छत्तीसगढ़ में प्याज के दामों ने बढ़ाई चिंता : एक महीने में थोक कीमतें हुईं दोगुनी
रायपुर : छत्तीसगढ़ में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के घरेलू बजट पर असर डालना शुरू कर दिया है। पिछले एक महीने में प्रदेश में प्याज के थोक भाव में करीब 100 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। 23 जुलाई को जहां प्याज 20 से 22 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रहा था, वहीं 23 अगस्त तक इसकी कीमत बढ़कर 42 से 45 रुपये प्रति किलो पहुंच गई।
इस तेजी का असर अब खुदरा बाजार में भी नजर आने लगा है। प्याज महंगा होने से घरेलू रसोई के साथ होटल, ढाबे और छोटे खाद्य कारोबारियों की लागत भी बढ़ रही है। यदि आने वाले दिनों में मंडियों में प्याज की आवक में सुधार नहीं हुआ, तो कीमतों में और वृद्धि की आशंका बनी हुई है।
प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं। मानसून की अनिश्चितता के कारण खरीफ प्याज की बुआई प्रभावित हुई है। दूसरी ओर, रबी प्याज की आवक अब धीरे-धीरे कम हो रही है। मंडियों में उपलब्धता घटने के कारण मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ गया है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में प्याज का उत्पादन पिछले साल की तुलना में बहुत अधिक कम नहीं है। पिछले साल करीब 307.67 लाख टन उत्पादन हुआ था, जबकि इस साल 307.37 लाख टन उत्पादन का अनुमान है। इसके बावजूद मंडियों में कम आवक के कारण प्याज के भाव लगातार ऊपर जा रहे हैं।
प्रदेश में प्याज की कीमतों में तेजी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 23 जुलाई को थोक बाजार में प्याज 20 से 22 रुपये किलो था। 23 अगस्त को यही भाव बढ़कर 42 से 45 रुपये किलो तक पहुंच गया। यानी महज एक महीने में कीमत लगभग दोगुनी हो गई।
देश की प्रमुख प्याज मंडियों में शामिल नासिक में भी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। करीब एक महीने पहले यहां प्याज का भाव 2,050 रुपये प्रति क्विंटल था। 19 अगस्त को यह बढ़कर 3,750 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया। इसके बाद 20 अगस्त को भाव 3,551 रुपये और 21 अगस्त को करीब 3,600 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
बाजार में प्याज की उपलब्धता घटने के साथ ही जमाखोरी की आशंका भी बढ़ गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मंडियों में आवक सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले कुछ सप्ताह कीमतों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। सरकार भी उन क्षेत्रों और शहरों पर नजर रख रही है, जहां खुदरा बाजार में प्याज की कीमतों में ज्यादा तेजी देखी जा रही है।
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। हालांकि इस साल बफर स्टॉक का लक्ष्य पिछले वर्षों की तुलना में कम है। दो साल पहले सरकार ने पांच लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था, जिसे पिछले साल घटाकर तीन लाख टन किया गया। इस साल खरीद का लक्ष्य सिर्फ दो लाख टन रखा गया है। मई से खरीद शुरू होने के बावजूद जुलाई के अंत तक करीब 1.20 लाख टन प्याज ही खरीदा जा सका था।
अगस्त और सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में तेजी आम तौर पर देखने को मिलती है। इस अवधि में रबी प्याज का स्टॉक कम होने लगता है, जबकि खरीफ सीजन की नई फसल बाजार में पूरी तरह आने में समय लगता है। इस साल मौसम की अनिश्चितता और खरीफ प्याज की बुआई में देरी ने स्थिति को और प्रभावित किया है।
छत्तीसगढ़ में प्याज के थोक भाव पहले ही 40 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच चुके हैं। यदि मंडियों में आवक नहीं बढ़ी और खरीफ प्याज की नई फसल बाजार में आने में और देरी हुई, तो खुदरा कीमतों में भी और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और संभावित जमाखोरी पर निगरानी रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
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