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भारत की विविधता शासन-व्यवस्था में भी झलकती है, : राज्यों के बीच आपसी सीख जरूरी : डॉ. जितेंद्र सिंह

Jagbhan Yadav

Sat, Jul 11, 2026

केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की विविधता केवल समाज और संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी झलक शासन-व्यवस्था में भी दिखाई देती है। इसलिए देश की क्षेत्रीय विविधताओं के अनुरूप बेहतर प्रशासन विकसित करने के लिए राज्यों के बीच निरंतर सीखने और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान की आवश्यकता है। उन्होंने यह बात लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों के फेज-IV मिड-करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम के 21वें दौर के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कही।

पदानुक्रम की बाधाएं तोड़ने पर दिया जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बेहतर शासन-व्यवस्था के लिए प्रशासनिक पदानुक्रम की बाधाओं को कम करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया वरिष्ठता तक सीमित नहीं होनी चाहिए। व्यावहारिक और नवाचार से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव उन अधिकारियों से मिलते हैं, जो नीतियों के क्रियान्वयन के सबसे करीब होते हैं। पूरे करियर के दौरान सीखते रहने की इच्छा ही प्रभावी नेतृत्व की पहचान है।

सरकार और निजी क्षेत्र के रिश्तों में आया बदलाव

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के बीच पारंपरिक दूरी अब सहयोग आधारित मॉडल में बदल रही है। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप और निजी भागीदारी का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार जब केवल नियामक नहीं, बल्कि सहयोगी की भूमिका निभाती है, तब नवाचार को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि भारत तकनीक आधारित प्रगति और नवाचार केंद्रित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय संवेदना भी जरूरी

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ तभी है, जब तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने पारिवारिक पेंशन में नॉमिनेशन को अधिक लचीला बनाने, मृत बच्चे के जन्म (स्टिलबर्थ) के मामलों में मातृत्व लाभ का विस्तार करने और निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने से पहले निधन होने वाले सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को पारिवारिक पेंशन देने से जुड़े नियमों में किए गए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये कदम नागरिक-केन्द्रित और कल्याणकारी शासन की सोच को दर्शाते हैं।

सिविल सेवा प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने पर जोर

उन्होंने सिविल सेवा प्रशिक्षण को समय के अनुरूप लगातार आधुनिक बनाने की आवश्यकता बताई। इसके लिए संस्थागत सहयोग बढ़ाने, संकाय में विविधता लाने और तकनीकी व सामाजिक बदलावों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने पर बल दिया। साथ ही जिलों और मंत्रालयों में कार्यरत युवा अधिकारियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों में संकाय सदस्य के रूप में शामिल करने की भी वकालत की।

प्रशासन में संवाद और फीडबैक की अहम भूमिका

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज के प्रशासनिक अधिकारियों को नागरिकों, मीडिया और जनप्रतिनिधियों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने प्रशिक्षण प्रणाली में संवाद, सहभागिता और प्रशिक्षुओं से व्यवस्थित एवं गुमनाम फीडबैक लेने की व्यवस्था को भी आवश्यक बताया, ताकि पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो सके।

‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में निभाएंगे अहम भूमिका

अपने संबोधन के समापन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की विविधता उसकी शासन प्रणालियों में भी झलकती है, जहां क्षेत्रीय, भाषाई, सांस्कृतिक और प्रशासनिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम से लौटने वाले अधिकारी राज्यों के बीच आपसी सीख को मजबूत करेंगे, नागरिक-केन्द्रित और नवाचार आधारित शासन-व्यवस्था को बढ़ावा देंगे तथा ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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