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गांव की कक्षा से राष्ट्रपति भवन : तक पहुंचीं सुनीता यादव, CM साय ने दी बधाई

Jagbhan Yadav

Sat, Sep 5, 2026

 छत्तीसगढ़ की शिक्षिका को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से किया सम्मानित, नवाचार और जनभागीदारी से बदली ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के एक ग्रामीण स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाली शिक्षिका सुनीता यादव के लिए आज का दिन जीवन का यादगार दिन बन गया। जिस स्कूल में कभी संसाधनों की कमी के बीच बच्चों को पढ़ाने की चुनौती थी, वहीं उन्होंने अपनी पहल, तकनीक और गांव के लोगों की भागीदारी से पढ़ाई का ऐसा माहौल तैयार किया, जिसकी गूंज आज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची। शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया।

सुनीता यादव इस वर्ष छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षिका हैं। देशभर से चुने गए 48 स्कूली शिक्षकों में उनका नाम शामिल है। इन शिक्षकों का चयन जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया से किया गया। इस वर्ष सम्मानित शिक्षकों में 22 महिलाएं और 26 पुरुष शामिल हैं।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुनीता यादव को इस उपलब्धि पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में रहकर बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए उनका समर्पण और नवाचार पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों को प्रदेश के अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी बताया।

अपनी कक्षा को बनाया स्मार्ट, गांव को बनाया भागीदार
सुनीता यादव वर्ष 2008 से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने केवल उपलब्ध सरकारी संसाधनों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं पहल की। अपने स्तर पर संसाधन जुटाए और समुदाय को साथ लेकर स्कूल में स्मार्ट क्लास विकसित की। आज उनके स्कूल में प्रोजेक्टर, लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल आधारित ICT साधनों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जाता है। यानी किताब के पन्नों के साथ अब बच्चे तस्वीरों, वीडियो और डिजिटल सामग्री के जरिए भी विषयों को समझते हैं।

उनकी सोच सीधी है—बच्चे को पढ़ाई रटनी नहीं, समझनी चाहिए
इसीलिए उन्होंने डिजिटल सामग्री, कहानी, ऑडियो-वीडियो और गतिविधि आधारित पढ़ाई को कक्षा का हिस्सा बनाया। कठिन लगने वाले विषयों को बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर समझाने की कोशिश की गई।

‘न्योता भोजन’ से स्कूल और समाज का रिश्ता मजबूत
सुनीता यादव की पहल केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रही। उन्होंने बच्चों के पोषण और स्कूल से समाज के जुड़ाव को भी शिक्षा का हिस्सा बनाया। ‘न्योता भोजन’ जैसी पहल के माध्यम से गांव के लोगों को बच्चों के साथ भोजन साझा करने के लिए जोड़ा गया। स्थानीय स्तर पर शुरू हुई इस सोच ने बाद में व्यापक रूप लिया और ‘न्योता भोजन’ छत्तीसगढ़ में एक जानी-पहचानी पहल बना। इसका संदेश भी सरल है—बच्चे सिर्फ स्कूल की जिम्मेदारी नहीं हैं, पूरा समाज उनकी शिक्षा और विकास में भागीदार बन सकता है।

किताब स्कूल से निकलकर घर तक पहुंची
बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए उन्होंने ‘घर-घर पुस्तक वाचन’ जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया। इसका उद्देश्य बच्चों को पाठ्यपुस्तक से आगे ले जाकर कहानी और किताबों की दुनिया से जोड़ना था।

इसका असर बच्चों की भाषा, पढ़ने की क्षमता और आत्मविश्वास पर दिखाई दिया। कमजोर बच्चों को भी साथ लेकर चलने की कोशिश की गई, ताकि कोई बच्चा केवल इसलिए पीछे न रह जाए क्योंकि उसे शुरुआत में पढ़ाई कठिन लगती है। इन्हीं प्रयासों के कारण उनके विद्यालय में Foundational Literacy and Numeracy (FLN) पर विशेष काम हुआ और विद्यालय को ‘सुघ्घर पढ़इया’ प्लेटिनम ग्रेड की उपलब्धि मिली।

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