Saturday 31st of October 2026

ब्रेकिंग

राज्य सरकार का बड़ा निर्णय, प्रदेश में 360 नए धान उपार्जन केंद्रों को स्वीकृति

, नगरीय प्रशासन विभाग ने निकायों को जारी किए 164.65 करोड़ रुपए

डिजिटल व्यवस्था से घर के पास मिल रहीं सुविधाएं

बद्रीनाथ से देहरादून जा रहा हेलीकॉप्टर क्रैश, पायलट समेत 6 लोगों की मौत

पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचें, नोट करें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूरा पंचांग

सुचना

Welcome to the The News India Live, for Advertisement call +91-9406217841, 9407998418

नैनो उर्वरक : छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी में आई नई क्रांति

Jagbhan Yadav

Wed, Jul 1, 2026

किसान भाईयों को कम लागत में होगी अधिक पैदावारी

 तेजबहादुर सिंह भुवाल,  सहा. जनसंपर्क अधिकारी

रायपुर -छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है और किसानों की समृद्धि राज्य के विकास से सीधे जुड़ी हुई है। बदलते समय के साथ खेती में नई तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है, जिनमें नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में उभरा है। कम लागत, अधिक प्रभाव और पर्यावरण संरक्षण जैसे गुणों के कारण नैनो उर्वरक आज किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा हैं।

नैनो उर्वरक अत्यंत सूक्ष्म कणों से निर्मित होते हैं, जिन्हें पौधे तेजी से और अधिक मात्रा में अवशोषित कर लेते हैं। इसके कारण पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं और फसलों का विकास बेहतर तरीके से होता है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनकी मात्रा कम लगती है, जिससे किसानों का खर्च घटता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।

छत्तीसगढ़ में धान, मक्का, चना, अरहर तथा सब्जी फसलों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। प्रदेश में कई किसानों ने अनुभव किया है कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसल की पैदावार बेहतर होती है, पौधे अधिक हरे-भरे रहते हैं और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

नैनो उर्वरकों का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़ता है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जहां भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं नैनो उर्वरक संतुलित पोषण प्रदान कर मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करते हैं। साथ ही जल स्रोतों में रासायनिक तत्वों के बहाव को भी कम करते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।

परिवहन और भंडारण की दृष्टि से भी नैनो उर्वरक काफी सुविधाजनक हैं। पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की जगह छोटी बोतलों में उपलब्ध नैनो उर्वरक किसानों के लिए आसानी से ले जाने और उपयोग करने योग्य होते हैं। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोडऩे के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे उन्नत उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर खेती को अधिक उत्पादक, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और नवाचार आधारित खेती ही भविष्य की कृषि का आधार है। नैनो उर्वरकों का उपयोग न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी बढ़ावा देगा।

छत्तीसगढ़ सरकार तथा कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं। इसी क्रम में माननीय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय जी ने भी राज्य के किसानों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और नवीन तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं। उन्होंने किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक होने तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इनका प्रयोग करने का आग्रह किया है, ताकि उत्पादन बढ़े, लागत घटे और किसानों की आय में वृद्धि हो सके।  

वर्तमान में कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बीच नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आए हैं। यह तकनीक कम खर्च में बेहतर उत्पादन, स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि छत्तीसगढ़ के किसान वैज्ञानिक सलाह और संतुलित उपयोग के साथ नैनो उर्वरकों को अपनाते हैं, तो आने वाले समय में यह राज्य की कृषि उन्नति और किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है। निस्संदेह, नैनो उर्वरक छत्तीसगढ़ के किसान भाइयों के लिए आधुनिक खेती का नया वरदान साबित हो सकता है।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें