सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, : ई संवर्ग के लेक्चरर्स को अब मिलेगा प्रमोशन
Thu, Nov 27, 2025
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में ई संवर्ग के 1478 लेक्चरर्स के प्रिंसिपल पद पर पोस्टिंग की कानूनी बाधा दूर हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पोस्टिंग पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
प्रदेश में ई संवर्ग के 1478 व्याख्याताओं को प्राचार्य के पद पर पदोन्नत किया गया है। डीपीआई ने पोस्टिंग के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसी बीच शिक्षक आनंद प्रसाद ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में पदोन्नति और पोस्टिंग पर रोक की मांग की गई थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। इस मुद्दे पर हाईकोर्ट में दायर याचिका में शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में बनाए गए नियमों, तय किए गए मापदंडों को चुनौती दी गई थी। साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पारित 30 अप्रैल 2025 के पदोन्नति आदेश का भी विरोध किया गया था, जिसके तहत याचिकाकर्ता को प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति से वंचित कर दिया गया जबकि उसके कनिष्ठों को पदोन्नति दे दी गई है। याचिकाकर्ता ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी पदोन्नति आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी।
एसईसीएल में 100 करोड़ के मुआवजा : घोटाले मामले में सीबीआई ने इंटक नेता सहित दो पर दर्ज किया केस
Thu, Nov 27, 2025
कोरबा।
केंद्र सरकार के उपक्रम साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में करीब दो वर्ष पूर्व हुए 100 करोड़ के मुआवजा घोटाले में सीबीआइ ने अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। जांच में सामने आया कि श्रमिक संगठन इंटक के जिला अध्यक्ष खुशाल जायसवाल को 1.60 करोड़ रुपये और राजेश जायसवाल को 1.83 करोड़ रुपये कूटरचित तरीके से अधिक मुआवजा दिलाया गया।
एसईसीएल के मेगा प्रोजेक्ट दीपका कोयला खदान के लिए प्रबंधन ने वर्ष 2013 में मलगांव की जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। उस वक्त गांव को खाली नहीं कराया गया था और न हीं मुआवजा दिया गया था। साल 2023 में खदान के विस्तार के लिए जमीन की आवश्यकता पड़ी और प्रबंधन ने अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान मलगांव के प्रभावितों को मुआवजा वितरित किए जाने में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी की गई। जनवरी 2024 में आशीष कश्यप और लोकेश कुमार ने 100 करोड़ रुपये के मुआवजा वितरण के मामले में गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। कोल बेयरिंग एक्ट (सीबीए) की धारा 9 (1) के अनुरूप कम से कम पिछले पांच साल से जो प्रभावित गांव में निवासरत है, वही मुआवजा के लिए पात्र भू-विस्थापित होगा। जांच में पाया गया है कि खुशाल जायसवाल और राजेश जायसवाल ने संपत्ति के मुआवज़े के लिए एक से अधिक बार आवेदन किया। हर बार उसने शपथ पत्र के माध्यम से दावा किया कि उसका यह एकमात्र घर था, इसके अलावा उसके पास कोई अन्य आवास नही है। यानी हर शपथ पत्र में हर बार झूठी जानकारी दी गई। इसके बाद भी एसईसीएल के अधिकारी आंख मूंद कर फर्जी मुआवजा पत्रक तैयार कर खुशाल को उसके वास्तविक मुआवजा से अधिक राशि प्रदान कर दिया गया।
कुछ इसी तरह का खेल राजेश जायसवाल के मुआवजा के प्रकरण में भी किया गया। कुल 3.43 करोड़ रुपये अतिरिक्त मुआवजा दिए जाने की पुष्टि हुई है। सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व धोखाधड़ी की धाराओं के तहत दो नामजद आरोपितों समेत एसईसीएल के अज्ञात अधिकारियों पर मामला दर्ज किया है। इसके पहले दो बार छापेमारी कर जांच पड़ताल की जा चुकी है।