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जशक्राफ्ट से छत्तीसगढ़ : के बांस हस्तशिल्प को मिलेगी नई पहचान

Jagbhan Yadav

Mon, Jul 13, 2026

रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में जिला प्रशासन द्वारा “जशक्राफ्ट” ब्रांड के माध्यम से बांस हस्तशिल्प को नई पहचान देने, स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से विशेष पहल की जा रही है।

विकासखंड जशपुर की ग्राम पंचायत झोलांगा में 29 जून से 29 जुलाई तक एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। जिला पंचायत एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त प्रयास से संचालित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बांस हस्तशिल्प से जुड़े लगभग 150 परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाना है। वर्तमान में 46 महिलाओं का प्रथम बैच प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, नवीन डिजाइनों और वर्तमान बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले बांस उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के सूरत से विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। प्रशिक्षण में फैंसी ट्रे, गुलदस्ते, माचिया, सजावटी सामग्री, चटाई, आकर्षक टोकरियां, फर्नीचर, सोफा, पलंग सहित अनेक आधुनिक एवं उपयोगी उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है।

जशपुर और मनोरा विकासखंड में लगभग 250 परिवार वर्षों से बांस हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इन समूहों को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ), बैंक लिंकेज तथा मुद्रा ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोड़कर उनके उद्यमों को मजबूत बनाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर कौशल उन्नयन एवं उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को रूरल मार्ट, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों तथा देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने के लिए डिजाइन एवं विपणन विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं, ताकि स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सके और उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध हो।

राज्य सरकार की यह पहल पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी वर्ष तक हस्तशिल्प से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को “लखपति दीदी” की श्रेणी में शामिल करना है।

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