बरकेला जलाशय : के कार्यों के लिए 3.80 करोड़ रूपए स्वीकृत
Mon, May 25, 2026
रायपुर।
छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा मनेन्द्रगढ़- चिरमिरी-भरतपुर जिले के विकासखण्ड-मनेन्द्रगढ़ की बरकेला जलाशय योजना की नहरों के जीर्णोद्धार कार्य के लिए 3 करोड़ 80 लाख 20 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने के उपरांत रूपांकित सिंचाई क्षमता 285 हेक्टेयर के विरूद्ध 254 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति सहित पूर्ण रूपांकित क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। योजना के कार्यों को पूर्ण कराने के लिए मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग अंबिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।
सड़क दुर्घटनाएं नहीं हों : इसके लिए हर जरूरी कदम उठाएं : मुख्य सचिव
Mon, May 25, 2026
00 ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश, प्रदेश में 150 स्थानों पर लगे ईव्ही चार्जिंग स्टेशन
रायपुर।
मुख्य सचिव विकासशील ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए सभी समुचित और ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव आज मंत्रालय में सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।
ब्लैक स्पॉट सुधारने पर विशेष जोर
मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के लिए चिन्हित ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और वहां आवश्यक सुधार कार्य तत्काल किए जाएं। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय से सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए ताकि हादसों की आशंका खत्म हो सके।
सुप्रीम कोर्ट और केंद्र की योजनाओं की समीक्षा
बैठक में राज्य सड़क सुरक्षा कोष, माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फलोदी एवं रंगा रेड्डी सड़क दुर्घटना मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। साथ ही पीएम राहत योजना और पीएम ई-ड्राईव योजना की प्रगति की जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने सर्वोच्च न्यायालय की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने को कहा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सड़क दुर्घटना रेस्क्यू से संबंधित एसओपी के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।
ईव्ही चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन की स्थापना में तेजी लाने को कहा। उन्होंने परिवहन विभाग को निर्धारित स्थलों पर तत्काल ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 150 स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इन स्टेशनों पर पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत सब्सिडी भी दी जाती है।
घायलों को मिलेगा कैशलेस इलाज
मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित उपचार मिलना सबसे जरूरी है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत घायलों का अस्पताल में कैशलेस उपचार किया जाता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, गृह-पुलिस, परिवहन तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत अब तक 282 सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के उपचार के लिए पंजीकरण किया गया है। मुख्य सचिव ने इस योजना के क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की और इसे और प्रभावी बनाने को कहा। बैठक में परिवहन विभाग के सचिव एवं आयुक्त एस. प्रकाश, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुश्री आर. शंगीता सहित पुलिस, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट का बड़ा फैसला : गर्भपात के बाद दोबारा प्रेग्नेंसी पर भी मिलेगा पूरा अवकाश
Mon, May 25, 2026
बिलासपुर।
कामकाजी महिलाओं के मातृत्व अधिकारों को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा कि यदि किसी महिला कर्मचारी का गर्भपात हो जाता है, और वह उसके बाद दोबारा गर्भवती होती है, तो पिछला अवकाश उसके नए मातृत्व अवकाश के रास्ते में बाधा नहीं बनेगा। महिला अपने दूसरे गर्भधारण के लिए कानूनन पूरी मातृत्व छुट्टी पाने की हकदार है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने महिला के वेतन से काटे गए 80,254 रुपए की रिकवरी को रद्द कर दिया है। मामले में जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया।
बता दें, कि भारतीय खाद्य निगम रायपुर में असिस्टेंट ग्रेड-2 के पद पर पदस्थ महिला कर्मचारी वर्ष 2019 में गर्भवती हुई थीं। उनके जुड़वां बच्चे होने थे, लेकिन गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं के चलते 25 अप्रैल 2019 को अस्पताल में उनका एक भ्रूण मिसकैरेज हो गया। डॉक्टरों की निगरानी और बेड रेस्ट के बाद उन्होंने 3 सितंबर 2019 को एक प्री-मैच्योर बेटी को जन्म दिया। इसके बाद उन्होंने मातृत्व अवकाश और नियमों के अनुसार मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए आवेदन किया। विभाग ने उन्हें केवल 68 दिनों का असाधारण अवकाश बिना वेतन के मंजूर किया, और लीव बैलेंस नहीं होने का हवाला देकर उनके वेतन से 80,254 रुपए की कटौती भी कर ली गई। इस पर महिला ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता मातृत्व अवकाश और गर्भपात के नियमों के तहत कुल 90 दिनों की छुट्टी की हकदार है, जिसे विभाग कम नहीं कर सकता। कोर्ट ने लीव बैलेंस न होने के नाम पर महिला के वेतन से काटे गए 80,254 रुपए की रिकवरी को निरस्त कर दिया और रकम वापस करने के आदेश दिए। इसके अलावा महिला कर्मचारी के बाकी बचे 3 लाख 76 हजार 773 रुपए के मेडिकल बिलों के भुगतान पर निर्देश दिया है कि वे सभी दस्तावेजों की दोबारा से जांच कर तय उचित आदेश जारी करें। हाई कोर्ट ने मैटरनिटी बेनीफिट एक्ट, 1961 का हवाला देते हुए कहा कि मातृत्व अवकाश का अधिकार एक महिला का वैधानिक और संवैधानिक अधिकार है, यह उसके सम्मान, स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ा है।