महतारी के आशीष और राखी : के विश्वास से मजबूत हो रही नारी शक्ति, महिलाओं के सम्मान और स्वावलंबन को सरकार की प्राथमिकता
Jagbhan Yadav
Mon, Aug 31, 2026
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान मातृशक्ति के सम्मान और नारी शक्ति के प्रति आदर की परंपरा से जुड़ी रही है। मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी की आस्था से लेकर माता कौशल्या की धरती तक, मातृशक्ति प्रदेश के सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और स्वावलंबन को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का संचालन कर रही है। वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाया जाना इसी दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सरकार के 30 माह के कार्यकाल में महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। योजना के तहत प्रदेश की करीब 68 लाख विवाहित महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खातों में दी जा रही है। इससे महिलाओं को अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ परिवार के आर्थिक निर्णयों में भी अधिक भागीदारी का अवसर मिल रहा है।
रक्षाबंधन से पहले राज्य सरकार ने महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि भी महिलाओं के खातों में अंतरित की। 25 अगस्त को बालोद जिले में आयोजित कार्यक्रम में करीब 68 लाख महिलाओं के बैंक खातों में लगभग 631 करोड़ रुपये की राशि पहुंचाई गई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश की माताओं और बहनों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे अपने छोटे-बड़े फैसले स्वयं ले सकें और त्योहारों को पूरे उत्साह और सम्मान के साथ मना सकें। वहीं रायपुर में आयोजित ‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में स्कूली बेटियों, दिव्यांग बेटियों और महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने केंद्रीय सुरक्षा बलों, सेना और पुलिस के जवानों की कलाइयों पर रक्षा सूत्र बांधा। कार्यक्रम के दौरान शहीद उपनिरीक्षक युगल किशोर वर्मा की पत्नी माधुरी वर्मा ने मुख्यमंत्री की कलाई पर राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने इसे शहीद परिवार के विश्वास और अपनत्व का प्रतीक बताया तथा कहा कि नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ प्रदेश की बहनों के लिए सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से भी लगातार काम किया जा रहा है। प्रदेश में 2 लाख 42 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों से करीब 30 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। वहीं लखपति दीदी अभियान के तहत महिलाओं को स्वरोजगार और आय के स्थायी साधनों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है और प्रदेश में 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिला समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय स्तर पर विभिन्न उत्पादों का निर्माण और उनका विपणन कर आय अर्जित कर रही हैं। महतारी वंदन योजना, महिला स्व-सहायता समूह और लखपति दीदी जैसे प्रयासों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी भी बढ़ रही है। रक्षाबंधन से पहले सहायता राशि मिलने पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की महिलाओं ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए उन्हें बड़े भाई के रूप में सम्मान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान, स्वावलंबन और समृद्धि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और नारी शक्ति को विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन