खेलों में समग्र विकास के लिए छत्तीसगढ़ तैयार : साव
Sat, Apr 25, 2026
00 श्रीनगर में खेल चिंतन शिविर में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री
00 भारत को खेल शक्ति बनाने केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय तथा राज्यों व केन्द्रशासित प्रदेशों के बीच गंभीर मंथन
00 पहले दिन मेडल स्ट्रेटजी, केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय तथा डोपिंग एवं खेल नैतिकता पर हुई गंभीर चर्चा
रायपुर।
राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर आज श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में प्रारंभ हुआ। इस राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण आयोजन में केंद्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे, विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खेल मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ की ओर से उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार इस चिंतन शिविर में भागीदारी कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री साव ने इस मौके पर कहा कि छत्तीसगढ़ खेलों के क्षेत्र में समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ पूरे देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ेगा।
साव ने बताया कि आज शिविर के पहले दिन केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के साथ देश में खेलों को नई दिशा देने पर मंथन किया गया। यह पहल न केवल नीतियों को मजबूत करेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को आगे लाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुरूप 2047 तक भारत को खेल महाशक्ति बनाने केंद्र सरकार और राज्य सरकारें एकजुट होकर कार्य कर रही हैं। छत्तीसगढ़ के हर गांव और हर शहर से नए खिलाड़ी उभरें और देश-विदेश के खेल मंचों पर अपना परचम लहराएं, यह हमारा लक्ष्य है।
26 अप्रैल तक चलने वाला यह शिविर देश में खेलों के समग्र विकास, नीति सुधार, वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लक्ष्य को हासिल करने और भारत को खेल शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय द्वारा लगातार दूसरे वर्ष इस चिंतन शिविर का आयोजन किया गया है।
चिंतन शिविर के पहले दिन के प्रमुख सत्रों में मेडल स्ट्रेटजी – खेलो इंडिया पर गहन मंथन किया गया। विभिन्न राज्यों से प्राप्त सुझावों के आधार पर खेल प्रशिक्षकों के पोटेंशियल को विकसित करने पर सर्वसम्मति बनी। साथ ही वर्ष 2048 तक भारत को ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष 5 देशों में शामिल करने के रोडमैप पर व्यापक चर्चा हुई। इसमें स्पोर्ट्स साइंस के विस्तार एवं उसके प्रभावी उपयोग को खेल विकास का महत्वपूर्ण आधार माना गया। खेल मंत्रालय द्वारा इस पर निरंतर कार्य किया जा रहा है।
द्वितीय सत्र ‘खेलो भारत नीति – केंद्र एवं राज्य समन्वय को सुदृढ़ करना’ विषय पर आयोजित हुआ। इस सत्र में विभिन्न राज्यों के बेस्ट प्रेक्टिसेस को साझा किया गया। खिलाड़ियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के प्रभावी उपयोग, प्रतिभा पहचान तथा खेल अकादमियों के मानकीकरण पर विशेष बल दिया गया। सत्र के दौरान विद्यालय स्तर पर खेलों को सशक्त बनाने के लिए शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से जोड़ने, खेल शिक्षकों की भर्ती एवं उन्हें उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करने पर सहमति बनी। साथ ही खिलाड़ियों का समग्र डॉटा-बेस तैयार करने पर राज्यों एवं केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि प्रतिभाओं की सही पहचान सुनिश्चित हो सके।
इस सत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि खिलाड़ियों को केवल नौकरी प्राप्त करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि देश के लिए पदक जीतने के लक्ष्य के साथ समर्पित होकर खेलना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अधिक अवसर, सम्मान एवं आर्थिक लाभ प्राप्त होते हैं। साथ ही इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खिलाड़ियों के लिए ऐसी व्यवस्था (मॉडल) विकसित की जाए, जिससे वे नौकरी प्राप्त करने के बाद भी खेल जारी रखें और अपने खेल करियर को बीच में न छोड़ें।
ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति विकसित करने, जमीनी स्तर पर सुविधाओं के विस्तार तथा बच्चों को अधिक समय खेल गतिविधियों में देने पर भी विशेष जोर दिया गया। साथ ही खेल अधोसंरचना के निर्माण में विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई।
तीसरे सत्र में डोपिंग एवं खेल नैतिकता पर गंभीर चर्चा हुई। खेलों में प्रतिबंधित दवाईयों के उपयोग पर कड़े नियम बनाने तथा डोपिंग को अपराध की श्रेणी में लाने के विषय पर केंद्र सरकार एवं खेल मंत्रालय की सख्त नीति को दोहराया गया। इस सत्र में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने खेलों में सुरक्षित एवं पेशेवर वातावरण सुनिश्चित करने तथा खिलाड़ियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से सेफ गॉर्डिंग ऑफिसर्स की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया।
नक्सलमुक्त बस्तर में : अब हो रहे है तेजी से निर्माण कार्य
Sat, Apr 25, 2026
रायपुर।
नक्सलमुक्त आबूझमाड़ क्षेत्र में अब निर्माण कार्य तेजी से किये जा रहें। क्षेत्र में सड़क, जल निकासी, ओवरहेड टैंक, लघु सिंचाई योजना सहित अन्य अधोसंरचनाओं के कार्यो ने जोर पकड़ लिया है पिछले दिनों नक्सलमुक्त आबूझमाड़ में सीटीई की टीम ने विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।
टीम ने नारयणपुर के हरिमार्कटोला, सड़क का निरीक्षण किया। टीम ने देखा कि निर्मित सड़कों मोटाई और चौड़ाई को सही मानक स्तर की है, इसी तरह ग्राम ओरछा ब्लाक में निर्मित शेड की निरीक्षण किया गया । जिले के ग्राम पालकी में निर्मित ओवरहेड टैंक की टीम ने निरीक्षण किया। इसी तरह से जल निर्माण संसाधन विभाग के अंतर्गत बैनूर रिजर्वायरके नवीनीकरण कार्य का निरीक्षण किया गया। टीम ने उपस्थित अधिकारियों से निर्माण कार्यों की विस्तार से जानकारी ली एवं अधिकारियों को जरूरी मार्गदर्शन भी दिया।
नक्सलमुक्त बस्तर में अब विभिन्न निर्माण कार्यों के निरीक्षण करने जांच एजेन्सीयों के दल आसानी से पहुंच रहे हैं। तकनीकी टीमों द्वारा निर्माण कार्यों को कराने स्थानिय अधिकारियों को उचित मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है, जिससे अब अबूझमाड़ में निर्माण कार्य तेजी से किए जाने लगे हैं।
74 राइस मिलर्स को कारण बताओ नोटिस जारी, : इस मामले में लापरवाही बरतने पर हुई कार्रवाई…..
Sat, Apr 25, 2026
रायपुर। अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर ने आज कलेक्ट्रेट परिसर में रायपुर जिले के राइस मिलर्स द्वारा भारतीय खाद्य निगम एवं नागरिक आपूर्ति निगम में कस्टम मिलिंग चावल जमा करने की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि शासन द्वारा चावल जमा करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल निर्धारित की गई है। निर्धारित अवधि में चावल जमा नहीं करने वाले मिलर्स के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर ने बताया कि कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर आदेश के उल्लंघन पर 74 राइस मिलर्स को काली सूची में दर्ज किए जाने, सक्षम न्यायालय में अभियोजन की कार्रवाई करने तथा उनके मिल पंजीयन क्रमांक को ब्लॉक करने की चेतावनी देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
उन्होंने कहा कि अनुबंध के विरुद्ध उठाव किए गए धान के अनुपात में कस्टम मिलिंग चावल जमा नहीं करना छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016 के प्रावधानों का उल्लंघन है, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत दण्डनीय अपराध है।
समीक्षा के दौरान अपर कलेक्टर ने निर्देशित किया कि सूची में शामिल ऐसे 10 राइस मिल, जिनमें सर्वाधिक चावल जमा किया जाना शेष है, उनका भौतिक सत्यापन किया जाए। सत्यापन के दौरान धान की कमी पाए जाने पर संबंधित मिलर्स के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इसके साथ ही जिला विपणन अधिकारी को निर्देशित किया गया कि जिन मिलर्स द्वारा 30 अप्रैल 2026 तक कस्टम मिलिंग चावल जमा नहीं किया जाता है, उनकी राशि की वसूली 01 मई 2026 से बैंक गारंटी के माध्यम से सुनिश्चित की जाए।
अपर कलेक्टर सिंह ने सभी संबंधित अधिकारियों को कहा कि निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए समय-सीमा के भीतर चावल जमा कराने की कार्रवाई पूर्ण करें। इस अवसर पर जिला खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा, सहित अन्य खाद्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।