: दिल्ली भारत का सबसे प्रदूषित शहर, जानिए सबसे स्वच्छ शहर कौन
Jagbhan Yadav
Fri, Feb 16, 2024
जनवरी में भारत के 10 प्रदूषित शहरों में बिहार के दो, राजस्थान के दो, उत्तर प्रदेश के दो, असम का एक, हरियाणा का एक, हिमाचल प्रदेश का एक और दिल्ली भी रही। तमाम प्रयासों के बावजूद दिल्ली-एनसीआर के 5 प्रदूषित शहर टॉप-10 में शामिल रहे।

जनवरी 2024 में देश के 255 शहरों में सबसे ज्यादा प्रदूषण देश की राजधानी दिल्ली में रहा। इसके बाद दूसरे नंबर पर बिहार का भागलपुर शहर रहा। जनवरी के प्रदूषण की यह आकलन रिपोर्ट सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एनर्जी ने जारी की है। इसके मुताबिक, जनवरी में भारत के 10 प्रदूषित शहरों में बिहार के दो, राजस्थान के दो, उत्तर प्रदेश के दो, असम का एक, हरियाणा का एक, हिमाचल प्रदेश का एक और दिल्ली भी रही। तमाम प्रयासों के बावजूद दिल्ली-एनसीआर के 5 प्रदूषित शहर टॉप-10 में शामिल रहे।
इन शहरों में प्रदूषण के स्तर का आकलन जनवरी 2019 में घोषित राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत किया गया। इसका उद्देश्य देश के 131 शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करना है। जिसके तहत भारत के 271 शहरों में 539 कॉन्टुनियस एम्बियंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए गए थे। इनमें से सिर्फ 255 शहरों में ही जनवरी के लिए 80 फीसदी दिनों का हवा की गुणवत्ता का डाटा उपलब्ध था। जबकि 11 शहरों में तो 20 से कम दिनों का डाटा उपलब्ध था।

देश के 10 सबसे प्रदूषित शहर (जनवरी 2024)
शहर औसत पीएम 2.5 सांद्रता का स्तर
दिल्ली 206
भागलपुर, बिहार 206
सहरसा, बिहार 189
बर्नीहाट, असम 175
ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश 172
हनुमानगढ़, राजस्थान 165
नोएडा, उत्तर प्रदेश 165
बादी, हिमाचल प्रदेश 162
श्री गंगानगर, राजस्थान 159
फरीदाबाद, हरियाणा 159
देश के 10 सबसे कम प्रदूषित शहर (जनवरी 2024)
शहर औसत पीएम 2.5 सांद्रता का स्तर
सतना, एमपी 09
मंडीखेड़ा, हरियाणा 12
गंगटोक, सिक्किम 13
चामराजनगर, कर्नाटक 18
विजयपुरा, कर्नाटक 18
कलबुर्गी, कर्नाटक 19
बागलकोट, कर्नाटक 20
ऐजवाल, मिजोरम 21
सिलचर, असम 22
शिवसागर, असम 23
2023 - 10 में से छह सबसे प्रदूषित शहर बिहार में
शहर पीएम 2.5 की सांद्रता (सालाना औसत)
बेगूसराय 147
दिल्ली 101
सहरसा 90
कटिहार 90
पटना 89
पूर्णिया 89
ग्रेटर नोएडा 87
सिवान 87
पीएम 2.5 की सांद्रता 5 से ज्यादा हानिकारकः डब्ल्यूएचओ
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पीएम 2.5 के लिए पांच माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (सालाना औसत) का मानक तय किया है। डब्लूएचओ के अनुसार इससे ज्यादा दूषित हवा में सांस लेने से बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि इस लिहाज से देखें तो दुनिया के केवल 0.18 फीसदी हिस्से में वायु गुणवत्ता का स्तर इससे बेहतर है। वहीं भारत में दैनिक नेशनल एम्बियंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तय किया गया है।

गौरतलब है कि प्रदूषण के बेहद महीन कणों को पीएम2.5 कहा जाता है, जिनका व्यास आम तौर पर 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटा होता है। यह कण कार या थर्मल पावर प्लांट से उत्सर्जित होने वाले महीन कण होती है। अपने बेहद छोटे आकार की वजह से यह कण सांसों और फेफड़ों में बेहद गहराई तक पहुंच सकते हैं, जिसकी वजह से ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और फेफड़ों की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।
इस कारण बढ़ा प्रदूषण
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर भारत में हवा की कम गति और अपेक्षाकृत ठंडे उत्तर भारत में एक स्थिर वायुमंडल की दशाओं का विकास हुआ। जिसके कारण पृथ्वी की सतह के पास प्रदूषण करने वाले कण ज्यादा मात्रा में बने रहे। इस दौरान वायु का प्रसार नहीं हो सकने के कारण इन इलाकों में प्रदूषण बढ़ गया।

वायु प्रदूषण दिल्ली में बसने में सबसे बड़ी बाधा
भारत में स्थायी ठिकाना बनाने का विचार कर रहे विदेशियों की प्राथमिक चिंता यहां वायु प्रदूषण की समस्या है। जर्मन दूतावास में आर्थिक और वैश्विक मामलों के विभाग के प्रमुख हेंड्रिक सेले ने वायु प्रदूषण पर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि वायु प्रदूषण न केवल लोगों के स्वास्थ्य को बल्कि अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, भारत के संदर्भ में वायु प्रदूषण प्राथमिक कारणों में से एक है और यहां अपना स्थायी ठिकाना बनाने के बारे में सोच रहे विदेशी लोग इस पहलू पर विचार करते हैं। यह ऐसी चीज है, जिसका खतरा हम नहीं मोल सकते हैं।
सेले ने कहा, यह वास्तव में एक बहुत ही महत्वपूर्ण चिंता और बहुआयामी समस्या है, जो अक्सर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के खेल में फंस जाती है। ईंट भट्ठा मजदूर इसका कारण वाहन प्रदूषण बताते हैं, पराली जलाने वाले किसान इसका दोष दूसरे राज्य के किसानों पर मढ़ते हैं…जो हमें नहीं चाहिए। हमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक कार्रवाई की आवश्यकता है।

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