-टूरिज्म की नई पहचान
वन मंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल ने बताया कि लगभग 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले भोरमदेव अभयारण्य में 36 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी मार्ग तैयार किया गया है। सफारी का मुख्य प्रवेश द्वार भोरमदेव मंदिर के पास करियाआमा क्षेत्र में स्थित है, जहां से पर्यटक अपनी जंगल यात्रा शुरू करते हैं। इस सफारी के माध्यम से पर्यटकों को छत्तीसगढ़ के समृद्ध वन, वन्यजीव, जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर भी मिल रहे हैं।
रामगढ़ संस्कृति : इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम : साय
Wed, Jul 1, 2026
00 मुख्यमंत्री ने रामगढ़ पहुँचकर निहारी सीताबेंगरा की प्राचीन विरासत
00 जोगीमारा गुफा शिलालेख एवं हाथीपोल का किया अवलोकन
00 हमारी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढिय़ों के लिए अमूल्य विरासत
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन किया तथा इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की अनूठी प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य एवं पर्यटन का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत भी विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान रखती है। रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर प्राप्त हों।
उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख एवं चित्रकला की अनुपम धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाडिय़ों में अपनी कालजयी कृति मेघदूतम् की रचना की थी, जिसका आरंभ आषाढस्य प्रथमदिवसे से होता है। इसी ऐतिहासिक एवं साहित्यिक स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की भित्तिचित्र परंपरा तथा यहाँ प्राप्त प्राचीन अभिलेख इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।
रामगढ़ की एक अन्य महत्वपूर्ण पहचान हाथीपोल नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी तथा 15 से 20 फीट ऊँची यह प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ इस सम्पूर्ण क्षेत्र को और अधिक रहस्यमयी, आकर्षक एवं ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं। रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित इन कलात्मक गुफाओं का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।