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छत्तीसगढ़ विधानसभा में गिग वर्कर्स पर तीखी बहस : स्विगी-जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले युवाओं को सुरक्षा कवच नहीं, मंत्री ने कहा—केंद्र के नियम का इंतजार

Jagbhan Yadav

Wed, Feb 25, 2026

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान गिग इकोनॉमी में काम कर रहे हजारों युवाओं की सुरक्षा, अधिकार और शोषण का मुद्दा जोर-शोर से उठा। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन से सवाल किया कि स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकइट और रैपिडो जैसी कंपनियों में कार्यरत गिग वर्कर्स को संगठित मजदूरों की श्रेणी में रखा जाएगा या असंगठित में?
विधायक चंद्राकर ने कहा, “गिग वर्कर मर रहे हैं और कंपनियां ऐश कर रही हैं। 10 मिनट की डिलीवरी जैसे दबाव में कई बार जान जा रही है। मानवाधिकार संगठन भी लगातार चिंता जता रहे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग कंपनियों के मामले में भी सरकार ने यही जवाब दिया था कि कोई स्पष्ट कानून नहीं है, और आज गिग वर्कर्स के साथ भी वही स्थिति बनी हुई है।
चंद्राकर ने आगे कहा कि 2020 में सामाजिक सुरक्षा संहिता लागू होने के बावजूद छत्तीसगढ़ में कोई स्पष्ट नियम नहीं बने। उन्होंने बताया कि 2025 में भारत सरकार को नोटिफिकेशन जारी करना पड़ा क्योंकि नियम नहीं बन सके थे, जबकि कई अन्य राज्य अपने स्तर पर नियम बना चुके हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या छत्तीसगढ़ समवर्ती सूची के अधिकार का उपयोग कर गिग वर्कर्स के लिए अलग अधिनियम या नियम बनाने पर विचार करेगा?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सदन में लिखित जवाब देते हुए स्पष्ट किया:
फिलहाल गिग वर्कर्स को न तो संगठित क्षेत्र में रखा गया है और न ही असंगठित क्षेत्र में।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्कर्स को शामिल किया गया है।
जैसे ही भारत सरकार इस संबंध में नियम अधिसूचित करेगी, राज्य सरकार उसका अनुसरण करेगी।
राज्य सरकार ने इस विषय पर एक समिति गठित की थी, लेकिन केंद्र द्वारा चार श्रम संहिताएं लागू करने के बाद राज्य की कार्यवाही केंद्र के अधिनियम के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है।
मंत्री ने दोहराया कि राज्य स्तर पर अलग नियम नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि केंद्र के अधिनियम के अधीन ही आगे बढ़ा जाएगा।
विधायक चंद्राकर ने इस जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि केंद्र के नियम आने में देरी हो रही है, जिसके चलते छत्तीसगढ़ के युवा शोषण का शिकार होते रहेंगे।

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