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छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण : ने किया किसान सम्मेलन का आयोजन

Jagbhan Yadav

Sat, May 9, 2026

रायपुर। छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण रायपुर ने राष्ट्रीय शर्करा संस्थान कानपुर के सहयोग से बायोफ्यूल कॉम्प्लेक्स गोढ़ी (दुर्ग) में किसान सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गन्ना आधारित खेती में सफेद चुकंदर (शुगरबीट) को अंतरफसली के रूप में अपनाकर भूमि उपयोग दक्षता बढ़ाना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना था। इस दौरान किसानों को शुगरबीट की खेती का प्रत्यक्ष भ्रमण कराया गया एवं फसल की खुदाई भी की गई, जिसमें शुगरबीट का औसत वजन लगभग 3.7 किलोग्राम पाया गया, जो इसकी सफल खेती की संभावनाओं को दर्शाता है।

मुख्य अतिथि राष्ट्रीय शर्करा संस्थान कानपुर की निदेशक डॉ. सीमा परोहा ने कहा कि गन्ना-शुगरबीट अंतरफसली खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का व्यवहारिक विकल्प है। इस तकनीक का सफल परीक्षण राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र में किया जा चुका है छत्तीसगढ़ में सीबीडीए के सहयोग से इसका प्रथम क्रियान्वयन हुआ है, जिसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।

सीबीडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित सरकार ने बताया कि नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट के सहयोग से राज्य में पहली बार गन्ना एवं सफेद चुकंदर (शुगरबीट) की अंतरफसली खेती पर अनुसंधान प्रारंभ किया गया है। शुगरबीट लगभग 5-6 माह में तैयार हो जाती है और इसे गन्ने के साथ उगाकर अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे बायोएथेनॉल उत्पादन हेतु अतिरिक्त कच्चा माल उपलब्ध होगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

सहायक परियोजना अधिकारी श्री संतोष कुमार मैत्री ने बताया कि राज्य में पहली बार गन्ना एवं शुगरबीट की अंतरफसली खेती पर ग्राम गोढ़ी में अनुसंधान प्रारंभ किया गया है। राष्ट्रीय शर्करा संस्था से प्राप्त उन्नत किस्म के माध्यम से किए गए इस अध्ययन के प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं, विशेषकर मुरुम भूमि में इसकी सफलता ने किसानों के लिए नई संभावनाएं खोली हैं।

सहायक प्राध्यापक डॉ. लोकेश बाबर ने किसानों को शुगरबीट की खेती अपनाने हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि यह कम लागत में अधिक लाभ देने वाली तकनीक है। कार्यक्रम के दौरान डॉ. सीमा परोहा ने प्राधिकरण के परिसर स्थित हर्बेरियम एवं आर्बोरेटम का भ्रमण किया तथा ऊर्जा फसल नेपियर घास के क्षेत्र का अवलोकन किया, जिससे कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन की संभावनाएं हैं।

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