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नक्सलवाद के खात्मे के बाद बदली तस्वीर : अब गांव से शहर तक आसान हुआ सफर, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना बनी ग्रामीणों के लिए

Jagbhan Yadav

Wed, Apr 8, 2026

रायपुर: कभी नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जिन गांवों के लोग अपने ही क्षेत्र में सीमित रहने को विवश थे, आज वही ग्रामीण निर्भय होकर शहरों तक आवागमन कर रहे हैं। माओवाद के खात्में और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने के साथ-साथ शासन की जनहितकारी योजनाओं ने सुकमा जिले के दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है।

इसी परिवर्तन का सशक्त उदाहरण मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के रूप में सामने आया है, जिसने वनांचल और अंदरूनी क्षेत्रों के जनजीवन को नई गति प्रदान की है। सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम लखापाल, केरलापेंदा और नागाराम सहित आसपास के गांवों के लिए अब दोरनापाल तक पहुंचना सहज और सुरक्षित हो गया है।

पूर्व में ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए 8 से 10 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। ग्राम लखापाल के निवासी श्री कूड़ाम जोगा बताते हैं कि बस सेवा प्रारंभ होने से पहले चिंतलनार तक पैदल जाना उनकी मजबूरी थी। कई बार बस छूट जाने के कारण पूरा दिन व्यर्थ चला जाता था और आवश्यक कार्य अधूरे रह जाते थे। अब दोरनापाल-नागाराम मार्ग पर नियमित बस सेवा प्रारंभ होने से यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है।

अब गांव से शहर तक आसान हुआ सफर

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के अंतर्गत संचालित बस सेवा अब पोलमपल्ली, कांकेरलंका, चिंतागुफा, चिंतलनार, लखापाल, केरलापेंदा और नागाराम जैसे गांवों के समीप से गुजर रही है। इससे ग्रामीण अब आसानी से बस के माध्यम से दोरनापाल पहुंचकर अपने दैनिक कार्य समय पर पूर्ण कर रहे हैं और उसी दिन सुरक्षित वापस भी लौट पा रहे हैं। यह सुविधा विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, विद्यार्थियों एवं श्रमिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है।

जहां पहले नक्सलियों के भय के कारण ग्रामीणों का बाहर निकलना भी कठिन था, वहीं अब सुरक्षा वातावरण में सुधार के चलते वे निर्भय होकर रोजगार, व्यापार, शिक्षा और उपचार के लिए शहरों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। बस सुविधा ने न केवल आवागमन को सुगम बनाया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान की है।

इरकमपल्ली निवासी  मोहनरंजन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। इससे न केवल कनेक्टिविटी बढ़ी है, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिला है।
कलेक्टर  अमित कुमार के अनुसार, पूर्व में नक्सल प्रभावित एवं दूरस्थ क्षेत्रों में वर्तमान में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 10 बसों का संचालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 5 ‘हक्कुम मेल’ बसें भी नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। बस संचालन को प्रोत्साहित करने हेतु शासन द्वारा सब्सिडी प्रदान की जा रही है तथा तीन वर्षों के लिए रोड टैक्स में छूट भी दी गई है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना अब केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि सुकमा जिले के ग्रामीण अंचलों में विश्वास, सुरक्षा और विकास का प्रतीक बन चुकी है। नक्सलवाद के अंधकार से निकलकर यह क्षेत्र अब प्रगति और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर अग्रसर है, जहां हर सफर अब नई संभावनाओं की ओर ले जा रहा है।

 

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