छत्तीसगढ़ NSUI में बड़ा फेरबदल : 48 घंटे में 9 नियुक्तियां रद्द; संगठन में मची हलचल
Jagbhan Yadav
Mon, Aug 24, 2026
रायपुर : छत्तीसगढ़ NSUI में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। 20 अगस्त को जारी आदेश के जरिए चार विधानसभा अध्यक्षों और पांच जिलाध्यक्षों समेत कुल 9 पदों पर नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। हालांकि, नियुक्ति के महज 48 घंटे बाद ही संगठन ने सभी फैसलों को रद्द कर दिया। अचानक नियुक्तियां वापस लिए जाने से NSUI के भीतर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब कुछ महीनों बाद NSUI के चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव से ठीक पहले नियुक्तियों का होना और फिर उन्हें दो दिन के भीतर रद्द कर दिया जाना संगठन के भीतर चल रहे समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।
20 अगस्त के आदेश में पाटन, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ और कांकेर विधानसभा क्षेत्रों के लिए नए विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे। इसके अलावा मुंगेली, बालोद, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बिलासपुर ग्रामीण और बिलासपुर शहर में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी।
इस तरह एक ही आदेश में कुल 9 संगठनात्मक पदों पर नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन 22 अगस्त को नया आदेश जारी कर इन सभी नियुक्तियों को निरस्त कर दिया गया। अब संगठन के भीतर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दो दिनों के भीतर ऐसा क्या हुआ, जिसके चलते पूरा फैसला वापस लेना पड़ा।
NSUI के चुनाव कुछ महीनों बाद होने हैं। ऐसे में जिलाध्यक्ष और विधानसभा अध्यक्ष जैसे पद संगठनात्मक और चुनावी लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यही वजह है कि इन नियुक्तियों और फिर उनके निरस्तीकरण को सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया से अलग नजरिए से देखा जा रहा है।
कांग्रेस के भीतर इसे आगामी चुनावों से जुड़े संगठनात्मक समीकरणों से जोड़कर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से अभी तक इन नियुक्तियों को किसी खास गुट या चुनावी रणनीति से जोड़ने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूथ कांग्रेस के आगामी प्रदेश अध्यक्ष चुनाव को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। पार्टी के भीतर शैलेंद्र बंजारे को देवेंद्र यादव खेमे से जुड़े संभावित दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है।
चर्चा है कि कुछ संगठनात्मक नियुक्तियों को ऐसे नेताओं के संदर्भ में देखा जा रहा था, जिनसे बंजारे को अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की बात कही जा रही थी। इसी कारण NSUI में हुए बदलावों को यूथ कांग्रेस चुनाव के संभावित राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, इन दावों और चर्चाओं की कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
NSUI नियुक्तियों के विवाद ने कांग्रेस के भीतर पुराने राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरणों की चर्चा को भी फिर हवा दे दी है। पार्टी में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव से जुड़े अलग-अलग राजनीतिक खेमों को लेकर चर्चाएं होती रही हैं।
दोनों नेताओं को कभी गुरु-शिष्य के राजनीतिक रिश्ते के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब संगठन और चुनावी राजनीति को लेकर अलग-अलग समीकरणों की चर्चा सामने आती रहती है। हालांकि, मौजूदा NSUI नियुक्तियों में किसी नेता या गुट की प्रत्यक्ष भूमिका होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद NSUI के भीतर कई सवाल चर्चा में हैं—
20 अगस्त को नियुक्तियों का फैसला किस आधार पर लिया गया था?
सिर्फ 48 घंटे बाद ही नियुक्तियां रद्द करने की जरूरत क्यों पड़ी?
क्या नियुक्तियों से पहले संगठन के भीतर पर्याप्त सहमति नहीं बनी थी?
क्या यूथ कांग्रेस के आगामी चुनाव का इन फैसलों पर कोई प्रभाव पड़ा?
क्या संगठनात्मक पदों के जरिए कांग्रेस के अलग-अलग गुट अपने चुनावी समीकरण मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे?
फिलहाल नियुक्तियां रद्द होने के बाद NSUI में आगे क्या रणनीति अपनाई जाएगी और इन पदों पर दोबारा नियुक्तियां कब होंगी, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

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