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धर्म : चातुर्मास : भगवान विष्णु के योगनिद्रा काल में अपनाएं ये नियम और उपाय

Jagbhan Yadav

Fri, Jul 24, 2026

Dharm Desk – सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. यह चार महीने की अत्यंत पवित्र अवधि भगवान श्रीहरि विष्णु के योगनिद्रा में रहने का समय होती है. धार्मिक मान्यत के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी तक चातुर्मास चलता है. इस साल यह पावन अवधि 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर तक रहेगी. इस दौरान श्रद्धालु जाप, तप, पूजा, उपवास, दान और ध्यान जैसे धार्मिक कार्यों में विशेष समय देते है. मान्यता है कि भगवान विष्णु के शयनकाल में शादी, गृहप्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित रहते है.

इन चार महीनों में श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना साख हाेती है. जिससे इस अवधि का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है. बधार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास केवल नियमों का पालन करने का ही नहीं, बल्कि आत्मसंयम, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का काल है. कई श्रद्धालु इस अवधि में दिन में एक समय भोजन या फलाहार का नियम अपनाते हैं. नियमित पूजा, घर की स्वच्छता, सकारात्मक विचार और परिवार में आपस में मधुर व्यवहार बनाए रखने से इस पवित्र अवधि का पूरा आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है. घर में सदा सुख, शांति तथा मंगलमय वातावरण बना रहता है.

चातुर्मास में घर की सुख-शांति के लिए वास्तु उपाय

नमक के पानी का छिड़काव: प्रतिदिन पानी में थोड़ा-सा नमक मिलाकर घर में छिड़कने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.

कपूर जलाएं: सुबह या शाम कपूर जलाने से वातावरण पवित्र होता है और मानसिक शांति मिलती है.

मुख्य द्वार पर दीपक: शाम के समय मुख्य द्वार पर घी या तिल के तेल का दीपक जलाने से देवी लक्ष्मी का आगमन और सकारात्मक ऊर्जा आती है.

गंगाजल का छिड़काव: घर में नियमित रूप से गंगाजल या तुलसी युक्त जल का छिड़काव करना अत्यंत शुभ माना जाता है.

चातुर्मास में खान-पान और परहेज के विशेष ध्यान रखें

श्रावण मास: हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करने से बचना चाहिए.

भाद्रपद मास: इस महीने में दही का त्याग करने का विधान है.

आश्विन मास: इस दौरान दूध के सेवन से परहेज करने की सलाह दी जाती है.

कार्तिक मास: प्याज, लहसुन और विशेष रूप से उड़द की दाल का त्याग करना चाहिए.

यात्रा संयम: वर्षा ऋतु में जीव-जंतु सक्रिय होने के कारण अनावश्यक यात्राओं से बचना चाहिए.

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