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नवा रायपुर जंगल सफारी : में दिखा भारत का सबसे छोटा कठफोड़वा

Jagbhan Yadav

Thu, Jun 18, 2026

00 बॉटेनिकल गार्डन में ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर की दुर्लभ मौजूदगी दर्ज
00 जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को मिली नई पहचान

रायपुर। नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी के बॉटेनिकल गार्डन में पक्षी प्रेमियों और प्रकृति संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए एक सुखद समाचार सामने आया है। हाल ही में आयोजित बर्ड वॉक के दौरान वन्यजीव छायाकारों ने भारत के सबसे छोटे कठफोड़वों में से एक ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर को कैमरे में कैद किया। तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में इस दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

संरक्षित हरित क्षेत्र बन रहा वन्यजीवों का सुरक्षित आश्रय
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में नवा रायपुर का जंगल सफारी और बॉटेनिकल गार्डन जैव विविधता संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। यहां विकसित हरित वातावरण और संरक्षण उपायों के कारण अनेक पक्षी एवं वन्यजीवों को सुरक्षित आवास मिल रहा है। दुर्लभ पक्षियों की बढ़ती उपस्थिति इन प्रयासों की सफलता को दर्शाती है।
क्या है ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर की विशेषता
ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर भारत के सबसे छोटे कठफोड़वों में शामिल है। इसकी लंबाई लगभग 13 से 15 सेंटीमीटर होती है। यह पक्षी पेड़ों की छाल पर बेहद फुर्ती से चढ़ता-उतरता है और अपनी विशिष्ट गतिविधियों के लिए जाना जाता है। इसके सिर पर भूरे रंग का मुकुटनुमा भाग तथा शरीर पर काले-सफेद धब्बेदार पंख होते हैं, जो इसे आकर्षक और आसानी से पहचानने योग्य बनाते हैं।
पेड़ों का प्राकृतिक संरक्षक
यह छोटा पक्षी पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अपनी नुकीली चोंच की सहायता से यह पेड़ों की छाल में छिपे हानिकारक कीटों और लार्वा को खाकर पेड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसी कारण इसे पेड़ों का प्राकृतिक संरक्षक भी कहा जाता है।
जैव विविधता संरक्षण की सफलता का प्रमाण
आमतौर पर यह पक्षी घने और शांत जंगलों में पुराने वृक्षों पर पाया जाता है। शहरी क्षेत्र में इसकी उपस्थिति यह दर्शाती है कि जंगल सफारी और बोटेनिकल गार्डन में विकसित पारिस्थितिकी तंत्र वन्यजीवों के लिए अनुकूल बन रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि प्रकृति संरक्षण और हरित विकास के प्रयासों की सफलता का प्रमाण है।
प्रकृति संरक्षण के प्रति बढ़ेगी जागरूकता
ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर का यह रिकॉर्ड न केवल छत्तीसगढ़ की पक्षी विविधता को समृद्ध करता है, बल्कि आम नागरिकों को भी पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा देता है।

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