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लेमनग्रास : किसानों के लिए कम पानी में ज्यादा कमाई का साधन

Jagbhan Yadav

Wed, Apr 22, 2026

अब्दुल कलाम किस्म बनी उम्मीद की नई किरण  

रायपुर-लेमनग्रास की खेती कम पानी, बंजर जमीन और न्यूनतम मेहनत में बंपर मुनाफा देने वाला एक बेहतरीन विकल्प है। इसे एक बार लगाने के बाद 5-6 साल तक कटाई की जा सकती है और इसके तेल की भारी मांग के कारण यह पारंपरिक फसलों की तुलना में 3-4 गुना ज्यादा कमाई देती है। छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत कार्यरत छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड ने कम पानी वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए एक नई पहल शुरू की है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप, बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम और उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने ऐसे किसानों की चिंता जताई है, जिन्हें पानी की कमी के कारण खेती में दिक्कतों और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बोर्ड के सीईओ श्री जे.ए.सी.एस. राव ने जानकारी दी कि पानी की कमी वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए लेमनग्रास की उन्नत अब्दुल कलाम किस्म के पौधे निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही किसानों को इसकी खेती का प्रशिक्षण भी मुफ्त दिया जाएगा। यह फसल कम पानी और कम लागत में अच्छी आय देने वाली कैश क्रॉप साबित हो रही है।  लेमनग्रास की अब्दुल कलाम किस्म को वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया है। इसमें सिट्रल की मात्रा 75 से 80 प्रतिशत तक होती है, जो इसे उच्च गुणवत्ता वाला बनाती है। इस किस्म का उपयोग इत्र, फ्लेवर और सुगंध उद्योग में आवश्यक तेल निकालने के लिए किया जाता है।     यह फसल कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उगाई जा सकती है। इसके लिए बलुई दोमट मिट्टी और अच्छी जल निकासी उपयुक्त रहती है। रोपण के समय पौधों के बीच 40म40 सेंटीमीटर की दूरी रखी जाती है।  लेमनग्रास की यह किस्म न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करती है, बल्कि जल संरक्षण और भूमि सुधार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पृथ्वी दिवस पर जागरूकता अभियान 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस के अवसर पर बोर्ड द्वारा विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत कम पानी वाले क्षेत्रों के किसानों को इस फसल के फायदे बताए जाएंगे और अधिक से अधिक किसानों को इससे जोडऩे का प्रयास किया जाएगा। लेमनग्रास की अब्दुल कलाम किस्म किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल बनकर उभर रही है। यह पहल न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगी, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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