Tuesday 25th of August 2026

ब्रेकिंग

परियोजना मिनवाखाड़ पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया

एक ही फंदे पर झूल गए युवक-युवती, पास में मिली मोटर साइकिल, मौके पर पहुंची पुलिस….

ईमेल पर 30 मिनट पहले मिलेगी सॉफ्टकॉपी, इसके प्रिंटआउट से ही परीक्षा

नागरिक आपूर्ति निगम ने छुट्टी के दिन कराया भंडारण, हितग्राहियों को मिली राहत

खाद्य तेलों के पैकेट 1 सितंबर से एक लीटर वाले ही मिलेंगे

सुचना

Welcome to the The News India Live, for Advertisement call +91-9406217841, 9407998418

: यादव बंधुओं ने सावन के पहले सोमवार पर काशी विश्वनाथ में किया जलाभिषेक,दशकों पुरानी परंपरा निभाई

यादव बंधुओं ने सावन के पहले सोमवार पर काशी विश्वनाथ में किया जलाभिषेक,दशकों पुरानी परंपरा निभाई

वाराणसी।देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में विश्वनाथ मंदिर में सावन के पहले सोमवार पर अद्भुत परंपरा का निर्वहन किया गया।यहां यादव बंधुओं ने देवाधिदेव महादेव का जलाभिषेक किया।यह परंपरा दशकों पुरानी है। डमरू बजाते और हाथों में जलाभिषेक के लिए बड़े-बड़े कलश लेकर यादव बंधु दल बल के साथ,शिव भक्ति में रमे आगे बढ़ते हुए दिखे। कुछ ने विभिन्न रूप भी बना रखे थे।प्रशासन की अपील थी कि किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए दौड़ लगाकर मंदिर तक न पहुंचे।इसका भी पालन किया गया।

प्रभाकर यादव ने बताया कि यादव समाज द्वारा भगवान शिव को जल चढ़ाने की परंपरा बरसों पुरानी है।जगत कल्याण के लिए यादव समाज के लोग भगवान को जल चढ़ाते हैं। प्रभाकर यादव ने बताया कि मैं खुद पिछले 35 सालों से जल चढ़ाता आ रहा हूं।हम लोग सावन माह के दौरान गंगा से जल लाते हैं और शिव जी को अर्पित करते हैं।

पप्पू यादव ने बताया कि हमारे पूर्वजों से ये परंपरा चली आ रही है।करीब 35 से 40 हजार के बीच भक्तों की संख्या होती है।पहले गंगा घाट जाते हैं और उसके बाद अलग-अलग मंदिरों में जाकर भगवान शिव को जल चढ़ाते हैं। सावन के पहले सोमवार पर हजारों की संख्या में यादव बंधु डमरू बजाते हुए जलाभिषेक करने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर जाते हैं। पप्पू यादव ने बताया कि इस बार भक्तों की संख्या में बदलाव किया गया है।सावन के पहले सोमवार पर काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में सिर्फ 21 यादव बंधुओं को जाने की अनुमति मिली है। इसे लेकर भी कुछ मायूसी दिखी।

बता दें कि जलाभिषेक की ये परंपरा 1932 से शुरू है। बताया जाता है कि उस साल पूरे देश में जबरदस्त सूखा और अकाल पड़ा।उस समय किसी महात्मा ने उपाय सुझाया।महात्मा ने कहा कि काशी में बाबा विश्वनाथ और अन्य शिवालयों में यादव समुदाय की तरफ से जलाभिषेक किया जाए तो सूखे से छुटकारा मिल सकता है तभी से ये परंपरा शुरू हो गई।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें