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भारत : पान मसाला-सिगरेट पर नया टैक्स मंजूर: राष्ट्रीय सुरक्षा फंड मजबूत करने के लिए सरकार का बड़ा कदम, विपक्ष ने जताया कड़ा विर

Jagbhan Yadav

Fri, Dec 5, 2025

लोकसभा में शुक्रवार को सरकार ने नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल पास कर दिया, जिसके लागू होने के बाद पान मसाला, गुटखा और सिगरेट जैसे उत्पाद महंगे हो जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिल पेश करते हुए कहा कि यह सेस किसी भी आवश्यक वस्तु पर नहीं लगाया जाएगा, बल्कि उन हानिकारक उत्पादों पर लागू होगा जो लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस टैक्स से जुटाया गया राजस्व राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों और महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं में उपयोग किया जाएगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि देश की आधुनिक युद्ध—मॉडर्न वॉरफेयर—की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक संसाधनों की जरूरत है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर और अन्य सैन्य अभियानों ने यह साबित किया है कि आधुनिक तकनीक, उपकरण और उच्च स्तर के हथियारों के लिए पर्याप्त फंडिंग अनिवार्य है। सीतारमण ने कहा कि 1990 के दशक की तरह रक्षा तैयारी में कमी की स्थिति दोबारा नहीं आने दी जाएगी, इसलिए इस सेस का उद्देश्य नागरिकों पर बोझ डाले बिना राष्ट्र की सुरक्षा को मजबूत करना है।

बिल पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि 40% जीएसटी के अतिरिक्त पान मसाला उद्योग पर यह नया सेस लगाया जाएगा, जिससे प्राप्त धन राज्यों द्वारा चलाई जा रही विशेष स्वास्थ्य योजनाओं के साथ साझा किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इन हानिकारक उत्पादों की उपलब्धता सस्ती नहीं होनी चाहिए क्योंकि इनके सेवन का सीधा असर देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ता है।

विपक्षी सांसदों, खासकर हनुमान बेनीवाल और अन्य सदस्यों ने इस टैक्स का विरोध किया और इसे वापस लेने की मांग की। बेनीवाल ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब गुटखा-पान मसाला कंपनियां सेलिब्रिटी विज्ञापन करा रही हैं, तो सरकार उन पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही? उन्होंने कहा कि पान मसाला को और महंगा करने का निर्णय गरीब और निम्न आय वर्ग को प्रभावित करेगा।

WHO के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल करीब 10 लाख लोग केवल सिगरेट पीने की वजह से मरते हैं। अगर अन्य तंबाकू उत्पादों के कारण हुई मौतों को भी शामिल किया जाए, तो यह संख्या लगभग 13.5 लाख पहुँच जाती है। भारत में लगभग 25.3 करोड़ लोग धूम्रपान या तंबाकू सेवन करते हैं, जो दुनिया में चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एक सिगरेट जीवन के करीब 20 मिनट घटाती है, जबकि लंबे समय तक धूम्रपान करने पर यह नुकसान कई वर्षों तक बढ़ सकता है।

आर्थिक मोर्चे पर भी तंबाकू-उत्पादों से जुड़े स्वास्थ्य खर्च भारी बोझ डालते हैं, जो शराब और सिगरेट पर मिल रहे टैक्स से कई गुना अधिक है। इसलिए सरकार का मानना है कि हानिकारक उत्पादों पर अतिरिक्त कर लगाकर स्वास्थ्य सेवाओं और रक्षा तैयारी को मजबूत किया जा सकता है।

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