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Ayushman Card: : आयुष्मान भारत कार्ड में बड़ा बदलाव: अब नए सदस्य जोड़ने का विकल्प बंद

Jagbhan Yadav

Fri, Jan 2, 2026

दिल्ली- आयुष्मान भारत योजना में अब एक बड़ा परिवर्तन किया गया है। अब नए आयुष्मान कार्ड केवल आधार आधारित ई-केवाईसी (ऑनलाइन-केवाईसी) पूरी होने के बाद ही जारी किए जाएंगे। यह कदम योजना की पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी कार्डों की रोकथाम के लिए उठाया गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने इसके लिए बेनिफिशरी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (BIS-2.0) को लागू किया है। इस नई प्रणाली के तहत सभी लाभार्थियों की पहचान अनिवार्य रूप से आधार ई-केवाईसी के माध्यम से सत्यापित होगी।

नए सदस्य जोड़ने का विकल्प बंद
इस व्यवस्था के लागू होने के साथ ही आयुष्मान कार्ड में नए सदस्यों को जोड़ने (एड मेंबर) का विकल्प समाप्त कर दिया गया है। अब केवल SECC-2011 के तहत शेष पात्र परिवारों में ही नियमों के अनुसार नए सदस्यों को जोड़ा जा सकेगा।

ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर से होगी निगरानी
स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि संदिग्ध कार्डों की पहचान स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट पोर्टल (SAFU BIS) के माध्यम से की जा रही है। एनएचए ने इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है, जिससे संदिग्ध कार्ड तुरंत चिन्हित हो जाते हैं और उन पर इलाज की सुविधा रोक दी जाती है। इसके बाद इन कार्डों की जांच ऑडिटर द्वारा की जाती है। जांच में सही पाए जाने वाले कार्डों को संदिग्ध श्रेणी से बाहर कर दिया जाता है।

61,932 कार्ड पाए गए संदिग्ध
अर्चना वर्मा ने बताया कि 2018 से अब तक जारी किए गए आयुष्मान कार्डों में से 61,932 कार्ड संदिग्ध पाए गए हैं। इनकी जांच जिला स्तर पर फील्ड इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (FIO) द्वारा की जा रही है। अब तक 48,435 कार्डों का भौतिक सत्यापन पूरा किया जा चुका है।

जिलाधिकारियों को भेजी सूची
संदिग्ध कार्डों की सूची जिलाधिकारियों (DM), मुख्य विकास अधिकारियों (CDO) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को भेजकर जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान यदि कोई कर्मचारी संदिग्ध पाया जाता है, तो एसटीएफ रिपोर्ट के आधार पर उसे तत्काल 

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