Monday 26th of October 2026

ब्रेकिंग

इस दिन होगी साय कैबिनेट की अहम बैठक, लिए जाएंगे महत्वपूर्ण निर्णय…..

70 लाख के विभिन्न विकास कार्यों का किया लोकार्पण व भूमिपूजन

छत्तीसगढ़ में 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट, किसानों को सतर्क रहने की सलाह

परंपराओं और नवाचारों का निरंतर उल्लेख प्रदेश के लिए गौरव का विषय – मुख्यमंत्री साय

भद्रा का साया नहीं, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, रायपुर समेत प्रमुख शहरों में चांद निकलने का समय

सुचना

Welcome to the The News India Live, for Advertisement call +91-9406217841, 9407998418

देश की सामूहिक स्मृति के : संरक्षक और भविष्य की कल्पना के सृजक हैं कलाकार: मुर्मु

Jagbhan Yadav

Thu, Aug 13, 2026

नयी दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को यहां देश के प्रतिष्ठित कलाकारों को वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किए और कहा कि भारतीय परंपरा के वाहक ये कलाकार देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक और भविष्य की कल्पना के सृजक हैं।

मुर्मु ने कहा कि सम्मानित किए गए कलाकार मिलकर देश का ऐसा सांस्कृतिक मानचित्र प्रस्तुत करते हैं जिसमें इस देश की मिट्टी की कथाएं और गीत जुड़े हैं, ऐसा मानचित्र जिसमें विविधता से भरी इस धरती के नृत्य और उत्सव समाए हैं और सदियों से विकसित हुई इसकी भाषाओं और बोलियों की यादें समाई हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की संस्कृति जड़ों से जुड़ी हुई है।
अलग-अलग खान-पान, वेषभूषा, नृत्य और संगीत, प्रकृति से प्रेरित हैं।
चहकते हुए चिड़ियों से, कल-कल बहते झरनों से, पेड़-पत्तों से, बादलों से, नदियों से प्रेरणा लेकर कलाकार अपने नृत्य और संगीत को प्रदर्शित करते हैं।
विविधता और एकता का यह संगम हमारी कलाओं की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है।

मुर्मु ने कहा कि सभी विभिन्न कला शैलियों में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने कहा, ” हमारी कलाओं की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक जीवंत गुरु ही होते हैं।
आज के तेजी से बदलते दौर में हमारी बहुत सी लोक-कलाओं पर विलुप्त होने का संकट मंडरा रहा है।
ऐसी कला विधाओं का न केवल साक्ष्य और प्रमाण रखना जरूरी है बल्कि उन्हें जीवंत रखने के लिए विशेष प्रयास जरूरी हो जाते हैं।
”
उन्होंने कहा यह अच्छी बात है कि संगीत नाटक अकादमी इसी उद्देश्य से ‘कला-दीक्षा’ कार्यक्रम का आयोजन कर रही है।
उन्होंने वरिष्ठ कलाकारों से कहा कि वे अगली पीढ़ी को तैयार करने के लिए योजनापूर्वक प्रयास करें।

राष्ट्रपति ने कहा कि कला के संस्कार और समझ से जीवन को समृद्ध करने के लिए प्रकृति को सबसे सहज प्रशिक्षण संस्थान माना जाता है।
लोक और जनजातीय कलाओं में जीवन का स्वाभाविक उल्लास और प्रकृति के साथ गहरा संवाद दिखाई देता है।
इन कला रूपों में समुदाय की स्मृति और सामूहिक चेतना सहज रूप से व्यक्त होती है।
यही कारण है कि लोक कलाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान का अत्यंत महत्त्वपूर्ण आधार हैं।

राष्ट्रपति ने पुरस्कार पाने वाले कलाकारों को बधाई दी और कहा कि भारतीय परंपरा के वाहक हमारे कलाकार देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक और भविष्य की कल्पना के सृजक हैं।

उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी को भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अकादमी आने वाले समय में भी भारत की सांस्कृतिक ऊर्जा से समूचे विश्व को लाभान्वित करती रहेगी।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें