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उज्‍जैन के खड़े हनुमानजी के सामने सारी तकनीकें ध्‍वस्‍त, : अब IIT इंदौर बताएगा क्‍या है वजह, कैसे विस्‍थापित होगी प्रतिमा?

Jagbhan Yadav

Thu, Sep 10, 2026
  • जिस सड़क पर मंदिर है उसकी डिजाइन भी बदली जा सकती है

  • चमत्‍कार या तकनीकी वजह से नहीं हट पा रहे बजरंगबली

  • पूजा-पाठ से लेकर जेसीबी की ताकत सबकुछ लगा लिया, टस से मस नहीं हुए हनुमान

सड़क चौड़ीकरण की जद में आए करीब 170 साल पुराने 'खड़े हनुमान मंदिर' की प्रतिमा के विस्‍थापन के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन क्रेन, जेसीबी और दर्जनों मजदूरों की दिन-रात मेहनत के बाद भी हनुमानजी की प्रतिमा अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिल सकी है। करीब 10 दिनों तक चली तमाम असफल कोशिशों के बाद अब प्रशासन ने तकनीकी विशेषज्ञों का सहारा लिया है। अब जानकारी सामने आ रही है कि इसके विस्‍थापन के लिए आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।

अब तक इस घटना ने इंटरनेट पर सनसनी फैला दी है। बता दें कि क्रेन, हाइड्रोलिक जैक और कई उन्नत मशीनों का उपयोग करने के बावजूद प्रतिमा टस से मस नहीं हुई, जिसके बाद प्रशासन और इंजीनियरों को बैकलॉग पर जाना पड़ा। यह घटना अब पूरे शहर में चर्चा और आस्था का केंद्र बन चुकी है। इसके लिए पूजा-पाठ भी की गई। तय कार्यक्रम के अनुसार पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमा की शिफ्टिंग का काम शुरू किया गया था लेकिन फिर भी प्रतिमा नहीं हटी है। प्रत्यक्षदर्शियों और इंजीनियरों के अनुसार, भारी क्षमता वाली क्रेन का उपयोग करने के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से 1 इंच भी नहीं हिली।

अब क्‍या रास्‍ते हैं प्रशासन के पास : जानकारी है कि तकनीकी विफलता और उफनती जन-आस्था को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल प्रतिमा शिफ्टिंग का काम रोक दिया है।

सड़क के नक्शे (Road Design) में बदलाव : सड़क के सेंट्रल वर्ज (Divider) को इस तरह री-डिजाइन किया जाए कि हनुमान मंदिर डिवाइडर के बीच में सुरक्षित बना रहे और यातायात दोनों तरफ से सुचारू रूप से निकल सके। सिविल स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स और भू-वैज्ञानिकों की टीम को बुलाकर प्रतिमा के आधार (Foundation) की गहराई और संरचना का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और मंदिर के संत-महात्मा मिलकर ऐसे समाधान पर काम कर रहे हैं, जिससे विकास कार्य भी न रुके और धार्मिक आस्था को भी कोई ठेस न पहुंचे। इसके साथ ही खबर यह भी है कि इसके लिए इंदौर के आईआईटी विशेषज्ञों को भी उज्‍जैन बुलाया गया है, जो इसकी पूरी जांच करेंगे।

क्‍या कहते हैं स्‍थानीय पत्रकार :  चर्चा में सामने आया कि प्रतिमा के आसपास की खुदाई को लेकर सावधानी बरत रहा है। उन्‍होंने बताया कि मंदिर के आसपास तो खुदाई हो गई है, अब प्रतिमा को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए उसे आसपास से खोदा जा रहा है। ऐसे में हनुमानजी की प्रतिमा को कोई नुकसान न पहुंचे, मूर्ति को किसी तरह का डैमेज न हो इस बात का खासा ध्‍यान रखा जा रहा है।

कहीं लॉकिंग सिस्‍टम तो नहीं प्रतिमा में : बता दें कि यह दुर्लभ प्रतिमा मालवा के विशेष बेसाल्ट पत्थर से तैयार की गई है, जो परमार काल और राजा भोज के शासनकाल की शिल्पकला को दर्शाती है। प्रशासन पिछले करीब पांच दिनों से इस प्रतिमा को विस्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिमा को यहां लॉकिंग सिस्टम के मुताबिक स्थापित किया गया होगा। प्राचीन काल में लोहे या अन्य आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं होते थे। यही कारण है कि उस समय के इंजीनियर पत्थरों में छेद कर न केवल प्रतिमाओं, बल्कि भव्य मंदिरों का भी निर्माण कर देते थे।

क्यों विस्‍थापित हो रही प्रतिमा : बता दें कि उज्‍जैन के कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक की सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस मार्ग पर प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर है। पिछले कुछ दिनों से प्रतिमा को हटाने के लिए चार बार प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई। मंदिर भवन के गर्भगृह और मुख्य ढांचे को तोड़ा जा चुका है। फिलहाल प्रतिमा को कैनोपी टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। मंदिर के बाहर स्थानीय श्रद्धालुओं ने चेतावनी भरा पोस्टर भी लगाया है। इसमें लिखा है कि प्रतिमा हटाने के दौरान यदि किसी भी तरह से प्रतिमा खंडित होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ऐसे में प्रतिमा को विस्‍थापित करने में प्रशासन अतिरिक्‍त सतर्कता बरता रहा है।

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