Friday 23rd of October 2026

ब्रेकिंग

बोलीं- आदिवासी परंपरा और विरासत को सहेजना जरूरी

DA Arrear, फेडरेशन ने CM और वित्त मंत्री को लिखा पत्र

लव ट्रायंगल के शक में प्रेमी ने नाबालिग प्रेमिका को उतारा मौत के घाट, ऐसे खुला हत्या का राज…

NH 53 पर ट्रक में जा घुसी कार, 2 महिलाओं की मौत, 3 घायल, कार के उड़े परखच्चे…

25 अक्टूबर को शाम 7 बजे टीवी पर होगा रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म का महा-प्रीमियर"

सुचना

Welcome to the The News India Live, for Advertisement call +91-9406217841, 9407998418

बुंदेलखंड की ‘क्रांति’! छोटे से गांव की 12 साल की लड़की का क्रिकेट जुन : बुंदेलखंड की ‘क्रांति’! छोटे से गांव की 12 साल की लड़की का क्रिकेट जुनून,पहनने को जूते नहीं और जेब में पैसा नहीं..

Jagbhan Yadav

Mon, Oct 6, 2025

छतरपुर( राजेश यादव ): जो कभी बिना जूते नेट्स में दौड़ती थी, आज वही बल्लेबाज़ों को डराती है। यही कहानी है छतरपुर की क्रांति की।  बुंदेलखंड के छोटे से गाँव घुवारा में, 12 साल की क्रांति गौड़ हर दिन सूखी और ऊबड़-खाबड़ ज़मीन पर क्रिकेट खेलती थी।

ना जूते, ना पूरा किट, सिर्फ़ हौसला और जुनून है। छह भाई-बहनों में सबसे छोटी, क्रांति ने देखा कि उसके माता-पिता रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए कितनी मेहनत करते हैं। जब उनके पिता की नौकरी चली गई, तो माँ ने अपने गहने बेच दिए, ताकि क्रांति खेलना जारी रख सके। आठवीं के बाद स्कूल छोड़ना पड़ा, लेकिन उसका सपना नहीं रुका। एक दिन जब लोकल मैच में खिलाड़ियों की कमी थी, क्रांति ने खुद को मैदान में उतारा और ऐसी गेंदबाज़ी की कि 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' बन गई। क्रांति के पास जूते तक नहीं थे।

कोच राजीव बिठारे ने उसकी प्रतिभा देखी और उसे साई अकादमी ले गए। पहला यूनिफॉर्म और 1600 रुपए दिए ताकि वह क्रिकेट स्पाइक्स खरीद सके। तो इस तरह से छोटे से गांव घुवारा की 12 साल की क्रांति ने अपनी प्रतिभा को निखारा है और वो आगे बढ़ती जा रही है।

Tags :

Bundelkhand revolution 12 year old girl cricket passionChhatarpur lack of money

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें