छत्तीसगढ़ वन विभाग में 4 आईएफएस : अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी
Wed, Jun 10, 2026
रायपुर।
छत्तीसगढ़ सरकार ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वरिष्ठ स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए चार भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी है। उक्त आदेश छत्तीसगढ़ शासन वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के विशेष सचिव जनक प्रसाद पाठक के हस्ताक्षर से जारी हुआ।
जारी आदेश के मुताबिक कुमार, भा.व.से. (1992), प्रधान मुख्य वन संरक्षक (अनुश्रवण एवं मूल्यांकन) छ.ग., अरण्य भवन, नवा रायपुर अटल नगर को उनके वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ अस्थायी रूप से, आगामी आदेश पर्यन्त निदेशक, छत्तीसगढ़ राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर का अतिरिक्त प्रभार सौंपता है।
ओ पी यादव, भा.व.से. (1995), मुख्य कार्यपालन अधिकारी (कैम्पा), छत्तीसगढ़, अरण्य भवन, नवा रायपुर अटल नगर को अस्थायी रूप से, आगामी आदेश पर्यन्त प्रभारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण-सह-मुख्य वन्यजीव वार्डन), छत्तीसगढ़, नवा रायपुर अटल नगर के पद पर पदस्थ करता है।
शालिनी रैना, भा.व.से. (2001), अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन राजपत्रित/अराजपत्रित/समन्वय, कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, अरण्य भवन, नवा रायपुर अटल को उनके वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ अस्थायी रूप से, आगामी आदेश पर्यन्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी (कैम्पा), छत्तीसगढ़, अरण्य भवन, नवा रायपुर अटल नगर का अतिरिक्त प्रभार सौंपता है।
माथेश्वरन व्ही. भा.व.से. (2006), प्रभारी अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव प्रबंधन एवं योजना) कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण-सह-मुख्य वन्यजीव वार्डन), छत्तीसगढ़, नवा रायपुर अटल नगर एवं प्रभारी सदस्य सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड, नवा रायपुर एवं प्रभारी सदस्य सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य आद्रभूमि प्राधिकरण, नवा रायपुर को उनके वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ प्रभारी अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास एवं योजना/बजट लेखा एवं लेखा परीक्षा) कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, अरण्य भवन, नवा रायपुर अटल का अतिरिक्त प्रभार सौंपता है।
विशेष पिछड़ी जनजातियों : के बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें- राज्यपाल डेका
Wed, Jun 10, 2026
रायपुर।
राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉक्टर कमलप्रीत सिंह ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान राज्यपाल ने राज्य के विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति तथा वहां उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की।
राज्यपाल ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर देते हुए संबंधित समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा से जोडऩे तथा उनके लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा, छात्रावास सुविधा, विद्यालयीन अधोसंरचना और शिक्षकों की उपलब्धता से जुड़े विषयों का संवेदनशीलता के साथ निराकरण किया जाना चाहिए, ताकि इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त हो सकें और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
पेड़ों की सुरक्षा और संवर्धन : पर समुचित ध्यान देने की आवश्यकता - डेका
Wed, Jun 10, 2026
00 रायपुर वन मंडल के डीएफओ श्री लोकनाथ पटेल ने मुलाकात की
रायपुर।
राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडे, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, नगर पालिक निगम रायपुर के आयुक्त सम्बित मिश्रा, मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत्त मणिवासगन एस तथा रायपुर वन मंडल के डीएफओ लोकनाथ पटेल ने मुलाकात की । इस दौरान राज्यपाल ने शहर और नया रायपुर में लगाए गए वृक्षों के संरक्षण एवं सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया है।
राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पौधे लगाने के बाद उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही वृक्षों की कटाई की अनुमति दी जाए। राज्यपाल ने शहर में बड़े वृक्षों के पास से ट्री गार्ड हटाने तथा जहां वृक्षारोपण किया गया है, वहां पेड़ों के चारों ओर बने कंक्रीट ढांचे को हटाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेड़ों की जड़ों तक पर्याप्त मात्रा में पानी और हवा पहुंचना जरूरी है, तभी उनका समुचित विकास हो सकेगा।
राज्यपाल डेका ने कहा कि एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियान व्यापक स्तर पर चलाए जा रहे हैं। वृक्षारोपण के बाद उनकी देखभाल पर पर्याप्त ध्यान दिया जाए, जो भी पौधे लगाए जाएं, उनकी नियमित निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि वे विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें। राज्यपाल ने अधिकारियों से शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने और लगाए गए पौधों के जीवित रहने की दर बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करने को कहा है।