लोकभवन में मनाया गया : विश्वकर्मा जयंती
Thu, Sep 17, 2026
रायपुर।
लोकभवन में आज विश्वकर्मा जयंती धूमधाम से मनाई गई। राज्यपाल रमेन डेका एवं प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी ने भगवान विश्वकर्मा का विधि विधान से पूजा अर्चना कर देश-प्रदेश के खुशहाली के लिए कामना की। उन्होंने सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, विधिक सलाहकार श्रीमती सत्यभामा दुबे एवं लोक भवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
सेवा से सशक्तिकरण तक-बदलती : जिंदगी की कहानियां लिख रहा सेवा संकल्प अभियान
Thu, Sep 17, 2026
00 शासकीय योजनाओं का लाभ बन रहा महिलाओं के आत्मविश्वास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का आधार
विशेष लेख - डॉ. दानेश्वरी संभाकर उप संचालक
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में जनसेवा का अर्थ केवल योजनाओं और कार्यक्रमों के संचालन तक सीमित नहीं है। जनसेवा का वास्तविक अर्थ तब सामने आता है, जब शासन की पहल किसी परिवार की जरूरत पूरी करती है, किसी मां को मातृत्व के दौरान संबल देती है, किसी महिला को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर देती है और किसी बच्चे को कुपोषण से बाहर निकालकर स्वस्थ जीवन की ओर ले जाती है। इसी सोच को जनभागीदारी से जोडऩे का माध्यम बन रहा है सेवा संकल्प अभियान। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के साथ उन्हें आगे बढऩे के अवसर उपलब्ध कराना है। इन योजनाओं का प्रभाव अब आंकड़ों के साथ-साथ उन लोगों की कहानियों में भी दिखाई दे रहा है, जिनके जीवन में शासन की योजनाओं ने नई राह खोली है।
महतारी वंदन से आर्थिक संबल, आत्मनिर्भरता की ओर कदम
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महतारी वंदन योजना महत्वपूर्ण पहल है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रूपए की सहायता सीधे बैंक खातों में दी जा रही है। अब तक 31 किश्तों में 68 लाख रूपए से अधिक महिलाओं को 20 हजार करोड़ रूपए से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। यह राशि कई महिलाओं के लिए परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ आर्थिक निर्णयों में भागीदारी बढ़ाने और छोटे व्यवसाय शुरू करने का माध्यम बनी है।
जांजगीर-चांपा की श्रीमती उर्मिला यादव ने योजना से प्राप्त राशि को बचाकर आर्टिफिशियल गहनों का व्यवसाय शुरू किया। अब वे घर और साप्ताहिक हाट-बाजारों में गहने बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। इसी जिले की श्रीमती ज्योति कसेर ने आर्थिक सहयोग से पापड़ व्यवसाय शुरू किया। ग्राम सरहर की श्रीमती सुमित्रा कर्ष ने श्रृंगार सामग्री की दुकान शुरू की, जबकि कुसुम देवी पाण्डेय ने अपनी दुकान का विस्तार किया।
कबीरधाम की सतरूपा गंधर्व योजना से मिली राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों और बचत के लिए कर रही हैं। वहीं कोण्डागांव की श्यामबती कोर्राम अपनी दोनों बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा कर रही हैं और परिवार के पौष्टिक आहार की जरूरत भी पूरी कर रही हैं।
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि आर्थिक सहायता का प्रभाव केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह परिवार के भविष्य की योजनाओं का आधार भी बन सकता है।
संकट में सुरक्षा, सम्मान के साथ सहायता
महिला सशक्तिकरण का अर्थ आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन भी है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी 33 जिलों में 42 सखी वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं। घरेलू हिंसा, उत्पीडऩ अथवा अन्य संकट की स्थिति में महिलाओं को यहां कानूनी सहायता, चिकित्सकीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और अस्थायी आश्रय जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही है। यह व्यवस्था संकटग्रस्त महिला को केवल सहायता नहीं देती, बल्कि उसे यह भरोसा भी देती है कि कठिन परिस्थिति में शासन उसके साथ खड़ा है।
बेटी के विवाह में आर्थिक संबल
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेटियों का विवाह बड़ी जिम्मेदारी होती है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ऐसे परिवारों को आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है। योजना के तहत अब तक 24 हजार 336 बालिकाओं का सामूहिक विवाह कराया जा चुका है और प्रत्येक जोड़े के विवाह के लिए 50 हजार रूपए की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। यह पहल विवाह के आर्थिक बोझ को कम करने के साथ बेटियों के सम्मानपूर्वक विवाह में परिवारों को सहयोग प्रदान कर रही है।
समूह की ताकत से स्वरोजगार की राह
महिला सशक्तिकरण को स्थायी आधार देने के लिए महिलाओं को आजीविका और उद्यमिता से जोडऩा भी जरूरी है। महिला समृद्धि योजना के अंतर्गत अब तक 42 हजार 878 महिला समूहों को 129.46 करोड़ रूपए का रियायती ऋण उपलब्ध कराया गया है। रियायती ऋण से महिला समूह अपने छोटे व्यवसाय और आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ा रहे हैं। सामूहिक प्रयास से महिलाएं न केवल आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि परिवार और स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी अपनी भूमिका मजबूत कर रही हैं।
मातृत्व का संबल, स्वस्थ बचपन की नींव
सेवा संकल्प की भावना मातृत्व और बाल स्वास्थ्य तक भी पहुंचती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से पात्र गर्भवती महिलाओं और माताओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे गर्भावस्था के दौरान पोषण, स्वास्थ्य जांच और आवश्यक देखभाल में मदद मिलती है। कबीरधाम की श्रीमती संजू तिवारी को पहले बच्चे के जन्म पर 5 हजार रूपए तथा दूसरी संतान बालिका होने पर 6 हजार रूपए की सहायता मिली। उन्होंने इस राशि का उपयोग दूध, फल, पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं पर किया। बेमेतरा की श्रीमती मुकेश्वरी साहू ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन से योजना की जानकारी प्राप्त कर इसका लाभ लिया और सहायता राशि का उपयोग पोषण एवं स्वास्थ्य जांच में किया।
वहीं मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की बालिका हिमांशी कोवाची हमर स्वस्थ लइका कार्यक्रम के माध्यम से अति गंभीर कुपोषण से सामान्य श्रेणी में पहुंची। 16 सप्ताह के विशेष पोषण प्रबंधन के दौरान उसका वजन 9.2 किलोग्राम से बढ़कर 11.50 किलोग्राम हुआ। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियमित गृहभेंट, वजन मापन, स्वास्थ्य परीक्षण और पोषण संबंधी मार्गदर्शन इस बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी बने।
सेवा संकल्पकृआंकड़ों से आगे, बदलाव की पहचान
इन उदाहरणों में सेवा संकल्प अभियान की वास्तविक भावना दिखाई देती है। उर्मिला यादव के लिए योजना की राशि स्वरोजगार का आधार बनी, श्यामबती कोर्राम के लिए बेटियों के भविष्य की सुरक्षा का माध्यम, संकटग्रस्त महिलाओं के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर सुरक्षा और सहायता का भरोसा बना और हिमांशी के लिए सतत पोषण प्रबंधन स्वस्थ जीवन की ओर बढऩे का अवसर बना। यही सेवा संकल्प अभियान की विशेषता है-यह योजनाओं को केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए बदलावों के रूप में देखने और सामने लाने का प्रयास है।
जब शासन की सहायता सही व्यक्ति तक पहुंचती है, तो वह केवल आर्थिक सहयोग नहीं रहती। वह किसी महिला के लिए आत्मविश्वास बनती है, किसी परिवार के लिए उम्मीद, किसी बेटी के लिए सुरक्षित भविष्य और किसी बच्चे के लिए स्वस्थ जीवन की शुरुआत। छत्तीसगढ़ की इन बदलती कहानियों में जनसेवा की सार्थकता दिखाई देती है। सेवा से संकल्प, संकल्प से संबल और संबल से सशक्तिकरण-यही वह यात्रा है, जिसे सेवा संकल्प अभियान जन-जन तक पहुंचा रहा है।
सृजन, कौशल और श्रम के सम्मान का संदेश देती है : भगवान विश्वकर्मा की आराधना: मुख्यमंत्री साय
Thu, Sep 17, 2026
00 मुख्यमंत्री निवास में भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की
00 मुख्यमंत्री ने श्रमवीरों, शिल्पकारों, कारीगरों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को दी विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में सृजन, शिल्प और निर्माण के अधिष्ठाता भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा से प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह सहित मुख्यमंत्री निवास के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री साय ने भगवान विश्वकर्मा को नमन करते हुए प्रदेशवासियों, विशेषकर श्रमवीरों, शिल्पकारों, कारीगरों, अभियंताओं, तकनीशियनों तथा उद्योग और निर्माण क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजनशीलता, कौशल, कर्मनिष्ठा और उत्कृष्टता के प्रतीक हैं। उनकी आराधना हमें अपने ज्ञान, हुनर और परिश्रम से समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देती है। विश्वकर्मा जयंती केवल हमारी आस्था और परंपरा से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह श्रम की प्रतिष्ठा, कौशल के सम्मान और सृजन की शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रदेश और राष्ट्र की प्रगति के पीछे उसके श्रमवीरों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों और निर्माणकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान होता है। खेत-खलिहानों से लेकर कारखानों तक, छोटे-छोटे प्रतिष्ठानों से लेकर बड़े उद्योगों तक और पारंपरिक शिल्प से लेकर आधुनिक तकनीक तक, हमारे कुशल हाथ अपने परिश्रम और प्रतिभा से विकास को आकार देते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान सदैव मेहनतकश लोगों और समृद्ध शिल्प परंपरा की रही है। हमारे शिल्पकारों और कारीगरों ने पीढिय़ों से अपने हुनर के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजा है। वहीं आज के श्रमिक, अभियंता और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े युवा आधुनिक छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। परंपरागत कौशल और आधुनिक तकनीक का यह समन्वय प्रदेश के विकास को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रम केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि सृजन और राष्ट्र निर्माण की शक्ति है। प्रत्येक श्रमिक के परिश्रम और प्रत्येक कारीगर के हुनर का सम्मान करना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। छत्तीसगढ़ के श्रमिक, कारीगर और निर्माण से जुड़े लाखों हाथ अपने परिश्रम से प्रदेश की प्रगति को निरंतर गति दे रहे हैं। उनका श्रम और कौशल समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत नींव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वकर्मा जयंती हमें यह संदेश भी देती है कि हम अपने प्रत्येक कार्य को पूरी निष्ठा, अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता के साथ करें। बदलते समय के अनुरूप कौशल को निरंतर निखारना और नई तकनीक को अपनाना आज की आवश्यकता है। कौशलयुक्त और परिश्रमी मानव संसाधन के बल पर ही हम आत्मनिर्भर, आधुनिक और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने भगवान विश्वकर्मा से प्रार्थना की कि वे प्रदेश के सभी श्रमवीरों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों, अभियंताओं और उद्यमियों को अपने कार्य में निरंतर सफलता प्रदान करें तथा उनके कौशल और परिश्रम से छत्तीसगढ़ प्रगति, समृद्धि और खुशहाली के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।