मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना : लाखों उपभोक्ताओं को राहत देने वाली जनहितैषी पहल
Thu, May 7, 2026
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आम जनता को राहत पहुंचाने और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 लागू की गई है। यह योजना घरेलू, बीपीएल एवं कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल के भुगतान में राहत देने के साथ-साथ आसान समाधान उपलब्ध करा रही है।
योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल का भुगतान एकमुश्त अथवा आसान किस्तों में करने की सुविधा दी गई है। विशेष बात यह है कि 31 मार्च 2023 तक के बकाया बिजली बिलों पर 100 प्रतिशत सरचार्ज माफी का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक राहत मिल रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी उपभोक्ता आर्थिक कारणों से बिजली सुविधा से वंचित न रहे। इसी सोच के साथ योजना को सरल और सुलभ बनाया गया है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए उपभोक्ताओं का पंजीयन अनिवार्य रखा गया है।
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए पंजीयन की व्यवस्था विभिन्न माध्यमों से उपलब्ध कराई गई है। उपभोक्ता मोर बिजली एप, ष्टस्क्कष्ठष्टरु की आधिकारिक वेबसाइट, नजदीकी बिजली कार्यालय तथा विशेष पंजीयन शिविरों के माध्यम से आसानी से अपना पंजीयन करा सकते हैं। यह योजना 12 मार्च 2026 से लागू है तथा योजना का लाभ लेने की अंतिम तिथि 30 जून 2026 निर्धारित की गई है। अब तक लाखों उपभोक्ता योजना से जुड़ चुके हैं और बड़ी संख्या में प्रकरणों का निराकरण कर उपभोक्ताओं को करोड़ों रुपए की राहत प्रदान की जा चुकी है। आंकड़ों की बात करें तो अब तक प्रदेश के 07 लाख 24 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लेने के लिए पंजीयन कराया है। 1 लाख 63 हजार प्रकरणों का निराकरण कर कुल 06 करोड़ 22 लाख रूपये से अधिक की राहत प्रदान की जा चुकी है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और आम नागरिकों को राहत पहुंचाने वाली योजनाओं को प्राथमिकता के साथ लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 इसी जनहितकारी सोच का परिणाम है, जो लाखों उपभोक्ताओं के जीवन में राहत और विश्वास लेकर आई है।
सेवा सेतु: छत्तीसगढ़ में सुशासन और : डिजिटल प्रशासन का नया अध्याय
Thu, May 7, 2026
विशेष लेख : नितेश चक्रधारी (सहायक जनसंपर्क अधिकारी)
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में सेवा सेतु एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को आम नागरिकों तक सरल,त्वरित और डिजिटल माध्यम से पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी सोच का परिणाम है कि अब आय,जाति, निवास प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन, राशन कार्ड, भू-न$कल सहित 441 से अधिक शासकीय सेवाएं एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
डिजिटल सुशासन का प्रभावी माध्यम
पहले नागरिकों को अलग-अलग विभागों की सेवाओं के लिए विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। प्रमाण-पत्र बनवाने जैसी मूलभूत सेवाओं में समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बड़ी खपत होती थी। सेवा सेतु ने इस पारंपरिक व्यवस्था को बदलते हुए नागरिकों को वन स्टॉप सॉल्यूशन उपलब्ध कराया है। अब लोग ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर रहे हैं और निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। राज्य शासन की यह पहल केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का भी संकेत है। यह व्यवस्था नागरिकों को यह भरोसा दिला रही है कि शासन उनकी सुविधा और अधिकारों को प्राथमिकता दे रहा है।
86 से बढ़कर 441 सेवाएं
छत्तीसगढ़ में पहले ई-डिस्ट्रिक्ट प्लेटफॉर्म के माध्यम से केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं। समय की आवश्यकता को देखते हुए इसका उन्नत संस्करण सेवा सेतु विकसित किया गया,जिसमें अब 441 सेवाएं जोड़ी जा चुकी हैं। इनमें 54 नई सेवाएं शामिल हैं, जबकि विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का भी सफल एकीकरण किया गया है। 30 से अधिक विभाग इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल या कार्यालयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनी हैं।
समयबद्ध सेवा का भरोसा
छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत नागरिकों को निर्धारित समय-सीमा में सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। सेवा सेतु इसी अधिकार को व्यवहारिक रूप से मजबूत कर रहा है। पिछले 28 महीनों के आंकड़े इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। इस अवधि में 75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामलों का निराकरण किया गया। इनमें 95 प्रतिशत से अधिक आवेदन तय समय-सीमा में निपटाए गए। यह आंकड़ा प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
प्रमाण-पत्र सेवाओं की सबसे अधिक मांग
चिप्स कार्यालय के अनुसार सबसे अधिक आवेदन आय प्रमाण-पत्र के रहे, जिनकी संख्या 32 लाख से अधिक है। इसके अलावा मूल निवास प्रमाण-पत्र, अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण-पत्र, अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रमाण-पत्र, विवाह प्रमाण-पत्र और भू-न$कल संबंधी सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर उपयोग हुआ है। यह दर्शाता है कि नागरिकों की दैनिक जरूरतों से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल माध्यम में लाना कितना आवश्यक था। अब ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोग भी कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केंद्र और इंटरनेट आधारित सेवाओं के माध्यम से सुविधाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।
व्हाट्सएप तक पहुंची सरकारी सेवाएं तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए अब सेवा सेतु की सेवाओं को व्हाट्सएप से भी जोड़ा गया है। इससे लोगों को जानकारी प्राप्त करने और सेवाओं तक पहुंचने में और अधिक सुविधा मिल रही है। अब तक 3.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जा चुके हैं। यह कदम डिजिटल इंडिया की अवधारणा को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल
सेवा सेतु केवल एक पोर्टल नहीं, बल्कि नागरिक और शासन के बीच भरोसे का नया सेतु बनता जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो प्रणाली के कारण आवेदन प्रक्रिया की निगरानी संभव हुई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और अनावश्यक विलंब में कमी आई है। राज्य सरकार की यह पहल प्रशासनिक सुधार, तकनीकी नवाचार और नागरिक सुविधा का समन्वित उदाहरण है। यदि इसी गति से सेवाओं का विस्तार और गुणवत्ता सुधार जारी रहा, तो सेवा सेतु आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।
डिजिटल युग में सुशासन का अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर और सरल तरीके से जनता तक पहुंचाना है। सेवा सेतु इसी सोच को साकार कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म छत्तीसगढ़ में प्रशासन को अधिक मानवीय, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। निश्चित रूप से सेवा सेतु आने वाले वर्षों में राज्य की डिजिटल प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
85 लाख में बनी मोला लव होगे : कल 45 सिनेमाघरों में होगी रिलीज
Thu, May 7, 2026
00 बस्तर की वादियों में बनाएंगे अगली फिल्म - अनुमोद
रायपुर।
अनुमोद फिल्मस के बैनर तले 85 लाख रुपये की लागत से बनी छत्तीसगढ़ी फिल्म मोला लव होगे राजधानी रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के 45 सिनेमाघरों में 8 मई को रिलीज होने जा रही है। फिल्म का प्रीमियर शो सुबह 9 बजे रखा गया है। निर्माता निर्देशक अनुमोद राजवैद्य के अनुसार यह फिल्म छत्तीसगढ़ की सबसे अलम रोमांटिक और पारिवारिक फिल्म होगी। फिल्म में नए-नए कलाकार डेब्यू कर रहे हैं, जैसे नायक के रूप में है छत्तीसगढ़ के नवोदित सुपरस्टार आयुष राजवैद्य जो छत्तीसगढ़ समेत राष्ट्रीय स्तर पर अपने अभिनीत नाटकों के जरिए पहले ही अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करवा चुके हैं। फिल्म की नायिका है भानुप्रतापपुर की तिरांजली गोस्वामी जिनकी नायिका के रोल में यह पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म है। अनुमोद ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि इस फिल्म के बाद वे बस्तर की खुबसूरत वादियों को लेकर बहुत जल्द ही फिल्म का निर्माण करने जा रहे जिसकी शूटिंग जल्द ही शुरु होगी।
अनुमोद ने कहा कि बिदाई के बाद यह दूसरी फिल्म है जबकि अनुमोद फिल्म्स के बैनर तले मोला लव होगे पहली फिल्म है। फिल्म के तीन गीत डोंट टचमाय गगरी, मोला मुम्बई घुमा दे राजा और नैना रे नैना को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है और फिल्म के रिलीज होने के बाद तीन और गानों को कल यूट्यूब पर रिलीज कर दिया जाएगा। फिल्म मोला लव होगे एक ऐसे युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है जो पढ़ा लिखा है और उसके बावजूद उसकी जड़ें पूरी तरह से अपने परिवार से जुड़ी हुई हैं। फिल्म में रोमांस, एक्शन, कॉमेडी, थ्रिल, सस्पेंस सभी कुछ है और फिल्म विशुद्ध रूप से पारिवारिक फिल्म है जिसे छत्तीसगढ़ की जनता अपने परिवार व बच्चों के साथ बैठकर आराम से देख सकती है।
फिल्म में छत्तीसगढ़ के सुपरस्टार करन खान, रजनीश झांझी, संजय महानंद, पुष्पेंद्र सिंह, जागेश्वरी मेश्राम, विक्रम राज जैसे जाने-माने दिग्गज कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। छत्तीसगढ़ी फिल्मों के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर नए और पुराने कलाकारों का संगम देखने को मिलेगा। छत्तीसगढ़ी फिल्मों के इतिहास में विगत 26 वर्षों में यह पहला अवसर होगा जिसमें सुपरस्टार करन खान और छत्तीसगढ़ के सशक्त अभिनेता रजनीश झांझी एक दूसरे के साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मों के भीष्म पितामह मोर छइंहा भूइहां, झन भूलौ मां बाप ला जैसी फिल्मों के निर्माता निर्देशक सतीश जैन पहली बार अपने होम प्रोडक्शन के अलावा अनुमोद फिल्मस की फिल्म मोला लव होगे का डिस्ट्रीब्यूशन कर रहे हैं। ये ऐसी खास बात है जो छत्तीसगढ़ की जनता को इस फिल्म को देखने के लिए मजबूर करती है।
इस फिल्म का पिक्चराइजेशन पूर्णत: छत्तीसगढ़ में ही किया गया है। फिल्म 8 मई को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की श्याम टॉकीज समेत सभी मल्टीप्लेक्स में और छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख्य शहरों में एक साथ रिलीज होने वाली है।
छत्तीसगढ़ के इन सिनेमाघरों में होगी रिलीज
1. श्याम टॉकिज - रायपुर
2. पीवीआर सिटी सेंटर- रायपुर
3. मेग्नेटो मॉल- रायपुर
4. कलर्स मॉल- रायपुर
5. अम्बुजा मॉल- रायपुर
6. मिराज - नया रायपुर
7. के सेरा सेरा- दुर्ग
8. अप्सरा - दुर्ग
9. चन्द्रा आर एल आर-भिलाई
10. श्री कृष्णा - राजनांदगांव
11. देवश्री - धमतरी
12. मां कर्मा - कसडोल
13. रामनिवास - रायगढ़
14. मां भुवनेश्वरी- कवर्धा
15. ई ओ स - कवर्धा
16. मुकुंद- चांपा
17. पद्मीनी- चांपा
18. डी एल - अकलतरा
19. मेट्रो- जांजगीर
20. सिटी - सारंगढ़
21. ए के सिनेमा - घरघोड़ा
22. रामा मेट्रो- शिवरीनारायण
23. सिटी सिनेमा - बाघबाहरा
24. सिटी सिनेमा- बसना
25. रतन टॉकिज - बेमेतरा
26. श्री विठोबा- महासमुन्द
27. कृष्णा - शक्ति
28. श्री महल- भटगांव
29. आब- बिर्रा
30. श्री सिनेमा - डोंगरगढ़
31. मुरली- कटघोरा
32. पीहू - खरसिया
33. मार्को - सरसींवा
34. जय श्री- नागपुर
35. सुनीलम- कुरूद
36. श्री सिनेमा - पाटन
37. 36 माल - बिलासपुर
38. पी वी आर- बिलासपुर
39. एम बी मॉल- खरियार रोड
40. किशोर- कोंडागांव
41. ग्रैविटी- जैजैपुर
42. निहारिका- कोरबा
43. चित्रा - कोरबा
44. पाची सिनेमा- बालोद
45. सिटी प्लेक्स - भाटापारा