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5 शिक्षकों की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट की रोक : कहा-बिना विभागीय जांच के सेवा से अलग करना गलत

Jagbhan Yadav

Wed, Jan 28, 2026

बिलासपुर। हाई कोर्ट के फैसले से सबीजश्कों को राहत मिकी है 5 शिक्षकों की बर्खास्तगी पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दिया है। कोर्ट ने कहा-बिना विभागीय जांच के सेवा से अलग करना गलत है।

मामले कि सुनवाई करते हुए जस्टिस पीपी साहू ने कहा कि, बिना विभागीय जांच के किसी भी शासकीय कर्मचारी को सेवा से अलग नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने धमतरी जिले के मगरलोड जनपद पंचायत के पांच शिक्षकों की बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दी है। बता दें कि, फर्जी नियुक्ति के आरोप में इन शिक्षकों को

ईश्वरी निर्मलकर और पांच अन्य शिक्षकों की नियुक्ति जनपद पंचायत मगरलोड में साल 2007 में शिक्षा कर्मी वर्ग-3 के पद पर हुई थी। जिसके बाद प्रावधान के अनुसार साल 2009 में उन्हें नियमित किया गया। इस बीच साल 2018 में शासन के आदेश पर उनका संविलयन स्कूल शिक्षा विभाग में किया गया। जिसके बाद उन्हें साल 2023 में प्राइमरी स्कूल में हेडमास्टर के पद पर पदोन्नत किया गया।

इन शिक्षकों के खिलाफ छत्तीसगढ़ राज्य लोक आयोग में की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनकी नियुक्ति की गई है। इस शिकायत पर लोक आयोग ने केस दर्ज किया, जिसके बाद साल 2011 में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।

2025 में याचिकाकर्ताओं को आरोपी बनाकर कोर्ट में पूरक चालान पेश किया गया। यह मामला अभी ट्रायल कोर्ट में लंबित है। इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर नियुक्ति करने के आरोप में डीईओ ने उन्हें शो कॉज नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा, जिसका उन्होंने जवाब भी दिया और बताया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार है। लेकिन, डीईओ ने 6 जनवरी को उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया।

पीड़ित शिक्षकों ने एडवोकेट प्रतीक शर्मा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जिसमें डीईओ के बर्खास्तगी आदेश को चुनौती दी गई। याचिका में बताया गया कि छत्तीसगढ़ सिविल सर्विस क्लासिफिकेशन कंट्रोल एंड अपील रूल्स 1966 के नियम 14 के उल्लंघन के आधार पर पारित किया गया है। जिसमें यह बंधनकारी व्यवस्था दी है कि किसी भी शासकीय सेवक को बिना विभागीय जांच के शासकीय सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता है। इस मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने डीईओ को नोटिस किया गया है। साथ ही उनकी तरफ से जारी बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दिया है।

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