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धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पास : मुख्यमंत्री साय बोले—आस्था और संस्कृति की रक्षा का मजबूत कदम

Jagbhan Yadav

Fri, Mar 20, 2026

रायपुर ।  रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के दौरान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के पारित होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के लिए एक अहम और ऐतिहासिक फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि यह कानून राज्य की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा कदम है। साथ ही उन्होंने हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सुख-समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से राज्य के कुछ इलाकों में प्रलोभन, दबाव या डर के जरिए धर्मांतरण की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे सामाजिक संतुलन प्रभावित होता है। नए कानून का उद्देश्य ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाना है और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी धर्म परिवर्तन पूरी तरह स्वेच्छा से और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ही हो।

उन्होंने बताया कि अब धर्मांतरण से पहले संबंधित व्यक्ति और प्रक्रिया से जुड़े लोगों को अधिकृत अधिकारी को पहले से सूचना देनी होगी। इसके बाद आवेदन की जांच की जाएगी और यह देखा जाएगा कि इसमें किसी प्रकार का दबाव या लालच शामिल तो नहीं है। निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी होने के बाद ही धर्मांतरण को वैध माना जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि पहले लागू कानून पर्याप्त प्रभावी नहीं था, जिसके कारण कई बार नियमों का दुरुपयोग हुआ। लेकिन नए प्रावधानों में सख्ती बढ़ाई गई है और उल्लंघन करने पर कड़ी सजा और जेल का प्रावधान रखा गया है, जिससे अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।

उन्होंने विधानसभा में इस मुद्दे पर विपक्ष के रुख पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर चर्चा में भाग लेना जरूरी होता है, ताकि समाजहित में बेहतर सुझाव सामने आ सकें।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने दिलीप सिंह जूदेव को याद करते हुए उनके धर्मांतरण विरोधी अभियान को प्रेरणादायक बताया और कहा कि समाज की जागरूकता और सहयोग से ही ऐसे बदलाव संभव हो पाते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि यह नया कानून प्रदेश में सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और शांति को और मजबूत करेगा।


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