आंगनबाड़ी में मासूम. : मुस्कानों संग स्नेहिल पल
Mon, May 4, 2026
रायपुर।
कबीरधाम जिले के प्रवास के दौरान आज विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य ग्राम कमराखोल के आंगनबाड़ी केंद्र में नन्हें-मुन्ने बच्चों से मिलकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मन स्नेह और आनंद से भर उठा। उनकी निश्छल मुस्कान और मासूमियत के बीच जैसे अपने बचपन को फिर से जीने का अवसर मिला।
इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश के बच्चों को सुपोषित आहार, गुणवत्तापूर्ण देखभाल एव समुचित प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि जिज्ञासा और सपनों से भरे ये नौनिहाल आने वाले समय में अपने परिवार, समाज, प्रदेश और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के सशक्त आधार बनेंगे।
प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सशक्त और : समृद्ध बनाना ही हमारा संकल्प - सीएम साय
Mon, May 4, 2026
रायपुर।
बलरामपुर स्थित भाजपा कार्यालय में सोमवार को जिला पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सहभागिता कर संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी ली और सरकार की योजनाओं को हर जरूरतमंद तक पहुंचाने में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती के साथ सेवा, सुशासन और विकास के पथ पर चलते हुए प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सशक्त और समृद्ध बनाना ही हमारा संकल्प है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जिले के भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।
एक माह के नवजात का मुख्यमंत्री ने किया नामकरण, : रविशंकर नाम से गूंजा गांव का आंगन
Mon, May 4, 2026
रायपुर।
सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कबीरधाम जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल (ग्राम पंचायत लोखान) में आगमन एक आत्मीय और भावनात्मक प्रसंग का साक्षी बना। आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर जब मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई, तो वहां का वातावरण पूरी तरह से अपनत्व और विश्वास से भर गया। शासन और जनता के बीच की दूरी इस सहज संवाद में पूरी तरह समाप्त होती नजर आई।
इसी दौरान ग्राम की निवासी ऋषि बघेल अपने एक माह के नवजात शिशु को गोद में लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंचीं और अत्यंत विनम्रता से अपने पुत्र का नामकरण करने का आग्रह किया। यह एक साधारण निवेदन था, लेकिन उसमें ग्रामीण जीवन की सादगी, विश्वास और आत्मीय जुड़ाव की गहराई साफ झलक रही थी। मुख्यमंत्री ने भी पूरे स्नेह और संवेदनशीलता के साथ इस आग्रह को स्वीकार किया और बच्चे के जन्म दिवस के बारे में जानकारी ली। जब बघेल ने बताया कि बालक का जन्म रविवार के दिन हुआ है, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उस नवजात का नाम रविशंकर रखा। नामकरण के इस क्षण ने वहां उपस्थित सभी ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी की चमक बिखेर दी। जैसे ही यह नाम घोषित हुआ, पूरा चौपाल स्थल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा और एक उत्सव जैसा माहौल बन गया। यह दृश्य जनप्रतिनिधि और आमजन के बीच गहरे विश्वास का प्रतीक भी बन गया।
इस आत्मीय क्षण ने सुशासन तिहार की मूल भावना को और अधिक सशक्त रूप से प्रस्तुत किया, जहां शासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के जीवन के सुख-दुख में सहभागी बनकर उनके साथ खड़ा होता है। मुख्यमंत्री साय का यह सहज और मानवीय व्यवहार यह दर्शाता है कि सुशासन का वास्तविक अर्थ लोगों के जीवन से जुड़कर उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें सम्मान देना है।