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Cabinet: चार मल्टी : ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी, पीएम मोदी ने कहा-कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा

Jagbhan Yadav

Wed, Aug 19, 2026

पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने बुधवार को रेल मंत्रालय की लगभग 9,450 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि इससे आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि कैबिनेट ने चार मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिससे भारतीय रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और लाखों लोगों को फायदा होगा। इन प्रोजेक्ट्स के कई फायदे होंगे, जैसे- यात्री और माल ढुलाई को मजबूत करना, भीड़-भाड़ कम करना, लॉजिस्टिक्स की बेहतर क्षमता और बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापार और पर्यटन।

इन परियोजनाओं में खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन – 173 किमी (पश्चिम बंगाल और ओडिशा), भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन – 75 किमी (ओडिशा), गुम्मिडिपूंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन – 90 किमी (आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु), और कटक-पारादीप (बडाबन्धा) तीसरी और चौथी लाइन – 72 किमी (ओडिशा) शामिल है।

बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। इन बहु-ट्रैकिंग प्रस्तावों से परिचालन के सुव्यवस्थित होने और भीड़भाड़ में कमी आने की उम्‍मीद है। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके लिए रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्‍टी मॉडल कनेक्‍टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश राज्यों के 8 जिलों को कवर करने वाली ये 4 परियोजनाएं भारतीय रेल के वर्तमान नेटवर्क को लगभग 410 किलोमीटर तक बढ़ा देंगी। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 6,448 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 60 लाख है।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिसमें कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, मां भद्रकाली मंदिर, मां धमराई मंदिर, पंचलिंगेश्वर मंदिर, तलसारी-उदयपुर और चांदीपुर समुद्र तट, पुलिकट झील, नेलपट्टू पक्षी अभयारण्य, भगवान वीरराघव पेरुमल मंदिर, गदा कुजंगा जगन्नाथ मंदिर, सरला मंदिर, धबलेश्वर मंदिर, ललितगिरि (बौद्ध स्थल) आदि शामिल हैं।

प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, अनाज आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों से प्रति वर्ष 76 मिलियन टन माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी। भारतीय रेल के पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण यह जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक्‍स लागत को कम करने में सहायक होगी। साथ ही, यह तेल आयात (लगभग 13 करोड़ लीटर) को कम करेगी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (लगभग 65 करोड़ किलोग्राम) को घटाएगी, जो 2.60 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।

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